Monday, April 6, 2020
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महाशिवरात्रि पर आदि देव भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंग और उनकी महिमा: एक नजर

सनातन धर्म में मान्यता है कि जो मनुष्य प्रतिदिन प्रात:काल और संध्या के समय इन बारह ज्योतिर्लिंगों का नाम लेता है, उसके सात जन्मों का किया हुआ पाप इन द्वादश ज्योतिर्लिंगों के स्मरण मात्र से मिट जाता है।

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यूँ तो देश भर में लाखों शिव मंदिर और शिव धाम हैं, लेकिन शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों का सबसे खास महत्व है।

“सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।
उज्जयिन्यां महाकालमोंकारंममलेश्वरम्॥
परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशंकरम्।
सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने॥
वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे।
हिमालये तु केदारं घुश्मेशं च शिवालये॥
एतानि ज्योतिर्लिंगानि सायं प्रातः पठेन्नरः।
सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति॥
एतेशां दर्शनादेव पातकं नैव तिष्ठति।”

हिन्दू धर्म में पुराणों के अनुसार शिवजी जहाँ-जहाँ स्वयं प्रकट हुए, उन बारह स्थानों पर स्थित शिवलिंगों को ज्योतिर्लिंगों के रूप में पूजा जाता है। ये संख्या में 12 हैं। सौराष्ट्र प्रदेश (काठियावाड़) में श्री सोमनाथ, श्री शैल पर श्री मल्लिकार्जुन, उज्जयिनी (उज्जैन) में श्री महाकाल, ॐकारेश्वर अथवा ममलेश्वर, परली में वैद्यनाथ, डाकिनी नामक स्थान में श्री भीमशंकर, सेतुबंध पर श्री रामेश्वर, दारुकावन में श्री नागेश्वर, वाराणसी (काशी) में श्री विश्वनाथ, गौतमी (गोदावरी) के तट पर श्री त्र्यम्बकेश्वर, हिमालय पर केदारखंड में श्री केदारनाथ और शिवालय में श्री घृष्णेश्वर।

सनातन धर्म में मान्यता है कि जो मनुष्य प्रतिदिन प्रात:काल और संध्या के समय इन बारह ज्योतिर्लिंगों का नाम लेता है, उसके सात जन्मों का किया हुआ पाप इन द्वादश ज्योतिर्लिंगों के स्मरण मात्र से मिट जाता है।

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शिव महापुराण के द्वादश्ज्योतिर्लिन्ग्स्तोत्रं में उल्लेखित बारह ज्योतिर्लिंगों में से कुछ की भौगोलिक स्थितियों के बारे में भक्तों के मत अलग-अलग हैं। कारण यह है कि स्तोत्र (श्लोक) में इन ज्योतिर्लिंगों की भौगोलिक स्थिति अस्पष्ट है, जिस कारण लोग अपने अपने तरीके से व्याख्या करते हैं।

1- गंगा घाट: श्री विश्वनाथ जी

जब बात काशी की है तो शुरुआत गंगा घाट से ही होनी चाहिए। वाराणसी (उत्तर प्रदेश) स्थित काशी के श्री विश्वनाथजी सबसे प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में एक हैं। गंगा तट स्थित काशी विश्वनाथ शिवलिंग दर्शन हिंदुओं के लिए सबसे पवित्र है।

गंगा घाट

वाराणसी में श्री गंगा आरती का दृश्य –

काशी विश्वनाथ मंदिर –

2 – श्री त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग, नासिक 

श्री त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र प्रांत के नासिक जिले में पंचवटी से 18 मील की दूरी पर ब्रह्मगिरि के निकट गोदावरी के किनारे है। इस स्थान पर पवित्र गोदावरी नदी का उद्गम भी है।

3 – श्रीघुश्मेश्वर (गिरीश्नेश्वर) ज्योतिर्लिंग

ज्योतिर्लिंग को घुसृणेश्वर या घृष्णेश्वर भी कहते हैं। इनका स्थान महाराष्ट्र प्रांत में दौलताबाद स्टेशन से बारह मील दूर बेरूल गाँव के पास है।

4 – औंढा नागनाथ ज्योतिर्लिंग, महाराष्ट्र

स्थान निर्धारण में सबसे ज्यादा विवादित दो ज्योतिर्लिंग हैं, एक है नागेश्वरज्योतिर्लिंग, जिसके बारे में कुछ लोगों का मत है कि यह गुजरात स्थित द्वारका के समीप है। वहीं, अन्य लोगों का मत है यह ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र के औंढा नमक गाँव में स्थित श्री नागनाथ मंदिर में है।

श्रीनागेश्वर ज्योतिर्लिंग, गुजरात 

5 – श्री वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग

ठीक इसी प्रकार श्री वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के बारे में भी मतभेद है, कुछ लोगों का मानना है की यह ज्योतिर्लिंग झारखंड राज्य में देवघर कसबे में स्थित है, वहीं अन्य लोग मानते हैं की यह ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के बीड जिले में स्थित परली वैजनाथ स्थान पर स्थित है।

6 – श्री भीमशंकर ज्योतिर्लिंग

श्री भीमशंकर का स्थान मुंबई से पूर्व और पूना से उत्तर भीमा नदी के किनारे सह्याद्रि पर्वत पर है। यह स्थान नासिक से लगभग 120 मील दूर है

7 – श्रीमल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग

आन्ध्र प्रदेश प्रांत के कृष्णा जिले में कृष्णा नदी के तटपर श्री शैल पर्वत पर श्री मल्लिकार्जुन विराजमान हैं। इसे दक्षिण का कैलाश कहते हैं।

8 – श्री रामेश्वर ज्योतिर्लिंग

श्री रामेश्वर तीर्थ तमिलनाडु प्रांत के रामनाड जिले में है। यहाँ लंका विजय के पश्चात भगवान श्रीराम ने अपने अराध्यदेव शंकर की पूजा की थी। ज्योतिर्लिंग को श्रीरामेश्वर या श्रीरामलिंगेश्वर के नाम से जाना जाता है।

9 – श्री ॐकारेश्वर ज्योतिर्लिंग

मालवा क्षेत्र में श्री ॐकारेश्वर स्थान नर्मदा नदी के बीच स्थित द्वीप पर है। उज्जैन से खण्डवा जाने वाली रेलवे लाइन पर मोरटक्का नामक स्टेशन है, वहां से यह स्थान 10 मील दूर है। यहाँ ॐकारेश्वर और मामलेश्वर दो पृथक-पृथक लिंग हैं, परन्तु ये एक ही लिंग के दो स्वरूप हैं। श्री ॐकारेश्वर लिंग को स्वयंभू समझा जाता है।

श्री मामलेश्वर ज्योतिर्लिंग

10 – श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग  

श्री महाकालेश्वर (मध्यप्रदेश) के मालवा क्षेत्र में क्षिप्रा नदी के तटपर पवित्र उज्जैन नगर में विराजमान है। उज्जैन को प्राचीनकाल में अवंतिकापुरी कहते थे।

11 – श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग

श्री सोमनाथ सौराष्ट्र, (गुजरात) के प्रभास क्षेत्र में विराजमान है।

12 – श्री केदारनाथ ज्योतिर्लिंग

श्री केदारनाथ हिमालय के केदार नामक श्रृंगपर स्थित हैं। शिखर के पूर्व की ओर अलकनन्दा के तट पर श्री बदरीनाथ अवस्थित हैं और पश्चिम में मन्दाकिनी के किनारे श्री केदारनाथ हैं

नोट- इस फोटो फीचर को मनीष श्रीवास्तव ने प्रस्तुत किया है।

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