जयललिता से तृषा कृष्णन तक मामला बताता है कि तमिलनाडु की राजनीति में महिलाओं को कैसे निशाना बनाया जाता है। एक विधानसभा के अंदर का तो दूसरा राजनीतिक मंच का।
फ्रांस ने अपने एक्स पायलट को गिरफ्तार किया है, जिस पर चीन के लिए जासूसी करने का आरोप है। उसने 'ऑपरेशन सिंदूर' के वक्त राफेल गिरने का झूठा दावा किया था।
कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने छात्रों की माँग का समर्थन करते हुए पीसी किया और पीएम मोदी ने माफी की माँग की। लेकिन कॉन्ग्रेस राज में पेपर लीक पर कभी किसी ने इस्तीफा नहीं दिया।
जब CJP का एजेंडा एक्सपोज हुआ, तो 'आंदोलनजीवी' योगेंद्र यादव ने 'पंचशील' का प्रपंच रच डैमेज कंट्रोल किया। इसमें 'जय भीम' और 'इंकलाब जिंदाबाद' से हिंदुओं को गुमराह किया जाता रहा है।
कॉकरोच जनता पार्टी का 'संसद मार्च' क्या दिल्ली को हिंसा की आग में झोंकने की साजिश है, क्योंकि 2020 के हिन्दू विरोधी दंगों का पैटर्न भी ऐसा ही था। अभी सिर्फ मुखौटा बदल गया है।