Homeविविध विषयचित्रकूट में सजा औरंगजेब का शुरू किया गधों का मेला: सलमान-दीपिका छाए रहे, शाहरुख...

चित्रकूट में सजा औरंगजेब का शुरू किया गधों का मेला: सलमान-दीपिका छाए रहे, शाहरुख खान सस्ते में निपटे

दिवाली के त्योहार के दौरान शुरू होकर पाँच दिनों तक लगने वाले इस मेले की शुरुआत मुगल आक्रांता औरगंजेब ने की थी। औरंगजेब को जब उसके सैन्य बलों में घोड़ों की कमी महसूस होने लगी तो उसने गधों का मेला लगवाकर अफगानिस्तान से अच्छी नस्ल के गधों को मँगवाया।

बचपन में और अब भी आपने कई मेले देखे होंगे, जहाँ आप जाकर झूलों का आनंद लेते हैं। वहाँ आपको तरह-तरह की चीजें देखने को मिलती हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में एक ऐसा भी मेला लगता है, जहाँ गधों की खरीद-बिक्री होती है। यहाँ कई राज्यों से लोग अपने-अपने गधों के बेचने के लिए लाते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इस मेले की शुरुआत मुगल आक्रांता औरंगजेब ने की थी।

दिवाली के त्योहार के दौरान शुरू होकर पाँच दिनों तक लगने वाला यह मेला धार्मिक नगरी चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के किनारे लगता है। इस मेले में बॉलीवुड एक्टर सलमान खान, शाहरुख खान, ऋतिक रौशन, कैटरीना कैफ और दीपिका पादुकोण के नाम वाले गधे भी बेचने के लिए लाए गए हैं। हर साल लगने वाले इस मेले में इस बार करीब 15,000 गधे लाए गए हैं। इस बार भी उम्मीद है कि गधों का यह व्यापार करीब 2 करोड़ रुपए तक हो सकता है।

इस मेले में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार आदि राज्यों के लोग शामिल होने के लिए आते हैं। यहाँ लाने जाने वालों की कीमत अलग-अलग होती है, जो उनके नस्ल और कद-काठी पर निर्भर करती है। इस मेले में सलमान खान नाम का गधा डेढ़ लाख रुपए में बिका, जबकि दीपिका नाम की गधी सवा लाख रुपये में बिकी। वहीं, शाहरुख खान नाम का गधा केवल 70,000 रुपये में बिका। इन सब के अलावा, ऋतिक रोशन 30 हजार और रणबीर कपूर 50 हजार रुपए में ही निपट गए।

औरगंजेब की शुरू की गई परंपरा आज भी चल रही

इस मेले की शुरुआत मुगल आक्रांता औरगंजेब ने की थी। औरंगजेब को जब उसके सैन्य बलों में घोड़ों की कमी महसूस होने लगी तो उसने गधों का मेला लगवाकर अफगानिस्तान से अच्छी नस्ल के गधों को मँगवाया। इनकी खरीदारी करने के बाद उन्हें सेना में शामिल किया गया था।

हालाँकि, अब ये मेला अपना अस्तित्व खोता नजर आ रहा है। दरअसल, मेले में सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं होता है। अगर गधे न बिकें तो भी ठेकेदार व्यापारियों से वसूली करने लगता है। प्रशासनिक बदइंतजामी भी इस मेले के गिरते क्रेज का बड़े कारणों में से एक है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

जयललिता से तृषा कृष्णन तक: कैसे तमिलनाडु की राजनीति में बार-बार निशाने पर आईं महिलाएँ

जयललिता से तृषा कृष्णन तक मामला बताता है कि तमिलनाडु की राजनीति में महिलाओं को कैसे निशाना बनाया जाता है। एक विधानसभा के अंदर का तो दूसरा राजनीतिक मंच का।

इजरायल को 99% हथियार देने वाले पश्चिमी देशों को छोड़ भारत के खिलाफ प्रोपेगैंडा फैला रहा एमनेस्टी, समझिए गाजा की आड़ में किस खेल...

भारत डिफेंस एक्सपोर्ट में तेजी से उभरता खिलाड़ी है। भारत की प्राथमिकता अपने साथ अपने मित्र देशों को सुरक्षा उपकरण मुहैया कराना है।
- विज्ञापन -