Monday, May 10, 2021
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पादरी ने कोरोना वायरस से बचाने के नाम पर चेले-चेलियों को पिलाया डिटॉल? – Fact Check

साल 2016 में भी पादरी फला ने अपने अनुयायियों को डेटॉल पिलाया था। उस समय उसने दावा किया था कि इसमें गुप्त चिकित्सीय गुण हैं और यह उनकी बीमारियों को ठीक कर देगा। पादरी ने मामला तूल पकड़ने पर स्वीकार किया था कि...

विश्व में कोरोना वायरस के बरपे कहर के बीच केन्या रिपोर्ट में हैरान करने वाली खबर प्रकाशित हुई। खबर में दावा किया गया कि दक्षिण अफ्रीका में रुफुस फला नामक पादरी ने एक चर्च में अपने अनुयायियों को कोरोना से बचाने के नाम पर डिटॉल पिला दिया, जिसके कारण 59 लोगों की मौत हो गई और 4 अभी गंभीर स्थिति में हैं।

हालाँकि, इस खबर में कितनी सच्चाई है इसकी पुष्टि करने से पहले बता दें कि यहाँ जिस पादरी को लेकर ये खबर आई है वे कई बार अपने अनुयायियों को कीटाणुनाशक (जिक और डिटॉल) पिलाने के लिए चर्चा में रह चुका है। मगर, इस बार, डिटॉल पीने के कारण 59 लोगों की मौत की खबर केन्या रिपोर्ट के अलावा कहीं भी प्रकाशित नहीं हुई है और केन्या रिपोर्ट ने भी इसे थोड़ी देर बाद अपनी वेबसाइट से हटा लिया। लेकिन लिंक पर क्लिक करके हम देख सकते हैं कि रिपोर्ट के डिलीट होने के बावजूद यूआरएल अब भी वहीं पर दिख रहा है।

यहाँ बता दें कि इस डिलीट की गई रिपोर्ट में केन्या रिपोर्ट ने जो फीचर इमेज लगाई थी, वो भी पुरानी है। इसलिए डिटॉल पीने के कारण 59 लोगों की मौत वाली खबर की प्रमाणिकता पर संदेह हुआ।

मगर, बता दें कि केन्या रिपोर्ट की खबर में इस घटना की जाँच कर रही पुलिस का हवाला दिया गया था और बताया गया था कि पादरी ने पहले अनुयायियों को यह विश्वास दिलाया कि कोरोना वायरस के खतरे को कीटाणुनाशक द्वारा खत्म किया जा सकता है। उसके बाद उन्हें मुँह से उसका सेवन करवाया और जो लोग पहले ही इससे संक्रमित थे, उन्हें भी पादरी ने यकीन दिलाया कि इस कीटाणुनाशक को पीने से कोरोना का उपचार हो सकता है।

हालाँकि, अब अन्य जगहों पर ये खबर प्रकाशित न होने के कारण इस बात की पुष्टि नहीं हो सकती है कि पादरी रुफुस ने कोरोना वायरस से बचाने का हवाला देकर अपने अनुयायियों को डिटॉल पिलाया या नहीं? लेकिन ये बात शत-प्रतिशत सच है कि ये पादरी पिछले सालों में ऐसी हरकत करता पकड़ा जा चुका है।

बता दें कि साल 2018 में फला द्वारा उसके अनुयायियों को जिक नाम का डिटर्जेंट पिलाने का मामला सामने आया था। उस समय फला ने दावा किया था कि उसने अपनी मंत्रों की शक्तियों से डिटर्जेंट को य़ीशु के खून में बदल दिया है और अब यह डिटर्जेंट नहीं बल्कि केवल यीशु का खून हैं।अपनी बात पर यकीन दिलाने के लिए पादरी ने लोगों को बाइबल की उस कहानी का उदाहरण भी दिया था, जिसमें यीशु ने अपने भक्तों को शराब पीने को दी थी और कहा था कि यह उनका खून है।

साल 2016 में भी पादरी फला ने अपने अनुयायियों को डेटॉल पिलाया था। उस समय उसने दावा किया था कि इसमें गुप्त चिकित्सीय गुण हैं और यह उनकी बीमारियों को ठीक कर देगा। पादरी ने मामला तूल पकड़ने पर स्वीकार किया था कि वह जानता था कि डेटॉल मानव उपभोग के लिए हानिकारक है, लेकिन उसे प्रभु ने कहा था। इसलिए उसने इसका सेवन पहले खुद किया और बाद में अपने अनुयायियों को इसके बारे में बताया कि इसे पीने से वास्तव में कई बीमार ठीक हो गए।

क्या पादरी रुफुस फला ने इस साल भी 2016 की तरह अपने चेले-चेलियों को डेटॉल पिलाया? नहीं। क्योंकि एकमात्र खबर जो इस संबंध में पब्लिश की गई थी, वो डिलिट की जा चुकी है और किसी अन्य मीडिया ने अभी तक इस खबर को प्रकाशित नहीं किया है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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