Sunday, August 1, 2021
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14वीं सदी का प्राचीन शिव मंदिर जो जलमग्न हो गया था दशकों पहले, आया बाहर: पूजा के लिए भक्तों का ताँता

"हमारे पूर्वज हमें बताते थे कि दमगुडा में एक मंदिर था, जिसे राजाओं ने बनवाया था। मंदिर का पानी से बाहर आना इस बात की ओर संकेत है कि इस क्षेत्र के निवासियों के लिए अच्छा समय आ गया है।"

ओडिशा के मलकानगिरि जिले के दमगुडा गाँव में 60 साल तक पानी में डूबे रहने के बाद प्राचीन शिव मंदिर पानी के बाहर आ गया है। करीब 14वीं सदी के दौरान बना यह मंदिर स्वाभिमान अंचल के चित्रकोंडा क्षेत्र में आता है। मंदिर का निर्माण शैव सम्प्रदाय के दौरान किया गया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सन 1961 में बालीमेला बाँध परियोजना का निर्माण कार्य चल रहा था, जिसके कारण यह मंदिर जलमग्न हो गया था। करीब 6 दशक बीतने के बाद जलाशय का जलस्तर घटने से यह फिर से ऊपर आ गया है। यहाँ पर प्राचीन शिव मंदिर के अलावा भी हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों को खोजा गया है।

प्राचीन मंदिर के बारे में इतिहासकार देबाशीष पात्रा ने बताया कि इसका निर्माण 14वीं सदी के अंत में मट्टमयूर संप्रदाय के दौरान किया गया था। बाँध के अधिकारियों ने इस रिजर्वायर को खाली करवाया है, जिससे यह मंदिर दोबारा से सामने आ गया है।

जिस वक्त मंदिर का निर्माण किया गया था, उस दौरान राज्य में शैव सम्प्रदाय की लहर चल रही थी। उस दौरान प्रदेश में भगवान शिव के कई मंदिरों का निर्माण कराया गया था। इस प्राचीन शिव मंदिर को लेकर इतिहासकारों में मतभेद है। कुछ इतिहासकार मानते हैं कि जयपोर मलिक मर्दन सिंह देव ने अपने राज्य की सीमाओं का विस्तार करने के लिए इस मंदिर का निर्माण करवाया था।

राज्य की दूसरी सबसे बड़ी संरचना

इस प्राचीन शिव मंदिर को राज्य की दूसरी सबसे विशाल संरचना माना जा रहा है। कुछ इतिहासकारों का यह भी मानना है कि उदादी क्षेत्र में मंदिर का निर्माण नंदापुर के शासकों ने 15वीं सदी में करवाया था। कथित तौर पर श्री चैतन्य ने भी साल 1510 में चित्रकोंडा का दौरा किया था।

मंदिर के बारे में जानकारी देते हुए एक ग्रामीण जगन्नाथ हंटल ने बताया, “छह दशकों से अधिक समय तक पानी के भीतर रहने के बाद भगवान गणेश और ‘पक्षीराज गरुड़’ की पाँच फीट की मूर्ति के साथ मंदिर सामने आ गया है। इससे इस क्षेत्र का प्राचीन इतिहास सामने आ गया है। हमारे पूर्वज हमें बताते थे कि दमगुडा में एक मंदिर था, जिसे राजाओं ने बनवाया था। मंदिर का पानी से बाहर आना इस बात की ओर संकेत है कि इस क्षेत्र के निवासियों के लिए अच्छा समय आ गया है।”

वहीं चित्रकोंडा के तहसीलदार टी पद्मनाव डोरा ने मंदिर को लेकर कहा कि वो इसके बारे में संस्कृति विभाग से संपर्क कर मंदिर और मूर्तियों को बचाने का आग्रह करेंगे। इस बीच मंदिर में पूजा के लिए भक्तों का ताँता लगने लगा है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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