बालाकोट एयर स्ट्राइक का सबूत मिटा, 32 दिन बाद पाकिस्तान ने मीडिया को दिखाया आतंकी कैंप

सच जानने गए पत्रकारों को यहाँ भी निराशा ही हाथ लगी। बालाकोट के कुछ इलाके अभी भी पाकिस्तानी अर्द्धसैनिक बलों ने घेर रखे हैं। वहाँ पर किसी को जाने की इजाजत नहीं है।

पाकिस्तान के बालाकोट पर भारतीय वायु सेना द्वारा किए गए एयर स्ट्राइक के तकरीबन एक महीने बाद पाकिस्तान ने उस जगह पर मीडिया को जाने की इजाजत दी, जहाँं पर एयर स्ट्राइक किया गया था। बता दें कि 14 फरवरी, 2019 को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सेना के काफिले पर हुए हमले का भारतीय वायु सेना ने जिस तरह से जवाब दिया था, उससे आज भी पाकिस्तान डरा हुआ है। लेकिन सार्वजनिक तौर पर वो आज तक इसलिए नहीं बोल पा रहा क्योंकि उसे लगता है कि इससे उसकी बदनामी होगी।

सीआरपीएफ के काफिले पर हुए हमले के ठीक 12 दिन बाद 26 फरवरी को भारतीय वायुसेना ने बालाकोट में जैश के ठिकानों एयर स्ट्राइक किया था, जिसमें 300 से ज्यादा आतंकियों के मारे जाने का दावा किया गया। मगर पाकिस्तान इसे नकारता रहा। पाकिस्तान ने विदेशी मीडिया को भी उस जगह जाने की इजाजत नहीं दी, जिस जगह पर भारतीय वायु सेना ने एयर स्ट्राइक किया था। अब एयरस्ट्राइक के 32 दिन बार पाकिस्तानी सेना, पत्रकारों के एक ग्रुप को घटनास्थल पर लेकर गई।

हालाँकि सच जानने गए पत्रकारों को यहाँ भी निराशा ही हाथ लगी। बालाकोट के कुछ इलाके अभी भी पाकिस्तानी अर्द्धसैनिक बलों ने घेर रखे हैं। वहाँ पर किसी को जाने की इजाजत नहीं है। रक्षा मंत्रालय से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक, पाकिस्तान ने इन 32 दिनों में बालाकोट का हुलिया बदलकर दुनिया को ऐसा दिखाने को कोशिश की है, जैसे कि ये कोई आम मदरसा है। 28 मार्च को आठ मीडिया टीम के सदस्यों को बालाकोट कैंप के अंदर ले जाने से पहले 300 के करीब बच्चों को कैंप में बैठा दिया गया था और सभी बच्चों को पहले ही ये समझा दिया गया था कि उन्हें मीडिया के सामने क्या बोलना है।

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इससे पहले मीडिया एजेंसी रॉयटर्स की टीम ने 28 फरवरी से लेकर 8 मार्च के बीच तीन बार बालाकोट में जाने की कोशिश की, लेकिन पाक सेना ने कभी खराब मौसम की बात कहकर तो कभी सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए तीनों ही बार उन्हें मना कर दिया।

जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान ने बालाकोट में हुए एयर स्ट्राइक के बाद से पाकिस्तानी सेना की फ्रंटियर कोर को तैनात कर दिया था। इसके बाद गुपचुप तरीके से आतंकियों के शवों को हटाया गया, तबाह हुए कैंप को सही किया गया और फिर मीडिया टीम को बालाकोट कैंप के अंदर ले जाया गया।


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