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2000 साल पुराने मंदिर के परिसर को उलूग खान ने किया था खंडित, खुदाई में मिले लैंप और मूर्तियाँ

भगवान रंगनाथ को विष्णु का ही अवतार माना जाता है। यह मंदिर वैसे तो तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली के श्रीरंगम में कावेरी नदी के तट पर स्थित है। लेकिन यहाँ की खासियत है कि यहाँ पर 1000 साल पुरानी ममी भी संरक्षित है।

दक्षिण-पूर्वी भारत के तमिलनाडु में कावेरी और कोल्लिडम नदी के संगम यानी श्रीरंगम आइलैंड पर 2000 साल पुराने रंगनाथ स्वामी मंदिर का परिसर स्थित है। जिसका प्रमुख भाग आज भी उपयोग में हैं। मगर इसके कई पुराने भाग मिट्टी के अंदर दफन हो चुके हैं। जिसका कारण सिर्फ़ वहाँ सदियों से आने वाली बाढ़ नहीं है। बल्कि एक मुस्लिम शासक का भाई भी है, जिसने इस परिसर को एक समय तबाह किया था।

14 वीं सदी में मुस्लिम शासक अलाउदद्दिन खिलजी के भाई अलमस बेग उर्फ उलूग खान ने इस मंदिर के परिसर पर अपना कहर बरपाया था। मगर, अफसोस इस तथ्य के बारे में किसी को भी बहुत कम पता चल पाया। इंटरनेट पर भी देखें तो इसके बारे में कम जानकारी मिलती है। लेकिन, अभी पिछले साल भूवैज्ञानिकों द्वारा यहाँ बाढ़ तलछट परतों के ज्ञान (Knowledge of flood sediment layers ) के साथ निर्देशित साइट पर हुई खुदाई के दौरान उलूग खान का नाम चर्चा में आया। इसके अलावा इस खुदाई से ये भी पता चला कि आखिर उस समय मंदिर के परिसर से क्या-क्या गायब हुआ था।

पेरियार विश्वविद्यालय के भूविज्ञानी रामकुमार सहित अन्य शोधकर्ताओं ने उलूग खान द्वारा नष्ट किए गए मंदिर के कुछ हिस्सों को उजागर किया और साथ ही कुछ लटकन लैंपों और देवता गोपालकृष्णन और उनकी पत्नी की मूर्तियों का पता लगाया।

भूभौतिकीय सर्वेक्षण तकनीकों का उपयोग करते हुए, वैज्ञानिकों ने यह भी पहचान की कि वे धार्मिक विद्वान और शिक्षक श्री मनावाला मामुनिगल की समाधि को क्या मानते हैं। जिन्होंने 14 शताब्दी में उलूग खान द्वारा खंडित मंदिर परिसर को पंद्रहवीं शताब्दी में फिर से बहाल किया।

रंगनाथ मंदिर की खासियत

गौरतलब है कि रंगनाथ स्वामी मंदिर सृष्टि के पालनहार नारायण भगवान के विष्णु के स्वरूप रंगनाथ भगवान का है। भगवान रंगनाथ को विष्णु का ही अवतार माना जाता है। यह मंदिर वैसे तो तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली के श्रीरंगम में कावेरी नदी के तट पर स्थित है। लेकिन यहाँ की खासियत है कि यहाँ पर 1000 साल पुरानी ममी भी संरक्षित है। यहाँ के भव्यता और विष्णु भगवान के रंगनाथ रूप के दर्शन के लिए भारत से ही नहीं, बल्कि विश्वभर से लाखों की संख्या से सैलानी आते हैं और यहाँ की खूबसूरती देख मंत्रमुग्ध रह जाते हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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