"यूपी कांग्रेस के लिए परिणाम निराशाजनक हैं। अपनी ज़िम्मेदारी को सफ़ल तरीके से नहीं निभा पाने के लिए ख़ुद को दोषी पाता हूँ। नेतृत्व से मिलकर अपनी बात रखूँगा।"
रामचंद्र गुहा ने कहा, "राहुल गाँधी ने अपना आत्मसम्मान, राजनीतिक कद दोनों ही गँवा दिया है। मैं माँग करता हूँ कि कॉन्ग्रेस को अब एक नए नेतृत्व की जरूरत है, लेकिन कॉन्ग्रेस के पास वो भी नहीं है।”
बसपा से गठबंधन होने के बाद सपा के पूर्व अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने अपनी नाराज़गी जाहिर की थी। उनका कहना था कि उनके बेटे अखिलेश ने उनसे बिना पूछे ये कदम उठाया।
मायावती ने यूपी में कुछ सीटों पर गठबंधन को मिली जीत को भाजपा की सोची-समझी साजिश बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने ऐसा इसलिए किया है ताकि चुनाव पूरी तरह से प्रभावित नजर न आए और कोई सवाल न उठा सके।
प्रियंका गाँधी अक्सर ईरानी पर यह आरोप लगाती थी कि वो एक बाहरी व्यक्ति हैं और उन्हें अमेठी के मतदाताओं की कोई परवाह नहीं है। उनके इन बेबुनियादी आरोपों का जवाब, राहुल को न चुनकर स्मृति को चुनकर जनता ने ख़ुद ही दे दिया।
तस्वीर पूरी तरह साफ़ हो चुकी है और स्मृति ईरानी को हर जगह से जीत की बधाइयाँ मिल रही हैं, और राहुल गाँधी खुद अपनी हार स्वीकार चुके हैं तो सोशल मीडिया यूजर्स सिद्धू से उनसे इस्तीफे की माँग कर रहे हैं।
एएनआई के मुताबिक, राजधानी दिल्ली में शनिवार (मई 25, 2019) को कॉन्ग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक होगी। जिसमें पार्टी की हार की वजहों पर चर्चा करने करने के साथ ही कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर किसी बड़े फैसले की भी उम्मीद की जा रही है।
कॉन्ग्रेस को अब राहुल गाँधी के आगे सोचना होगा, एक नेता और देश के नेतृत्त्व के लिए वे स्वयं को सर्वोत्तम प्रत्याशी साबित नहीं कर पाए हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि वे स्वयं भी प्रधानमंत्री बनना नहीं चाहते हैं और उन्हें पार्टी जबरदस्ती नेता बना कर रखना चाहती है।