Saturday, April 4, 2020
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राबर्ट ठठेरा की ‘लाल डायरी’ लगी ऑपइंडिया तीखी मिर्ची सेल के हाथ, गंभीर खुलासे

जब हमने इस लाल डायरी की सत्यता प्रमाणित करने के लिए ‘सॉल्ट न्यूज़’ से सम्पर्क किया, तो उन्होंने डायरी से उठने वाली सौंधी-सौंधी महक से ही पहचान कर इसके ‘वायरल’ होने की आशंका के चलते इस का फैक्ट चेक किया।

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आशीष नौटियाल
पहाड़ी By Birth, PUN-डित By choice

अस्सी और नब्बे के दशक की बॉलीवुड की फिल्मों में एक ख़ास बात हुआ करती थी कि विलेन चाहे शक्ल से चांदनी चौक पर झालमुड़ी बेचने वाले जितना बेबस, लाचार और दीन-हीन ही क्यों न दिखता हो, लेकिन उस ‘डागर साब’ के पास एक लाल डायरी और अटैची जरुर हुआ करती थी। इस लाल डायरी के साथ अगर विलेन गंजा भी हो, तो ये घातक मिश्रण उसे सारी कायनात के साथ मिलकर सदी का सबसे खतरनाक विलेन साबित कर देने में जुट जाती थी।

ऐसी ही एक ‘लाल डायरी’ ऑपइंडिया तीखी मिर्ची सेल के हाथों लगी है, जिसके पन्नों की गहराई में जाने से ये संकेत मिलता है कि ये कोई आजादी के बाद से ही शाही शरण प्राप्त भूमिभक्षी दामाद रहा होगा। इस लाल डायरी में वर्णित सभी लेखों को पढ़ने के बाद आपके अंदर भी ऐसी तीव्र कामना जन्म ले बैठेगी, जो आपको भी राबर्ट ठठेरा के दिव्य दर्शन प्राप्त करने के लिए व्याकुल कर देगी।

इस डायरी में लिखे गए खुलासों से यह महसूस होता है कि विलक्षण प्रतिभा के धनी इस भूमिभक्षी राबर्ट ठठेरा की नज़र जहाँ पड़ती है, वह ज़मीन फ़ौरन उसके नाम हो जाती है। इस डायरी को पढ़कर आपके मुँह से बस एक ही शब्द निकलेगा, वो है ‘नमन’।

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जब हमने इस लाल डायरी की सत्यता प्रमाणित करने के लिए ‘सॉल्ट न्यूज़’ से सम्पर्क किया, तो उन्होंने डायरी से उठने वाली सौंधी-सौंधी महक से ही पहचान कर इसके ‘वायरल’ होने की आशंका के चलते इस का फैक्ट चेक किया। साथ ही उन्होंने ‘एक्सपोज़’ करते हुए ये भी बताया कि उनके नाम 2019 के लोकसभा चुनाव तक उभरता हुआ ‘इंटरनेट ट्रॉल’ बनने का आदेश जिस पत्र में आया था, उसमें भी इसी डायरी की सौंधी-सौंधी महक थी।

देखते हैं कि अपने सुख-दुःख को इस ‘भूमिभक्षी’ साहित्यकार किसान, यानि राबर्ट ठठेरा ने किस प्रकार से सुन्दर पंक्तियों में अपनी इस लाल डायरी में पिरोया है।

प्रियंका बनेगी महासचिव 2009

डायरी के पहले पन्ने  से खुलासा हुआ है कि किसी ‘प्रियंका’ नाम की महिला को यह लेखक महासचिव बनता देखना चाहता था। सॉल्ट न्यूज़ ने इस पन्ने की कार्बन डेटिंग निकालकर बताया कि इस पन्ने के ऊपर ही 20 अक्टूबर 2003 की तारीख लिखी गई थी, जिसका मतलब है कि ये लेख जरुर 20 अक्टूबर 2003 को ही लिखा गया होगा।

15 लोगों को पद्म श्री और 18 को साहित्य अकादमी पुरस्कार दिलाने की थी योजना

12 अप्रैल 2011 को लिखे गए इस पन्ने में किसान राबर्ट ठंठेरा ने ‘लगभग’ 15 लोगों को पद्म पुरस्कार और 18 लोगों को साहित्य अकादमी पुरस्कार का टेंडर पीएमओ को भेजने का जिक्र किया है। साथ ही इस टेंडर के पीछे कारणों  के बारे में लिखा गया है कि भविष्य में केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के कारण आने वाले कठिन दिनों में, थोक में बाँटे गए इन पुरुस्कारों द्वारा तैयार की गई ये ‘बुद्दिजीवी टुकड़ियाँ’ इन्हीं पुरस्कारों को लौटाकर भाजपा को लोकतंत्र की हत्या करने से रोकने के काम आएँगी।

लोकसभा चुनाव 2019 की बना रहा था प्लानिंग

लाल डायरी से होने वाले खुलासों में सबसे तगड़ा खुलासा 2019 के लोकसभा चुनावों को लेकर है। राबर्ट ठठेरा नाम के इस किसान लेखक ने इस पन्ने में अपने मन की बात लिखी है। 02 अक्टूबर 2018 को लिखे गए इस पन्ने में लेखक ने फ्लेक्स और बैनर मुरादबाद से लेकर गाजियाबाद तक के कार्यकर्ताओं को सौंपकर उन्हें 2019 के चुनाव से पहले वायरल करने का जिक्र किया है। इस में यह भी लिखा गया है कि वो 2019 में लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं।

चंद्रयान में भेजना चाहते हैं ‘अपना आदमी’ #लॉन्गटर्म_गोल्स

राबर्ट ठठेरा नाम के इस व्यक्ति के पत्रों में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू जैसी दूरदर्शी नजर देखने को मिली है। 15 दिसंबर 2017 के दिन इस डायरी में जिक्र किया गया है कि चंद्रयान-II के जरिए चन्द्रमा पर अपना आदमी भेजकर जमीन बुक करवाई जाएगी। समकालीन साहित्यकारों से प्रभावित होकर उन्होंने अपने लेख के अंत में कुछ हैशटैग भी लगाए हैं, जिनमे लिखा है कि ये उनके लॉन्ग टर्म गोल्स हैं। शायद यह किसान चाँद पर जमीन बुक कर के वहाँ भी ‘खेती’ करना चाहता था।

राहुल को ATM जाता देख फूट-फूटकर रोए थे राबर्ट ठठेरा #नोटबंदी

इस पन्ने पर लिखे गए इन अश्रुपूरित कालजयी शब्दों को देखकर पता चलता है कि यह किसी फासिस्ट सरकार द्वारा की गई नोटबंदी के दौरान लिखी गईं थी। राबर्ट ठठेरा का दुःख इसमें खुद को लेकर नहीं बल्कि राहुल गाँधी जी को उस लम्बी कतारों में लगते देखकर उमड़ा है, जिसके बारे में सक्रिय मीडिया गिरोह ने भी लिखा था। गुस्से में राबर्ट ठठेरा ने मंगल ग्रह पर जमीन खरीदने का भी निर्णय लिया है। जिस तरह से साबू को गुस्सा आने पर बृहस्पति ग्रह पर ज्वालामुखी फूटता था उसी तरह से राबर्ट ठठेरा को जब भी गुस्सा आता है, तो किसी ना किसी ग्रह पर जमीन इसके नाम हो जाती है। ऐसे आँकड़ें वास्तविक हैं या नहीं लेकिन 9 बजे के विशेष समय में टेलीविजन ना देखने की सिफारिश करने वाले एक मनचले पत्रकार का कहना है, “हें हें हें, ये सच है।”

राहुल गाँधी के विवाह की चिंता

लाल डायरी के लेखक राबर्ट ठठेरा की चिंता सिर्फ प्रियंका तक ही सीमित नहीं, बल्कि देश की सबसे बुजुर्ग पार्टी के चिरयुवा की शादी को लेकर भी थी। इस पन्ने की यदि तारीख देखी जाए, तो पता चलेगा की 22 मार्च 2001 के दिन भी राहुल गाँधी युवा थे और अब समय के साथ वे ‘चिर युवा’ हो चुके हैं। शायद वो NDTV पर नजर आने वाले पतंजलि के विज्ञापनों और उन के उत्पादों का भरपूर प्रयोग करते हैं, जो 48 की उम्र में भी उनके ‘चिर युवा’ विशेषण को बनाए रखने में सहायता कर रहा है। वरना अगर देखा जाए तो आम आदमी पार्टी अध्यक्ष और मौका देखते ही धरना देने की क्षमता रखने वाले सर अरविन्द केजरीवाल (50) और राहुल गाँधी (48) की उम्र में मात्र 2 वर्ष का ही तो अंतर है।

अमेरिका में बैठे देसी मूल के टेक एक्सपर्ट को भेजना था पैसा

शूजा नाम के किसी टेक एक्सपर्ट को EVM सम्बंधित कामों का ठेका देने के लिए पैसा देने की बात इस लाल डायरी में 03 जनवरी  2019 को लिखी गई है। इससे पता चलता है कि यह किसान राबर्ट ठठेरा सिर्फ भूमि में ही नहीं बल्कि देश में टेक्नोलॉजी के बढ़ावे के प्रति भी संवेदनशील था। इसका कहाँ है कि यदि यह विदेश में बैठकर लाइव प्रसारण कर दे तो वो खुद ही टेक एक्सपर्ट कहलाएगा।

वीरप्पन और चंदन के जंगल

चंदन तस्कर वीरप्पन की मौत पर राबर्ट ठठेरा ने ख़ुशी जताई है, लेकिन साथ ही ‘डेविल इमोजी’ बनाकर चन्दन के जंगलों के भविष्य को लेकर प्रश्नवाचक चिह्नों के ज़रिये अपने विचार भी जाहिर किए हैं।

BJP जॉइन कर होना चाहते हैं भगवा, आखिर क्यों?

मार्च 2019 में लिखे गए इस नोट में राबर्ट ठठेरा ने भाजपा जॉइन करने की इच्छा जताई है। इसके पीछे उनकी मोटिवेशन उनकी ‘पिंक कलर’ की पैंट नजर आ रही है। रंगीन मिजाज राबर्ट वाड्रा के पास इस तरह से ‘ऑफ पिंक’ और ‘लाईट भगवा’ का मिश्रण हो जाएगा और साथ ही उसको लगता है कि ऐसा करने से उसे रोजाना ED दफ्तर के चक्कर से छुटकारा मिल पाएगा और उन्हें सोशल मीडिया पर अपनी बूढ़ी मम्मी के साथ वाली तस्वीरें भी नहीं डालनी पड़ेंगी।

हवा पर अधिकार करने की महत्वकांक्षा के चलते 2G को समझने की प्रबल इच्छा

लग्नशील राबर्ट वाड्रा के संज्ञान में जब 2G पहली बार आया था तब उसने उसी दिन से इस पार आगे काम करने की इच्छा इस डायरी के पन्नों में जाहिर कर दी थी। जमीन घोटालों से शायद वो उसी दौरान ऊब चुके थे और ‘फॉर अ चेंज’ हवा पर कब्जा कर के अपने सपनों को नई ऊँचाई देना उनका सपना बन चुका था। राबर्ट ठठेरा को बचपन में ही उनकी आई ने सीख दी थी कि कोई भी धंधा बड़ा या छोटा नहीं होता।

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