10 सितंबर 1924 को करीबन 4000 की मुस्लिम भीड़ ने 3000 हिंदुओं को इतना मजबूर कर दिया कि उन्हें भाग कर मंदिर में शरण लेनी पड़ी। जो पीछे छूटे उन्हें मार डाला गया।
तेलंगाना पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है और तथाकथित 'शरिया पुलिस' के चार लोगों को गिरफ्तार किया है। लेकिन दो मुख्य आरोपित अभी भी फरार हैं।
हिंदुत्व को वैश्विक खतरा बताने के पीछे सोच यह है कि इस्लामिक आतंकवाद से जूझ रही दुनियाँ को एक बनावटी डिस्कोर्स थमा कर उसे किसी और रास्ते पर लगा दिया जाए ताकि पहले से चल रही तमाम भ्रांतियों की रक्षा की जा सके।
NIA ने अल-हिंद के एक आतंकवादी के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की है। इससे पता चला है कि वह दक्षिण भारत में 'इस्लामी खिलाफत' स्थापित करने की कोशिश में था।
"जो लोग सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के पीछे डंडा लेकर पड़े थे वे बड़ी चतुराई से इस प्रोजेक्ट (डिफेंस कॉम्प्लेक्स) पर बिलकुल चुप रहते थे। ये भी सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का ही हिस्सा है।"