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राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित फ़िल्म के निर्देशक समेत 7 लोगों पर जातिवादी गालियों के इस्तेमाल पर मामला दर्ज

66वें वार्षिक राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कारों में इसे 'सर्वश्रेष्ठ फीचर फ़िल्म' घोषित किया गया। यह फ़िल्म 1975 में गुजरात के कच्छ के रण गाँव के सुदूर गाँव में बनाई गई थी।

रिलीज के चार दिनों के भीतर, एक संवाद में जातिवादी गालियों का उपयोग करने के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता गुजराती फ़िल्म ‘हेलारो’ (Hellaro) के निर्देशक सहित सात लोगों के ख़िलाफ़ शिक़ायत दर्ज की गई है। फ़िल्म के निर्देशक, निर्माता, पटकथा लेखक और संपादक के ख़िलाफ़ अहमदाबाद में शिक़ायत दर्ज की गई है।

अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (AMC) की पार्षद जमनाबेन वेग्डा ने एक मुख्य चरित्र का उल्लेख करने के लिए एक जातिवादी गाली का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। ख़बर के मुताबिक़, फ़िल्म के एक डायलॉग में वेग्डा ने आपत्ति जताई थी, जिसमें एक ढोल वादक मूलजी से सरपंच ने पूछा था कि वह किस जाति का है। AMC पार्षद ने कहा है कि मूलजी का जवाब जातिवादी गाली था, जिससे उनकी भावनाएँ आहत हुईं।

पुलिस में दर्ज कराई गई शिक़ायत में फ़िल्म हेलारों के निर्देशक अभिषेक शाह, निर्माता आशीष सी पटेल, नीरव सी पटेल, आयुष पटेल, मीट जानी के साथ-साथ संवाद लेखक सौम्या जोशी और संपादक प्रतीक गुप्ता के ख़िलाफ़ सरकार द्वारा कथित रूप से ‘समुदाय का अपमान करने और भावनाओं को आहत करने’ से प्रतिबंधित ‘शब्द’ का उपयोग करने के ख़िलाफ़ कार्रवाई किए जाने की माँग की गई है।

अहमदाबाद के कागदपीठ के पुलिस निरीक्षक यू डी जडेजा ने बताया कि शिक़ायत दर्ज कर ली गई है और आगे की जाँच के लिए एससी/ एसटी सेल को भेज दी गई है।

बता दें कि ‘हेलारो’ पहली गुजराती फ़िल्म है जिसे राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। 66वें वार्षिक राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कारों में इसे ‘सर्वश्रेष्ठ फीचर फ़िल्म’ घोषित किया गया। यह फ़िल्म 1975 में गुजरात के कच्छ के रण गाँव के सुदूर गाँव में बनाई गई थी। इस फ़िल्म में गुजरात के नृत्य, गरबा को फ़िल्माया गया है। इस फ़िल्म की कहानी ग्रामीण गुजरात की पितृसत्ता पर आधारित है। साथ ही कुरीतियों के ख़िलाफ़ खड़े महिलाओं के एक समूह को भी दिखाया गया है। यह फ़िल्म 8 नवंबर को रिलीज़ हुई थी, जिसका ट्रेलर आप यहाँ देख सकते हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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