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सबको नहीं हो वोट देने का अधिकार: ‘अर्जुन रेड्डी’ फेम विजय बोले, मैं तानशाह बनना चाहूँगा

"मैं तानाशाह बनना चाहूँगा। मुझे यहीं एक रास्ता ठीक लगता है, जिसके जरिए आप बदलाव कर सकते हैं। जैसे, बस चुप रहो, मेरा इरादा अच्छा है, तुम्हें पता नहीं है कि तुम्हारे लिए क्या अच्छा है, लेकिन शायद इस पर टिके रहो और 5-10 साल लाइन में लगे रहो, तुम्हें इसका फल मिलेगा।"

ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘अर्जुन रेड्डी’ से प्रसिद्ध तेलुगु अभिनेता विजय देवरकोंडा ने एक मनोरंजन पोर्टल को दिए इंटरव्यू में राजनीति और चुनावों को लेकर कुछ विवादित टिप्पणी की है। उन्होंने वर्तमान सिस्टम के प्रति असंतोष जताते हुए तानाशाही की वकालत की है।

भविष्य में राजनीति में कदम रखने से जुड़े सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “मेरे पास इसके लिए धैर्य नहीं है। राजनीतिक प्रणाली समझ के बाहर है। जैसा कि हम चुनावों के बारे में जानते हैं, इससे इसका कोई मतलब नहीं है। मुझे नहीं लगता कि सभी को मतदान करने की अनुमति दी जानी चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा, “जब आप एक विमान पर चढ़ते हैं और बॉम्बे के लिए उड़ान भरते हैं, तो क्या हम सभी यह तय करेंगे कि विमान कौन उड़ाएगा? नहीं, हमने एयरलाइंस जैसी कुशल एजेंसी को यह तय करने दिया कि सबसे सक्षम कौन है, जो विमान को उड़ाने के लिए सबसे अच्छे व्यक्ति का चुनाव करेगा।”

चुनावी प्रणाली पर अपनी असहमति को लेकर आगे बोलते हुए विजय देवरकोंडा ने कहा, “क्यों हम पैसे से वोट खरीद रहे हैं? क्यों हम सस्ती शराब देकर वोट खरीद रहे हैं? यह एक मूर्खता है। मैं यह भी नहीं कह रहा हूँ कि अमीर लोगों को वोट देना चाहिए। मुझे लगता है कि मध्यम वर्ग के पास सबसे ज्यादा हिस्सेदारी है, जो लोग पढ़े-लिखे हैं, वे लोग जो थोड़े से पैसे से नहीं बिकेंगे, मुझे लगता है कि वे… “

उन्होंने इस बात को कंफर्म किया कि उन्हें नहीं लगता है कि सभी को मतदान का अधिकार होना चाहिए। अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि वह उन चुनावों में नहीं खड़े होंगे जहाँ लोग पैसे या शराब के लिए वोट करते हैं। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा, “मैं तानाशाह बनना चाहूँगा। मुझे यहीं एक रास्ता ठीक लगता है, जिसके जरिए आप बदलाव कर सकते हैं। जैसे, बस चुप रहो, मेरा इरादा अच्छा है, तुम्हें पता नहीं है कि तुम्हारे लिए क्या अच्छा है, लेकिन शायद इस पर टिके रहो और 5-10 साल लाइन में लगे रहो, तुम्हें इसका फल मिलेगा।”

विजय देवरकोंडा ने कहा,”मुझे लगता है कि कहीं न कहीं तानाशाही सही है लेकिन आपको एक अच्छे आदमी की जरूरत है।” इसके अलावा उन्होंने अपने दिमाग में कुछ “कट्टरपंथी” विचार होने की बात भी स्वीकार की है। विजय के अभिनय वाली ‘अर्जुन रेड्डी’ पर ही हिंदी फिल्म कबीर सिंह बनी है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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