Fact Check: क्या चेन्नई रेलवे डिवीजन में एक चूहे पकड़ने में खर्च किए ₹22000?, CNN-News 18 की रिपोर्ट भ्रामक

CNN News 18 ने 9 अक्टूबर को छपी अपनी रिपोर्ट में कहा कि चेन्नई रेलवे डिवीजन चूहे को पकड़ने के लिए 22,300 रुपए प्रति चूहे की दर से खर्च किए। इस रिपोर्ट में कहा गया कि चेन्नई रेलवे डिवीजन ने मई 2016 से अप्रैल 2019 के बीच चूहे को पकड़ने के लिए 5.89 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। जोकि भ्रामक और......

मेनस्ट्रीम मीडिया आउटलेट ने हाल ही में एक खबर चलाई कि चेन्नई रेलवे डिवीजन चूहे को पकड़ने के लिए भारी भरकम रकम खर्च कर रहा है। उन्होंने अपने रिपोर्ट में बताया कि रेलवे की चेन्नई डिवीजन ने एक चूहे को पकड़ने पर 22,334 रुपए खर्च किए। जबकि, रेलवे विभाग ने इस खबर को सिरे से खारिज कर दिया है।

बता दें कि CNN News 18 ने 9 अक्टूबर को छपी अपनी रिपोर्ट में कहा कि चेन्नई रेलवे डिवीजन चूहे को पकड़ने के लिए 22,300 रुपए प्रति चूहे की दर से खर्च किए। इस रिपोर्ट में कहा गया कि चेन्नई रेलवे डिवीजन ने मई 2016 से अप्रैल 2019 के बीच चूहे को पकड़ने के लिए 5.89 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

CNN में प्रकाशित खबर का स्क्रीनशॉट

इसके दो दिन बाद यानी कि 11 अक्टूबर को अमर उजाला ने भी इसी हेडलाइन के साथ खबर बनाई और इसमें भी एक चूहे को पकड़ने पर  22,334 रुपए खर्च करने का दावा किया गया। जनसत्ता ने भी 9 अक्टूबर को यह रिपोर्ट प्रकाशित की।

- विज्ञापन - - लेख आगे पढ़ें -

अब दक्षिण रेलवे ने एक बयान जारी किया है। जिसमें कहा गया है कि एक चूहे को मारने पर 22,000 रुपए से अधिक खर्च की बात को गलत और अनुचित बताया है। उन्होंने कहा कि ये गिनती तो मरे हुए उन चूहों की है जिन्हें पकड़ा गया। जो दवा के असर से कहीं और जाकर मरे उनका हिसाब नहीं है। अधिकारी ने बताया कि ट्रेन के कोच में लगे गोंद पर बड़े चूहे अटक नहीं पाते हैं, और किसी दूसरी जगह पर जाकर मर जाते हैं। जिसकी गिनती नहीं हो पाती है। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि एक चूहे को पकड़ने पर 22 हजार से अधिक खर्च हुए।

रेलवे अधिकारियों ने अपने बयान में इस बात पर जोर दिया कि यात्रियों को ट्रेन और स्टेशन पर साफ-सफाई उपलब्ध कराना भारतीय रेलवे की प्राथमिक जिम्मेदारियों में से एक है और इस गतिविधि पर होने वाला खर्च यात्रियों को बेहतर सुविधा प्रदान करने के लिए है।

तथ्यों के साथ छेड़छाड़ करके रिपोर्ट पेश करना मेनस्ट्रीम मीडिया के लिए कोई नई बात नहीं है। ऑपइंडिया नियमित रूप से इस बात पर रिपोर्ट करता आया है कि मुख्यधारा की मीडिया किस तरह से किसी तथ्य को गलत तरीके से पेश करके नैरेटिव गढ़ता है। अपूर्णता उनकी रिपोर्टिंग की एक विशेषता बन गई है और अब इसे रिपोर्ट में ‘गलती’ नहीं माना जा सकता है।

रेल मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में भारतीय रेलवे मीडिया का पसंदीदा टारगेट रहा है और इसको लेकर गलत तथ्य फैलाए जाते रहे हैं। हाल ही में लिबरल मीडिया और कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँँधी ने रिलायंस जियो द्वारा जीते गए रेलवे टेंडर के बारे में झूठ फैलाया था। इसके अलावा एक और झूठ यह फैलाई गई थी कि ट्रेन में सामान बेचने वाले हॉकर को राजनेताओं का नकल उतारने के लिए गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि सच्चाई यह थी कि उसे अवैध रूप से हॉकिंग करने के लिए गिरफ्तार किया गया था। इस तरह के अवैध हॉकिंग को लेकर उसकी इस तरह की गिरफ्तारी पहले भी हो चुकी थी।

शेयर करें, मदद करें:
Support OpIndia by making a monetary contribution

बड़ी ख़बर

"हिन्दू धर्मशास्त्र कौन पढ़ाएगा? उस धर्म का व्यक्ति जो बुतपरस्ती कहकर मूर्ति और मन्दिर के प्रति उपहासात्मक दृष्टि रखता हो और वो ये सिखाएगा कि पूजन का विधान क्या होगा? क्या जिस धर्म के हर गणना का आधार चन्द्रमा हो वो सूर्य सिद्धान्त पढ़ाएगा?"

सबसे ज़्यादा पढ़ी गईं ख़बरें

ताज़ा ख़बरें

हमसे जुड़ें

115,259फैंसलाइक करें
23,607फॉलोवर्सफॉलो करें
122,000सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

ज़रूर पढ़ें

Advertisements
शेयर करें, मदद करें: