मध्य प्रदेश में कांटे की टक्कर में कांग्रेस निकली आगे, वोट शेयर में भाजपा अव्वल

सीटों के मामले में मध्य प्रदेश में कांग्रेस आगे तो निकली लेकिन बहुमत से दो सीट पीछे रह गई। वहीं भाजपा 41% मतों के साथ वोट शेयर में अव्वल रही। निर्दलीयों को चार सीटें मिली।

मंगलवार को पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे आये जिसमे सबसे ज्यादा ऊहापोह की स्थिति मध्य प्रदेश में रही। देर रात तक चल रही वोटों की गिनती में कभी कांग्रेस तो कभी भाजपा आगे निकलते हुए दिखाई पड़ती रही और अंततः कांग्रेस बहुमत से सिर्फ दो सीट पीछे रह गई। चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार कांग्रेस को 114 सीटें आई तो वहीं भाजपा 109 सीटों को अपनी झोली में डालने में कामयाब रही। सपा को एक तो बसपा को दो सीटों से संतोष करना पड़ा। निर्दलीयों के खाते में चार सीटें आई। मतगणना से प्राप्त परिणाम आज सुबह तक साफ़ हुए लेकिन कांग्रेस ने देर रात ही राज्यपाल आनंदी बेन पटेल को ईमेल और फैक्स भेजकर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया

मध्य प्रदेश की चुनावों की मतगणना किसी टी-20 के मैच की तरह चली जिसने दोनों तरफ के समर्थकों को अपने-अपने पार्टियों के जीतने की उम्मीद तब तक कायम रही जब तक चुनाव आयोग की वेबसाइट पर पूरे नतीजे नहीं आ गए। वहीं कांग्रेस ने भले ही भाजपा से 5 सीटें ज्यादा जीती हो लेकिन वोट शेयर के मामले में वो पीछे रह गई। कांग्रेस को कुल 40.9% वोट पड़े तो भाजपा 41% मत बटोर कर इस मामले में अव्वल रही। इन दोनों पार्टियों के बाद निर्दलीयों का नम्बर आता है जिन्होंने 5.8% मत प्राप्त हुए। निर्दलीयों ने राज्य की चार विधानसभा सीटों पर कब्जा किया है।

उधर मध्य प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष राकेश सिंह ने भी देर रात एक बजे के करीब ट्वीट कर कहा कि जनादेश कांग्रेस के पक्ष में नहीं है और भाजपा भी राज्यपाल से मिल कर सरकार बनाने का दावा पेश करेगी।

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लेकिन आंकड़ों की माने तो प्रदेश में कांग्रेस की सरकार तय लग रही है क्योंकि अगर वो चार निर्दलीयों का समर्थन जुटा लेती है फिर भी भाजपा का आंकड़ा 113 ही पहुंचता है जो बहुमत के लिए जरूरी 116 सीटों से तीन कम है। वहीं कांग्रेस को सरकार बनाने के लिए सिर्फ दो विधायकों के समर्थन की दरकार है।

मध्य प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों के लिए 28 नवंबर को मतदान आयोजित किया गया था जिसमे 75% से ज्यादा मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था।

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