Tuesday, April 7, 2020
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2018 में बॉक्स ऑफ़िस पर देखने को मिली घोर असहिष्णुता, तीनों ख़ान पस्त

शाहरुख़ कहते हैं कि जब भी उन्हें भारत में अपने स्टारडम का घमंड होता है वो एक बार अमेरिका हो आते हैं। दरअसल जब भी शाहरुख़ अमेरिका जाते हैं तो वहाँ के सुरक्षाबलों द्वारा एअरपोर्ट पर उनके कपड़े उतारने की ख़बर आती है।

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अनुपम कुमार सिंहhttp://anupamkrsin.wordpress.com
चम्पारण से. हमेशा राइट. भारतीय इतिहास, राजनीति और संस्कृति की समझ. बीआईटी मेसरा से कंप्यूटर साइंस में स्नातक.

भारतीय सिनेमा के इतिहास में पिछले बारह सालों में ऐसा पहली बार हुआ है जब बॉक्स ऑफ़िस कलेक्शन के मामले में चोटी की फ़िल्मों में तीनों ख़ान यानि कि शाहरुख़ ख़ान, सलमान ख़ान और आमिर ख़ान की फ़िल्मों को कोई स्थान नहीं मिला है। बता दें कि पिछले एक दशक से भी ज्यादा से बॉक्स ऑफिस के मामले में टॉप पर ख़ान त्रिमूर्ति की ही कोई न कोई फ़िल्म होती थी लेकिन 2018 में ये गणित बदल गया है। आइये जानते हैं कि इस साल तीनो खान में से किसका प्रदर्शन सबसे ख़राब रहा और वो कौन से स्टार्स हैं जो सबसे टॉप पर रहे।

इस साल सबसे पहले आई सलमान खान की रेस 3 जो कि उनकी कई ब्लॉकबस्टर फ़िल्मों की तरह ईद पर रिलीज़ की गयी। अच्छी ओपनिंग लेने और त्यौहार के मौके पर रिलीज़ होने के बावजूद ये फिल्म बॉक्स ऑफ़िस पर धड़ाम से गिरी। और हाँ, यहाँ पर रेस 3 की IMDB रेटिंग की बात करना ज़रूरी है क्योंकि IMDB रेटिंग को फ़िल्मों के मामले में विश्व में सबसे ज़्यादा भरोसेमंद माना जाता है। जनता की समझदारी का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने रेस 3 को हिमेश रेशमिया की फिल्म आप का सुरूर से भी कम रेटिंग दी। रेस 3 की रेटिंग 2.1 है वहीं 2007 में आई आप का सुरूर की रेटिंग 2.3 है। वो तो अच्छा हुआ कि नसीरुद्दीन शाह की नींद उस वक्त नहीं खुली नहीं तो उन्होंने जनता पर अल्पसंख्यक समुदाय के सबसे बड़े त्यौहार के मौके पर एक अल्पसंख्यक को प्रताड़ित करने का आरोप मढ़ डाला होता।

वैसे संसद हमले का दोषी आतंकी याकूब के फाँसी के बाद गुस्साए सलमान ने इस बार अपना गुस्सा काफी नियंत्रण में रखा और ऐसा कोई भी बयान नहीं दिया जिस से कोई विवाद हो। याकूब मेनन वाले बयान के बाद उनके पिता सलीम खान ने सार्वजनिक तौर पर माफ़ी मांगी थी जिसके बाद सलमान ने डैमेज कण्ट्रोल ट्वीट भी किये थे लेकिन लोगों का मानना है कि सलीम ख़ान ने फ़िल्म के फ्लॉप होने के बाद उन्हें पहले ही चुप रहने की नसीहत दे दी थी।

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अब बात करते हैं आमिर ख़ान की ठग्स ऑफ हिंदुस्तान की। इस फ़िल्म के लिए काफी हाइप बनाया गया। मार्केटिंग गुरु आमिर ख़ान ने इसके लिए गूगल मैप का सहारा जहाँ पर उनके द्वारा इस फ़िल्म में निभाए गए करैक्टर का चित्र दिखता था। बता दें कि आमिर ने इस फ़िल्म में एक ठग का किरदार निभाया था। वो तो भला हो कि लोग पहले दिन बाद ही समझ गए कि आखिर गूगल मैप में वो चित्र किसलिए था। असल में लोगों को ये पता चल गया कि गूगल मैप उनसे ये कहना चाहता है कि उस तरफ मत जाओ वरना ठग लिए जाओगे।

मानो गूगल मैप कह रहा हो- “उस तरफ मत जाओ, ख़तरा है।”

खैर, पहले दिन रिकॉर्डतोड़ कमाई के बाद फ़िल्म बॉक्स ऑफ़िस पर औंधे मुह गिरी। वीएफएक्स से सजी हाई बजट वाली इस फ़िल्म को डिज़ास्टर की श्रेणी में रखा गया। डिस्ट्रीब्यूटर से लेकर प्रोडूसर तक को लगे घाटे का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सिनेमाघरों ने दूसरे सप्ताह से ही इस फ़िल्म को निकाल बाहर करना शुरू कर दिया। वो तो भला हो कि इसे लेकर आमिर खान की पत्नी किरण राव का जमीर इस वक्त नहीं जागा नहीं तो वो दूसरे दिन ही देश छोड़ कर जाने की बात कर देती। वैसे इस पर विचार करना जरूरी है कि आमिर अगर देश छोड़ कर जायेंगे भी तो कहाँ। हाँ, एक देश ऐसा है जिसने बॉक्स ऑफ़िस पर उन्हें काफी सफलता दी है। वो देश है चीन।

तो आमिर ख़ान ने खुद देश छोड़ने की बजाय अपनी फ़िल्म को ही देश छुड़ा दिया। भारत में हुए भारी घाटे की भारपाई के लिए ठग्स ऑफ हिंदुस्तान चीन गयी। आमिर को लगा कि शायद चीन वाले भारतीयों की तरह असहिष्णु नहीं होते हैं और वो उनके घाटे की भारपाई कर दें। भारतीय भी मन ही मन खुश हुए कि आजतक चीन अपने नकली प्रोडक्ट भारत में बेचता रहा है, चलो कोई तो आया जो चीन को बेवकूफ़ बनाने जा रहा है। लेकिन आमिर खान ने सपने में भी नहीं सोंचा होगा कि चीनी भारतीयों से भी ज्यादा असहिष्णु निकलेंगे। वहाँ फ़िल्म अपने लाइफ़टाइम में 50 करोड़ रुपए के दर्शन भी नहीं कर पाई। खैर इसके बाद से किरण राव का कोई भी बयान नहीं आया है क्योंकि जिस देश में उनके बसने की उम्मीद रही होगी उसने ही धोखा दे दिया। इस मामले में नसीरुद्दीन शाह ने अब तक चीनियों के खिलाफ कोई बयान नहीं दिया है।

अब अंत में बात करते हैं किंग ख़ान की। जी हाँ, वही शाहरुख़ ख़ान जिन्होंने अपना 50वाँ जन्मदिन राजदीप सरदेसाई के वीडियो और असहिष्णुता के बयान के साथ मनाया था। ज़ीरो फ़िल्म को लेकर तगड़ा प्रमोशन किया गया। शाहरुख़ कहते हैं कि जब भी उन्हें भारत में अपने स्टारडम का घमंड होता है वो एक बार अमेरिका हो आते हैं। दरअसल जब भी शाहरुख़ अमेरिका जाते हैं तो वहाँ के सुरक्षाबलों द्वारा एअरपोर्ट पर उनके कपड़े उतारने की ख़बर आती है। ख़ैर, 200 करोड़ के बजट वाली ज़ीरो की शूटिंग के लिए भी शाहरुख़ अमेरिका गए। नासा में भी शूटिंग की।

देशवासी अभी भी ये सोचते हैं कि आखिर शाहरुख़ जैसा सुपरस्टार अमेरिका के सिक्यूरिटी गार्ड्स से उस तरह बात क्यों नहीं कर पाता जैसा कि उन्होंने आईपीएल के दौरान वानखेड़े स्टेडियम के गार्ड के साथ किया था। कुछ भी हो, तनी हुई उँगली उठा कर शाहरुख़ ख़ान ने जब वानखेड़े के उस गार्ड को झिड़का था तभी लोगों ने समझ लिया था कि शाहरुख़ अमेरिका वाला गुस्सा यहाँ उतार रहे हैं। वैसे अब तक शाहरुख द्वारा अमेरिकन सिक्यूरिटी गार्ड्स को ऐसे झिड़कने की कोई खबर नहीं आई है जैसा कि उन्होंने मुंबई में उस गार्ड को झिड़का था जबकि उस गरीब ने तो उनके कपड़े भी नहीं उतारे थे।

वानखेड़े में सिक्यूरिटी गार्ड और शाहरुख की नोकझोंक

जब सारे दाव फ़ेल हो गए तब शाहरुख़ ने अनुष्का शर्मा से मदद माँगी। शायद विराट का स्टारडम फ़िल्म को बचा ले जाये। शाहरुख़ मार्केटिंग के एक्सपर्ट माने जाते हैं और इसी क्रम में उन्होंने शायद अनुष्का को उनके पति यानि विराट के ट्विटर हैंडल से ट्वीट करने की सलाह दी। लेकिन हाय रे असहिष्णु जनता, उसने न शाहरुख़ की सुनी न अनुष्का की, सुनी तो बस फ़िल्म के कंटेंट की और जिस फ़िल्म के कलेक्शन में 3 के साथ दो ज़ीरो लगने की उम्मीद थी उसमें एक के साथ दो ज़ीरो भी आफ़त हो गयी।

वैसे अगर हम सिर्फ़ फ़्लॉप फ़िल्मों की ही बात करते रहे तो शायद इस से उन फ़िल्मों के साथ नाइंसाफी होगी जो असल में अच्छी थी और कम बजट और बड़े स्टार्स के न होने के बावजूद कंटेंट के आधार पर खूब चली। इस क्रम में आई फ़िल्म अन्धाधुन। आयुष्मान खुराना अभिनीत इस फिल्म में दर्शकों को दृश्यम के बड़े दिनों बाद बॉलीवुड में किसी अच्छे सस्पेंस थ्रिलर के दर्शन हुए। फ़िल्म IMDB पर 2018 की टॉप रेटेड फ़िल्म है और इसे दर्शकों ने भी खूब प्यार दिया। आयुष्मान की बधाई हो लीक से हटकर फ़िल्म थी लेकिन अच्छे कंटेंट की वजह से खूब चली। राजकुमार राव भी इस वर्ष पूरे फ़ॉर्म में दिखे और हॉरर-कॉमेडी स्त्री से दर्शकों का ख़ासा मनोरंजन किया। स्त्री में पंकज त्रिपाठी के किरदार की भी जम कर सराहना हुई।

अगर इस लिस्ट में हम तुमबाड का जिक्र न करें तो ये अधूरी रह जाएगी। फ़िल्म को दर्शकों का काफी प्यार मिला और कम सिनेमाघरों में रिलीज होने के बावजूद लम्बी चली। जॉन अब्राहम की परमाणु ने वाजपेयी के प्रधानमंत्रीत्व के दौरान हुए परमाणु परीक्षण की कहानी को दिखाया जिस की खूब सराहना हुई। अक्षय कुमार की गोल्ड ने आजाद भारत के पहले हॉकी मेडल की कहानी दिखाई और फ़िल्म ने सौ करोड़ की कमाई की। आलिया भट्ट की राज़ी भी खूब चली और महिला प्रधान फ़िल्मों के लिए एक ट्रेंड सेट किया।

अब अंत में बात कर लेते हैं उन स्टार्स की जिनकी फ़िल्में सबसे ज्यादा चली। कमर्शियल तौर पर रजनीकांत-अक्षय कुमार की हाई बजट फ़िल्म 2.0 इस साल सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फ़िल्म बनी। दूसरे स्थान पर रही संजू जिसमें रणबीर कपूर ने संजय दत्त के किरदार को जीवंत किया। उसके बाद पद्मावत का स्थान आता है। विवादों में रहीपद्मावत से रणवीर सिंह ने 2018 की शुरुआत की और सिम्बा से उन्होंने साल का अंत किया। दोनों ही फ़िल्में रिकॉर्डतोड़ रहीं।

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