सूर्या की बकरीद के दिन 'कुर्बानी' दिखाने ले गए असद, फहरीन वगैरह ने हत्या कर दी। घटना पर न तो मुस्लिम बहुल इलाके में कोई कुछ कहना चाहता है और न ही वामपंथी लिबरल गैंग।
लोकतंत्र में संख्या बल ही किसी भी भाषाई समूह की माँगों को मजबूती देता है। बहुभाषी भारत में यह जनगणना तय करती है कि आने वाले समय में सरकारी संसाधन और प्रशासनिक विकास किस दिशा में आगे बढ़ेंगे।