Wednesday, September 22, 2021
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एक मंदिर जिसे कहते हैं तांत्रिकों की यूनिवर्सिटी, इसके जैसा ही है लुटियंस का बनाया संसद भवन: मुरैना का चौसठ योगिनी मंदिर

चौसठ योगिनी मंदिर, भारत के कुछ गिने-चुने गोलाकार मंदिरों में से एक है। यहाँ 64 कक्षों का निर्माण है। प्रत्येक कक्ष में एक योगिनी और एक शिवलिंग है।

मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में स्थित है, चौसठ योगिनी मंदिर। भारत की तांत्रिक यूनिवर्सिटी कहे जाने वाले इस गोलाकार मंदिर से ही प्रेरित होकर भारत की संसद का निर्माण हुआ था। आज से 700 वर्षों पहले निर्मित इस मंदिर में सूर्य के गोचर के आधार पर ज्योतिष और गणित में शिक्षा प्रदान की जाती थी। कहा जाता है कि आज भी मंदिर में रात को कोई नहीं रुक सकता, न तो मानव और न ही पशु-पक्षी।

इतिहास

मुरैना के पडावली के पास मितावली गाँव में स्थित चौसठ योगिनी मंदिर को एकट्टसो महादेव मंदिर भी कहा जाता है। मंदिर और उसके आसपास के शिलालेखों के अनुसार इसका निर्माण सन् 1323 में गुर्जर राजा देवपाल द्वारा कराया गया था। ऐसा कहा जाता है कि मंदिर सूर्य के गोचर के आधार पर ज्योतिष और गणित में शिक्षा प्रदान करने का स्थान था। इसके अलावा यह तंत्र साधना का एक महत्वपूर्ण स्थान भी था। देश के कोने-कोने से साधक अपनी तंत्र साधना के लिए यहाँ पहुँचते थे। यही कारण है कि इस मंदिर को भारत की तांत्रिक यूनिवर्सिटी कहा जाता है।

चौसठ योगिनी मंदिर, भारत के कुछ गिने-चुने गोलाकार मंदिरों में से एक है। यहाँ 64 कक्षों का निर्माण है। प्रत्येक कक्ष में एक योगिनी और एक शिवलिंग है। सभी चौसठ योगिनियाँ माता काली का अवतार मानी जाती हैं। इन चौसठ योगिनियों में 10 महाविद्याओं और सिद्ध विद्याओं की गिनती भी की जाती है। मंदिर परिसर के मध्य में एक मंडप स्थापित है जहाँ मुख्य शिवलिंग विराजमान है।

स्थानीय निवासी आज भी मानते हैं कि यह मंदिर अभी भी शिव की तंत्र साधना के कवच ढका हुआ है। यहाँ स्थित सभी योगिनियाँ तंत्र और योग विद्या से सम्बंधित हैं, ऐसे में यहाँ आज भी योगिनियों को जागृत किया जाता है। इस मंदिर की महिमा कुछ ऐसी थी यहाँ विदेशों से भी तंत्र शक्ति प्राप्त करने के लिए जिज्ञासु प्रवृत्ति के लोग आया करते थे। इस मंदिर में आज भी रात में रुकने की मनाही है। इंसान तो क्या पशु और पक्षी भी रात में यहाँ दिखाई नहीं देते हैं।

मंदिर से प्रेरित था संसद भवन

वैसे तो यह बात आधिकारिक तौर पर कहीं भी दर्ज नहीं है कि इसी मंदिर से प्रेरित होकर अंग्रेज वास्तुकार एडविन के लुटियंस ने 1921-27 के दौरान भारतीय संसद का निर्माण करवाया। ऐसा इसलिए क्योंकि जिन अंग्रेजों का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा को नष्ट करना था वो कभी भी यह स्वीकार कर ही नहीं सकते थे कि भारत की सबसे महत्वपूर्ण इमारत का निर्माण एक हिन्दू मंदिर से प्रेरित है। लेकिन आज भी यदि कोई से भी देखेगा तो उसे यह समझते देर नहीं लगेगी कि संसद का निर्माण इसी मंदिर की डिजाइन को ध्यान में रखकर हुआ।

चौसठ योगिनी मंदिर 101 स्तम्भों पर टिका हुआ है वहीं भारतीय संसद 144 स्तम्भों पर। दोनों ही गोलाकार आकृति के हैं। मंदिर में 64 कक्ष हैं जबकि संसद भवन में 340 कक्ष। दोनों में सबसे बड़ी विशेषता यह है कि जिस प्रकार चौसठ योगिनी मंदिर के केंद्र में एक विशाल मंडप है जहाँ भगवन शिव का शिवलिंग स्वरुप विराजमान है, उसी प्रकार संसद भवन के केंद्र में भी एक बड़ा सा हॉल निर्मित है।

कैसे पहुँचे?

मंदिर से निकटतम हवाईअड्डा ग्वालियर में स्थित है जो यहाँ से लगभग 28 किमी की दूरी पर है। इसके अलावा झाँसी हवाईअड्डे से मंदिर की दूरी लगभग है। चौसठ योगिनी मंदिर का नजदीकी रेलवे स्टेशन गोहद है जो यहाँ से 18 किमी दूर है। सड़क मार्ग के द्वारा इस मंदिर तक पहुँचा जा सकता है। ग्वालियर और मुरैना की मितावली से दूरी क्रमशः 40 किमी और 25 किमी है।

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ओम द्विवेदी
Writer. Part time poet and photographer.

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