Monday, June 17, 2024
Homeविविध विषयधर्म और संस्कृतिदियरा घाट: पहली बार जहाँ मनी थी दीपावली, भगवान श्री राम ने किया था...

दियरा घाट: पहली बार जहाँ मनी थी दीपावली, भगवान श्री राम ने किया था दीपदान; शामिल हुए थे अयोध्या के लोग भी

'आदि गंगा' कही जाने वाली गोमती नदी के तट पर दियरा घाट स्थित है, जहाँ पर अयोध्या से पहले दीपावली मनाई गई थी। दियरा घाट पर भगवान राम ने दीपदान किया था, तभी से मन रही दीपावली।

दिवाली पर अयोध्या में दीये जलाने का एक नहीं कई विश्व रिकॉर्ड बन रहे, हर साल टूट कर फिर नए रिकॉर्ड गढ़े जा रहे। दीपावली पर अयोध्या का महत्व हर हिंदू के लिए अप्रतीम है। भगवान श्रीराम के साथ इसकी जो कड़ियाँ जुड़ी हैं, वो हम सब को एक साथ जोड़ती है। आज बात लेकिन उस जगह की, जहाँ दिवाली सबसे पहली बार मनी थी, जहाँ भगवान श्री राम ने किया था दीपदान की शुरुआत। दियरा घाट (Diyara Ghat) है वो ऐतिहासिक जगह, अयोध्या से नजदीक ही है!

जहाँ से दीपदान की शुरुआत मानी जाती है, वह दियरा घाट अयोध्या से सटे सुलतानपुर जिले में है। सुलतानपुर का प्राचीन नाम कुशभवनपर था। इसे भगवान राम के सुपुत्र कुश ने बसाया था, इसलिए इसका नाम कुशभवनपुर पड़ा। जिला मुख्यालय से लगभग तीस किलोमीटर दूर ‘आदि गंगा’ कही जाने वाली गोमती नदी के तट पर दियरा घाट स्थित है, जहाँ पर अयोध्या से पहले दीपावली या दिवाली मनाई गई थी।

मान्यताओं के अनुसार रावण और लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद यहाँ पहुँचे भगवान श्रीराम ने ही पहला दीपदान किया था। लंका से श्रीराम, लक्ष्मण, सीता की सकुशल वापसी की खुशी में यहाँ हुए दीपदान में स्थानीय निवासियों के अलावा अयोध्या से अपने भगवान राम की अगवानी करने आए अयोध्यावासी भी दीपदान में शरीक हुए थे। अगल-बगल के ग्रामीण इस बात को लेकर आज भी बड़े गौरवांवित महसूस करते हैं कि दीप पर्व की शुरुआत उनके यहाँ से मानी जाती है।

हरिशयनी में प्रभु ने किया था विश्राम

दीपदान से पहले भगवान श्रीराम ने धोपाप में स्नान किया था। उसके बाद दियरा में दीपदान किया। प्रभु श्रीराम ने इसके बाद हरिशयनी गाँव में विश्राम किया था। मान्यता है कि हरि (श्रीराम) के शयन से ही इस गाँव का नाम पड़ा। इस सबका जिक्र यहाँ के जिला गजेटियर में भी किया गया है। आज भी हरिशयनी गाँव के लोग भगवान राम के मेजबान के तौर पर खुद को किस्मत का धनी समझते हैं।

योगी सरकार आने के बाद बदली सूरत, उम्मीद थोड़ी और की!

दियरा घाट दीपावली की शुरुआत का एक ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल है। इस घाट के विकास से दीपावली पर्व की भव्यता और लोकप्रियता में और भी वृद्धि होगी। सरकार को इस घाट के विकास के लिए पहल करनी चाहिए।

अयोध्या में दीपावली पर दीपदान के आयोजनों को लेकर सुर्खियाँ बटोरती सरकार पर सुलतानपुर के दियरा घाट की उपेक्षा के आरोप स्थानीय लगाते हैं। हालाँकि योगी सरकार आने के बाद से दियरा के दिन बहुरे तो हैं, लेकिन बहुत सारे काम किए जाने बाकी हैं। आपको बता दें कि दियरा में घाट तक पक्की सड़क बनाई गई है।

दियरा घाट पर आज क्या होता है?

आज भी दियरा घाट पर दीपावली की पूर्व संध्या पर दीपदान का आयोजन किया जाता है। हालाँकि, यह आयोजन बहुत ही साधारण होता है। स्थानीय लोग यहाँ पर इकट्ठा होकर दीपदान करते हैं और भगवान श्री राम की पूजा करते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार को इस स्थल के विकास के लिए पहल करनी चाहिए ताकि यह स्थल पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन सके। लोगों का कहना है कि इस स्थल पर एक भव्य मंदिर का निर्माण किया जाना चाहिए। साथ ही यहाँ एक दीपदान स्थल भी बनाया जाना चाहिए, इससे दीपावली पर्व को और भी भव्य तरीके से मनाया जा सकेगा।

Special coverage by OpIndia on Ram Mandir in Ayodhya

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

श्रवण शुक्ल
श्रवण शुक्ल
Shravan Kumar Shukla (ePatrakaar) is a multimedia journalist with a strong affinity for digital media. With active involvement in journalism since 2010, Shravan Kumar Shukla has worked across various mediums including agencies, news channels, and print publications. Additionally, he also possesses knowledge of social media, which further enhances his ability to navigate the digital landscape. Ground reporting holds a special place in his heart, making it a preferred mode of work.

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

ऋषिकेश AIIMS में भर्ती अपनी माँ से मिलने पहुँचे CM योगी आदित्यनाथ, रुद्रप्रयाग हादसे के पीड़ितों को भी नहीं भूले

उत्तराखंड के ऋषिकेश से करीब 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यमकेश्वर प्रखंड का पंचूर गाँव में ही योगी आदित्यनाथ का जन्म हुआ था।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -