Sunday, May 19, 2024
Homeफ़ैक्ट चेकमीडिया फ़ैक्ट चेकअनाज के अभाव में बिहार के बच्चे खा रहे मेंढक, Scroll ने किया दावा:...

अनाज के अभाव में बिहार के बच्चे खा रहे मेंढक, Scroll ने किया दावा: फर्जी साबित हुई रिपोर्ट

वीडियो में किए गए दावों की जाँच करने पर यह पाया गया कि बच्चों के घरों में पर्याप्त भोजन इकट्ठा था और इनमें से किसी के पास मेंढक पकड़ने या खाने का कोई कारण नहीं था। इस वीडियो को कुछ लोगों ने जिला प्रशासन की छवि धूमिल करने के लिहाज से बनाया था।

बिहार के जहानाबाद में कुछ बच्चे खाना न मिलने के कारण लॉकडाउन में मेंढक खाने को मजबूर हैं। वामपंथी मीडिया पोर्टल स्क्रॉल ने ‘newsd’ नाम के यूट्यूब चैनल की एक वीडियो शेयर करते हुए यह दावा किया। जिसके बाद वहाँ के जिलाधिकारी ने खुद इस दावे की जाँच की और इन अफवाहों का खंडन करके स्क्रॉल के प्रोपगेंडे को ध्वस्त किया।

बिहार सरकार के सूचना और जनसंपर्क विभाग ने जानकारी साझा की कि वीडियो द्वारा किए गए दावों की जाँच करने पर, यह पाया गया कि बच्चों के घरों में पर्याप्त भोजन इकट्ठा था और इनमें से किसी के पास मेंढक पकड़ने या खाने का कोई कारण नहीं था। उन्होंने कहा कि इस वीडियो को कुछ लोगों ने जिला प्रशासन की छवि धूमिल करने के लिहाज से बनाया था।

इस स्पष्टीकरण के बाद पीआईबी फैक्ट चेक की टीम ने भी स्क्रॉल द्वारा शेयर की गई वीडियो को फर्जी और असत्यापित बताया। इसके अलावा बिना तथ्यों की जाँच परख के निराधार दावे करने पर पीआईबी ने लिखा, “स्क्रॉल- एक प्रमुख मीडिया चैनल ने जहानाबाद में बच्चों के मेंढक खाने को लेकर झूठा दावा किया कि उनके पास खाने को कुछ नहीं है। इसके बाद वीडियो वायरल हुआ। मगर डीएम जहानाबाद की जाँच में ये दावा झूठा पाया गया और ये भी पता चला कि इन बच्चों के घरों में खाने को पर्याप्त सामग्री थी।”

बता दें कि डीएम की ओर से की गई पड़ताल के बाद स्क्रॉल को अपनी रिपोर्ट को अपडेट करना पड़ा और उन्होंने ये भी बताया कि उनके झूठ का पर्दाफाश डीएम की पड़ताल के बाद हुआ।

गौरतलब है कि इससे पहले एनडीटीवी ने भी अरुणाचल प्रदेश को लेकर एक ऐसी झूठी खबर फैलाई थी। अपनी खबर में एनडीटीवी ने दावा किया था कि वहाँ पर लोग सांप का शिकार करके उसे खाने पर मजबूर हैं क्योंकि उनके पास चावल खाने को नहीं है। उन्होंने अपनी बात को सही साबित करने के लिए सोशल मीडिया पर कई वीडियो भी पोस्ट की, जिसमें वहाँ के अनुसूचित जनजाति के लोग 12 फीट का किंग कोबरा लेकर पोज दे रहे हैं। इस वीडियो को लेकर दावा किया कि उन्होंने किंग कोबरा का खाने के लिए शिकार किया।

एनडीटीवी ने किंग कोबरा के शिकारियों को लेकर फैलाया भ्रम

बाद में केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने इस खबर के लिए एनडीटीवी की आलोचना की। उन्होंने कहा कि किंग कोबरा एक संरक्षित प्रजाति है और उसका सेवन करने के लिए कोई जनजाति उसका शिकार नहीं करती। इसके अलावा रिजिजू व अरुणाचल सरकार ने एनडीटीवी पर झूठी खबर फैलाने का भी आरोप लगाया। साथ ही स्पष्ट किया कि वहाँ चावल की कोई कमी नहीं है।

Special coverage by OpIndia on Ram Mandir in Ayodhya

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

जिसे वामपंथन रोमिला थापर ने ‘इस्लामी कला’ से जोड़ा, उस मंदिर को तोड़ इब्राहिम शर्की ने बनवाई थी मस्जिद: जानिए अटाला माता मंदिर लेने...

अटाला मस्जिद का निर्माण अटाला माता के मंदिर पर ही हुआ है। इसकी पुष्टि तमाम विद्वानों की पुस्तकें, मौजूदा सबूत भी करते हैं।

रोफिकुल इस्लाम जैसे दलाल कराते हैं भारत में घुसपैठ, फिर भारतीय रेल में सवार हो फैल जाते हैं बांग्लादेशी-रोहिंग्या: 16 महीने में अकेले त्रिपुरा...

त्रिपुरा के अगरतला रेलवे स्टेशन से फिर बांग्लादेशी घुसपैठिए पकड़े गए। ये ट्रेन में सवार होकर चेन्नई जाने की फिराक में थे।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -