Homeदेश-समाजरामजन्मभूमि मामले में मध्यस्थता से निकलेगा समाधान: SC का बड़ा फैसला

रामजन्मभूमि मामले में मध्यस्थता से निकलेगा समाधान: SC का बड़ा फैसला

मध्यस्थता की प्रक्रिया एक हफ्ते में शुरू हो जानी चाहिए। चार हफ्ते में पहली रिपोर्ट आ जानी चाहिए और आठ हफ्ते में पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।

अयोध्या में रामजन्मभूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अयोध्या मसले का समाधान मध्यस्थता से निकाला जाए। मध्यस्थता के लिए पूर्व जस्टिस कलीफुल्ला की अध्यक्षता में एक पैनल बनाया जाएगा। इस पैनल में श्री श्री रविशंकर, वरिष्ठ वकील श्रीराम पांचू होंगे। मध्यस्थता की कार्यवाही पूरी तरह से गोपनीय होगी। मध्यस्थता की प्रक्रिया फैज़ाबाद में होगी। यह ।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मामले की रिपोर्टिंग न की जाए। मध्यस्थता की प्रक्रिया एक हफ्ते में शुरू हो जानी चाहिए। चार हफ्ते में पहली रिपोर्ट आ जानी चाहिए और आठ हफ्ते में पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। यह फैसला पाँच जजों पांच जजों की संवैधानिक बेंच ने दिया है जिसमें चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस चंद्रचूड़, जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस ए बोबडे शामिल थे।

पैनल के सदस्य और सदस्यों को भी पैनल का सदस्य बना सकते हैं। पक्षकार पैनल के सामने यह भी कहने को स्वतंत्र हैं कि वो मध्यस्थता नहीं चाहते।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -