फैक्ट चेक: क्या भूपेन हजारिका के परिवार ने सच में की भारत रत्न न स्वीकार करने की बात

राज्य सरकार ने डॉ हज़ारिका के लिए भारत रत्न की मांग का प्रस्ताव केंद्र सरकार को उनकी मृत्यु के तुरंत बाद दिया था। लेकिन उस समय की यूपीए सरकार ने भूपेन हजारिका को यह सम्मान देने से इनकार कर दिया था।

भूपेन हजारिका के बेटे तेज हजारिका ने अपने फेसबुक पोस्ट के जरिए कहा है कि उन्हें भारत रत्न पुरस्कार लेने के लिए अभी तक कोई निमंत्रण ही नहीं मिला है, ऐसे में इस सम्मान को खारिज करने का सवाल ही नहीं उठता है।

दरअसल पिछले दिनों कई मीडिया हाउस ने ख़बर उड़ाई कि डॉ भूपेन हजारिका के परिवार ने भारत रत्न लेने से इंकार कर दिया है जिसे भारत सरकार ने पिछले महीने भूपेन हज़ारिका को प्रदान करने का फैसला लिया था। 25 जनवरी को भारत सरकार द्वारा यह घोषणा की गई थी कि डॉ हज़ारिका, प्रणब मुखर्जी और नानाजी देशमुख को भारत रत्न से सम्मानित किया जाएगा।

पिछले दिनों ख़बरों के जरिए यह उभर कर आया कि भूपेन हजारिका परिवार के सदस्य तेज हज़ारिका ने इस पुरस्कार को लौटाने की घोषणा की है। अमेरिका में रहने वाले तेज, भूपेन हज़ारिका की एकमात्र संतान हैं। यह बताया गया कि नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध में तेज ने पुरस्कार लेने से इनकार किया है।

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पुरस्कार लौटाने के इस ख़बर के कुछ ही समय बाद जब तेज हजारिका की ओर से जारी बयान सामने आया, तो यह स्पष्ट हो गया कि मुख्यधारा की मीडिया से आ रही यह ख़बर फर्जी थी।

दरअसल,फेसबुक पर जारी एक बयान में, तेज ने स्पष्ट रूप से कहा कि पुरस्कार को स्वीकार करने या मना करने का कोई सवाल ही नहीं है, क्योंकि उन्हें सरकार से ऐसा कोई निमंत्रण नहीं मिला है।

उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें सफाई देनी पड़ रही है क्योंकि उन्हें इस संबंध में लगातार मीडिया से सवाल पूछे जा रहे हैं। हालाँकि, तेज हजारिका ने अपने बयान में नागरिकता संशोधन विधेयक के ख़िलाफ़ लिखा है कि उनके पिता का नाम एक अलोकप्रिय बिल पास करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन उन्होंने अपने बयान में हजारिका परिवार द्वारा भारत रत्न पुरस्कार लेने से इनकार करने का जिक्र अपने फेसबुक पोस्ट में नहीं किया है। पुरस्कार वापसी वाली बात का आविष्कार मेन स्ट्रीम मीडिया द्वारा किया गया था।

जानकारी के लिए बता दें कि जब भारत सरकार द्वारा डॉ भूपेन हजारिका के नाम की घोषणा भारत रत्न के लिए की गई थी, तब तेज हजारिका ने इस कदम का स्वागत किया था। उन्होंने कहा था कि उनके पिता को भारत रत्न से सम्मानित करने का निर्णय मानवता, विविधता और देश के धर्मनिरपेक्ष चरित्र की जीत है।

उस समय, उन्होंने इसे नागरिकता संशोधन विधेयक के साथ नहीं जोड़ा था। हालाँकि, इस बिल का राज्य में विरोध हो रहा है, लेकिन बिल का विरोध करने वाले अधिकांश लोगों ने इसे भारत रत्न से नहीं जोड़ा था, केवल कांग्रेस पार्टी के कुछ नेताओं ने ऐसा करने की कोशिश की थी। जिसके लिए कॉन्ग्रेस पार्टी को राज्य में आलोचना का सामना करना पड़ा था।

तेज हजारिक अपने बयान में लिखते हैं कि सरकार ने यह फ़ैसला अपने अल्पकालिक सस्ते लाभ के लिए लिया है। इस तरह तेज हजारिका द्वारा एक अजीबो-गरीब तर्क देकर देश के सम्मानित पुरस्कार का राजनीतिकरण किया जा रहा है।

भूपेन हजारिका के भाई समर हजारिका और भाभी मनीषा हजारिका ने कहा कि तेज हजारिका के विचार उनके अपने हैं और वे पूरे परिवार के विचार नहीं हैं। डॉ भूपेन हजारिका के परिवार के सदस्यों ने कहा है कि वे तेज हजारिका की टिप्पणियों से सहमत नहीं हैं और इस बात पर जोर दिया कि भूपेन हजारिका भारत रत्न के हकदार हैं। उन्होंने कहा कि भूपेन हजारिका को दिए गए इस पुरस्कार को किसी विवाद में नहीं घसीटना चाहिए।

जानकारी के लिए बता दें कि जब भूपेन हजारिका के लिए भारत रत्न की घोषणा की गई, तो पूरे राज्य ने राजनीतिक संबद्धता के बावजूद इस कदम का स्वागत किया गया था। डॉ हजारिका के लिए भारत रत्न की मांग लंबे समय से की जा रही थी, राज्य सरकार ने उनकी मृत्यु के तुरंत बाद केंद्र सरकार को प्रस्ताव दिया था। लेकिन उस समय की यूपीए सरकार ने भूपेन हजारिका को यह सम्मान देने से इनकार कर दिया था। यही नहीं भूपेन हजारिका कॉन्ग्रेस के ख़िलाफ़ भाजपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव भी लड़े थे। डॉ हजारिका को भारत रत्न से सम्मानित करने के हालिया फैसले को देर से लिया गया लेकिन स्वागत योग्य फ़ैसले के रूप में देखा जाना चाहिए।


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