Homeविविध विषयअन्यबॉम्बे हाईकोर्ट ने NGO पर विकास कार्य रोकने की मंशा के कारण लगाया ₹1...

बॉम्बे हाईकोर्ट ने NGO पर विकास कार्य रोकने की मंशा के कारण लगाया ₹1 लाख का जुर्माना

निगम ने मुख्य न्यायमूर्ति नंदराजोग और न्यायमूर्ति भारती डांगरे की पीठ को बताया कि संबंधित क्षेत्र न तो आर्द्र ज़मीन है और न ही वहाँ कोई तालाब है। वह एक निजी ज़मीन थी जिसे राज्य प्रशासन ने निर्माण कार्य के लिए क़ानूनी रूप से ख़रीदी।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार (16 सितंबर) को एक ग़ैर-सरकारी संगठन (NGO) की निरर्थक याचिका को ख़ारिज करते हुए एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। जुर्माने राशि को दो सप्ताह के भीतर हाईकोर्ट विधि सहायता सेवा में जमा करने का निर्देश दिया है।

ख़बर के अनुसार, NGO ‘अभिव्यक्ति’ का मुख्य कार्यालय रायगढ़ ज़िले में है। NGO ने पिछले साल अपने वकील सुभाष झा के मार्फत जनहित याचिका दायर की थी और यह दावा किया था कि नवी मुंबई का नियोजन निकाय शहर एवं औद्योगिक विकास निगम (CIDCO) आर्द्र भूमि में निर्माण का मलबा डाल रहा है। इस जनहित याचिका में आरोप लगाया गया था कि खारघर के सेक्टर-18 और 19 में छ: हेक्टेयर के एक क्षेत्र में निर्माण मलबे और कूड़ा डाला जा रहा है, जहाँ तालाब और आर्द्रभूमि है।

इस पर निगम ने मुख्य न्यायमूर्ति नंदराजोग और न्यायमूर्ति भारती डांगरे की पीठ को बताया कि संबंधित क्षेत्र न तो आर्द्र ज़मीन है और न ही वहाँ कोई तालाब है। वह एक निजी ज़मीन थी जिसे राज्य प्रशासन ने निर्माण कार्य के लिए क़ानूनी रूप से ख़रीदी। वहाँ जो पानी है वह भारी बारिश के दौरान गड्ढों में एकत्रित पानी है।

इस पर पीठ ने कहा कि NGO ने शुरू में दावा किया था कि संबंधित क्षेत्र संरक्षित आर्द्रभूमि है और फिर उसने बताया कि यह प्राकृतिक जलाशय है। आख़िरकार उसने पीठ से कहा कि वह वर्षा जल से बना तालाब है। हालाँकि, सरकारी दस्तावेज़ो से साबित होता है कि वह इनमें से कुछ भी नहीं है। कोर्ट ने कहा, “हम मानते हैं कि जनहित याचिका निरर्थक है और हम जुर्माना लगाते हुए उसे ख़ारिज करते हैं।”

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -