Friday, June 14, 2024
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सुशांत जैसे ख्याल मुझे भी आए थे… सुसाइड करना चाहते थे विवेक ओबेरॉय: बताया- माँ की गोद में सिर रख 40 मिनट तक रोया था

विवेक ओबेरॉय ने हाल में खुलासा किया है कि उन्हें भी सुशांत सिंह राजपूत की तरह गलत ख्याल आने लगे थे। लेकिन उनके पास उनका परिवार था जिनके पास जब उन्होंने अपना दर्द साझा किया, तो सबने उसे समझा और उनका साथ दिया।

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद बॉलीवुड अभिनेता विवेक ओबेरॉय उन 20 लोगों में से थे जो सुशांत के अंतिम संस्कार में शामिल होने गए थे। आज जब उनकी इंडियन पुलिस फोर्स सीरीज से स्क्रीन पर वापसी हो गई है और उनके परफॉरमेंस से उनके फैंस खुश हैं। इस बीच उन्होंने खुलासा किया है कि सुशांत के अंतिम संस्कार वाले दिन उनके दिमाग में क्या चल रहा था।

उन्होंने बताया, “सुशांत के अंतिम संस्कार में सिर्फ 20 लोगों को ही आने की इजाजत थी और मैं उन लोगों में से एक था। वहाँ मैंने उनके पिता की आँखें देखी। मैं सुशांत को देखकर सिर्फ यही सोच रहा था कि दोस्त, अगर तुम देख पाते कि तुम्हारे जाने से क्या हुआ है, तुमसे प्यार करने वाले लोगों का क्या हाल है, तो तुम कभी ये कदम नहीं उठाते।”

उन्होंने कहा, “सोचो तुम अपना जीवन खत्म करके उन लोगों के लिए क्या कर रहे हो जो तुम्हें वाकई प्यार करते हैं। तुम उन्हें दर्द नहीं देना चाहते तो जाओ प्यार और रौशनी की तरफ जाओ। तुम उनके पास जाओगे, टूटोगे तो सब बाहर आ जाएगा”

विवेक ने कहा, “मैं भाग्यशाली था कि मुझपर घर था, परिवार था, जिन्होंने मुझे ऐसे मौकों पर संभाला। मैं जमीन पर बैठ गया था और अपनी माँ की गोद में सिर रख दिया था। बच्चों की तरह रोते हुए मैंने उनसे पूछा था कि मेरे साथ ऐसे क्यों हुआ। करीबन 40 मिनट तक मेरे रोने के बाद उन्होंने मुझे कहा कि जब तुम अवार्ड जीत रहे थे, सारी प्रसिद्धि मिली तब तुमने ऐसा पूछा था क्या कि ये सब तुम्हें ही क्यों मिल रहा है।”

विवेक ने ये भी जानकारी दी कि उनके मन में सुशांत जैसे ख्याल आने लगे थे। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि अंधकार में जाकर मेरे दिमाग में वो ख्याल नहीं आए जो सुशांत के दिमाग में आए थे।

बता दें कि साल 2003 में सलमान खान से हुए झगड़े के बाद विवेक ओबरॉय को फिल्में मिलना कम हो गई थी। बॉलीवुड के एक पूरे सेक्शन ने उनका बॉयकॉट कर दिया था, जिसके बाद वो डिप्रेशन में आ गए थे। उन्होंने मिर्ची प्लस को दिए गए इंटरव्यू में बताया था कि वह उस समय अच्छी फिल्में कर रहे थे जो बॉक्स ऑफिस पर सफल हो रही थी, उन्हें अवॉर्ड्स भी मिल रहे थे, लेकिन उन्हें कोई अच्छा काम नहीं मिल रहा था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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