लैंडर विक्रम का नाम होता टीपू सुल्तान तो अपने तलवार से भेजता सिग्नल: वामपंथी मीडिया गिरोह

विक्रम ने बताया कि हाल ही में उसने कुछ खबरें पढ़ी हैं जिसमें बाइक की कीमत से ज्यादा चालान काटा जा रहा है। इसी कारण उसे डर है कि संदेश भेजते ही ट्रैफिक पुलिस उसे ओवरस्पीडिंग, हेलमेट न पहनने, चलते वक्त पर बात करने और एक छोटे बच्चे (प्रज्ञान) को डिक्की में बिठाने के लिए चालान काट देगी।

नई खबरों के अनुसार चंद्रयान द्वितीय ऑर्बिटर ने चंद्रमा की कक्षा से खबर भेजी है कि विक्रम लैंडर चाँद की सतह पर ही है, और थोड़ा झुका हुआ है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) ने बताया कि उनके पास जानकारी आई है कि विक्रम लैंडर टूटा-फूटा तो नहीं है, लेकिन कुछ संदेश नहीं भेज पा रहा।

वामपंथी मीडिया ने मजाक उड़ाते हुए कहा है कि विक्रम का नाम टीपू सुल्तान रखते तो एंटेना की जगह वह अपने तलवार से सिग्नल भेज सकता था। साथ ही, ‘लायर’, ‘डू नॉट प्रिंट’ और ‘स्प्रिंट’ नामक मीडिया पोर्टलों के पत्रकारों ने यह पूछा है कि मोदी जी के राज में क्या विक्रम के पास एक अदद स्मार्टफोन भी नहीं? रेनडीटीवी के विज्ञान बीट को कवर करने वाले पत्रकार नल्ला बगुला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूछा कि उसे सीधा अम्बानी से बात करनी है कि जियो का सिग्नल इतना खराब क्यों है कि विक्रम का फोन नहीं लग रहा!

इसी पर किसी ट्विटर यूजर ने पत्रकार बगुला से कहा कि विक्रम आदमी नहीं, मशीन है इसलिए उसके पास जियो का सिम नहीं है। रेनडीटीवी के नल्ला बगुला ने काउंटर क्वेश्चन पूछा कि क्या चंद्रयान में कोई एस्ट्रॉनॉट नहीं था? जब जवाब आया कि ये पूरा मिशन ‘अन-मैन्ड’ था, तो पत्रकार ने, जिसकी कसमें धनय रॉय और धिनि दानराज खाते नहीं थकते, डाँटते हुए बवाल काटा और पूछा, “यहाँ धरती पर एक मोटर सायकिल अपने आप नहीं चल सकती और आप लोगों ने करोड़ों का चंद्रयान बिना किसी आदमी के ही भेज दिया?”

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वहाँ मौजूद ऑपइंडिया के तीखी मिर्ची बीट के पत्रकार आशीष नौटियाल ने बताया कि बाकी पत्रकारों ने आँखों ही आँखों में इशारा किया और बगुला को खूब कूटने के बाद, वहीं अपने समुदाय से बर्खास्त कर दिया।

आखिर क्यों नहीं संदेश भेज रहा है लैंडर?

यूँ तो चंद्रयान द्वितीय जो अपने कंधे पर लैंडर ले कर चाँद की कक्षा तक गया था, और कक्षा तक पहुँचने तक लैंडर को हेलमेट भी पहना कर रखा था, वो पूरी बात इसरो के ग्राउंड स्टेशन तक नहीं भेज रहा है, लेकिन इसरो के वैज्ञानिकों ने बताया कि विक्रम और चंद्रयान आपस में बात करते पाए गए हैं।

इसरो की टीम ने चंद्रयान में एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वाला उपकरण लगा रखा था जो कि चंद्रयान के मुख्य कम्प्यूटर को बिना बताए उसके द्वारा इकट्ठा की गई सारी जानकारी इसरो तक एक कूट भाषा में भेजता है। हालाँकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वाले उपकरण ने अपने इंटेलिजेंस का फायदा उठाया और संदेश ऐसी भाषा में भेजा जिसे तोड़ने में हमें तीन दिन लग गए। इसरो ने ऑपइंडिया से खास बातचीत करते हुए हमें पूरा संदेश भेजा।

क्या है पूरा मामला?

विक्रम से जब चंद्रयान ने पूछा कि सारे उपकरण सही होने के बाद भी वो बात क्यों नहीं करना चाहता? क्या वो हीलियम थ्री देख कर लालची हो गया है? इस पर विक्रम ने ‘भारत माता की जय’ बोल कर कसम खाते हुए कहा कि उसका एक-एक पुर्जा राष्ट्रहित में लगा हुआ है, और वो हीलियम थ्री जैसी चीजों का मोह नहीं रखता।

आगे बातचीत में खुलासा हुआ कि जब चंद्रयान ऑर्बिटर से विक्रम लैंडर अलग हो कर चाँद की तरफ तेजी से नीचे आ रहा था, तभी उसका हेलमेट रास्ते में गिर गया। हेलमेट में उसने इयरफोन लगा रखा था, जो कि नीचे गिर गया इससे उसे गिरते वक्त सही स्पीड का अंदाजा नहीं रहा और फिर लगभग दो किलोमीटर रहने पर उसकी गति धीमी नहीं हो पाई और वो धम्म से नीचे गिर गया।

इस पर चंद्रयान ने पूछा कि इसमें क्या समस्या है? विक्रम ने बताया कि हाल ही में उसने कुछ खबरें पढ़ी हैं जिसमें बाइक की कीमत से ज्यादा चालान काटा जा रहा है। इसी कारण उसे डर है कि संदेश भेजते ही ट्रैफिक पुलिस उसे ओवरस्पीडिंग, हेलमेट न पहनने, चलते वक्त पर बात करने और एक छोटे बच्चे (प्रज्ञान) को डिक्की में बिठाने के लिए चालान काट देगी।

चंद्रयान ने उसे समझाया कि नागपुर पुलिस ने कहा है कि वो सिग्नल तोड़ने का चालान नहीं काटेंगे। इसके साथ ही चंद्रयान ने उसे ट्वीट भी दिखाया पुलिस का। इस पर विक्रम का कहना था कि वो नागपुर के एरिया में नहीं आता, नेल्लोर पुलिस ने नागपुर वालों को ऐसा लिखने को कहा होगा। साथ ही उसने चंद्रयान को बताया कि पुलिस वालों की न तो दोस्ती अच्छी, न दुश्मनी!

इसरो टीम की समझ में नहीं आ रहा कि ये हो क्या रहा है!

वहीं, इसरो की टीम परेशान है कि आखिर विक्रम अपने आप को आदमी क्यों मान रहा है और ट्रैफिक पुलिस की बातें क्यों कर रहा है! एक युवा वैज्ञानिक ने कहा कि विक्रम के भीतर भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वाला उपकरण लगा हुआ है जो इस कारण लगाया गया था कि अगर कुछ खराबी आ जाए तो उसे वो स्वयं ठीक कर ले, लेकिन उसकी तैयारी के लिए उसे सड़कों पर चलने की जानकारी, खास कर गड्ढे वाले सड़कों की जानकारी दी गई थी, ताकि उसके पास ज्यादा से ज्यादा आँकड़े हों। उसने बताया कि शायद ऐसी खबरें ज्यादा पढ़ने के कारण वो खुद को ट्रैफिक तोड़ने वाला समझ बैठा है।

इस पर एक बुजुर्ग वैज्ञानिक ने युवा वैज्ञानिक को मुर्गा बना दिया और पूछा कि ये सब करने की क्या जरूरत थी? जहाँ बुजुर्ग वैज्ञानिक अपनी जगह सही हैं कि मशीन को उतना ही दिमाग देना चाहिए कि वो पूर्वनिर्धारित काम करता रहे, न कि अपना दिमाग लगा कर खुद को मोटरसायकिल चालक समझ बैठे, वहीं युवा वैज्ञानिक ने हमें बताया कि उसने आने वाली चुनौतियों के मद्देनजर ऐसे इंतजाम किए थे।

इस बात का राजनीतिकरण होना शुरु हो गया है

इस बात की खबर जब राहुल गाँधी जी को मिली तो उन्होंने वैज्ञानिकों से कहा कि अगर संभव हो सके तो विक्रम को बताया जाए कि उसकी ‘बात’ ट्रैफिक पुलिस से करवा दी जाएगी। उन्होंने कहा कि आपस में बातचीत से ट्रैफिक पुलिस और मोटरसायकिल वाले हर दिन सैकड़ों चालान निपटा लेते हैं। साथ ही, राष्ट्र की बात करते हुए श्री गाँधी ने कहा कि डिमोनेटाइजेशन के समय जो चार हजार रुपए उन्होंने एटीएम से निकाले थे, उनमें से दो हजार अभी भी उनके पास हैं।

आगे राहुल जी ने कहा कि अगर नेल्लोर पुलिस दो हजार में मान जाती है, तो राष्ट्रहित में वो अपने दो साल का खर्चा, दो हजार का नोट, चालान ‘निपटाने’ के लिए दे सकते हैं। राजनैतिक, सामाजिक और मजहबी मामलों की जानकार ज़ोया मंसूरी ने बताया कि राहुल गाँधी के इस मकसद के पीछे वाड्रा है जो चाँद पर मॉल बनाने के लिए दो हजार रुपए में दो हजार एकड़ जमीन हथियाना चाहता है।

मोदी जी यह सुनते ही गुस्सा हो गए कि कॉन्ग्रेस ये दो हजार दे कर सारा क्रेडिट खुद ले लेगी कि उन्होंने बात आगे बढ़ाई और विक्रम से संपर्क संभव हो पाया। फिलहाल इस विकट स्थिति में कॉन्ग्रेस को देश की बर्बादी के अलावा किसी भी तरह का क्रेडिट न देने की कसम खा चुके अमित शाह ने मोदी जी से कहा कि वो कुछ लोगों से संपर्क में हैं और जल्द ही चाँद से मिस्ड कॉल आएगा और विक्रम भी माननीय मोदी जी को ही वोट देगा। मोदी जी की समझ में नहीं आया कि विक्रम उन्हें वोट कैसे देगा लेकिन फिर उन्हें याद आया कि ‘मोदी है तो मुमकिन है’।

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