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15 साल बाद, पहली बार पूरी तरह डिजिटल… 1 अप्रैल से शुरू हुई दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना, जातियों की भी होगी सटीक गिनती: पूरी प्रक्रिया के बारे में जानिए

डिजिटल जनगणना 2027 दो-चरणों में होगी। इसके तहत पहले आवासों की सूची तैयार की जाएगी और बाद में जनसंख्या के आँकड़े जुटाए जाएँगे। इस पूरी कवायद को ₹11,718 करोड़ के बजट, GPS मैपिंग, बहुभाषी ऐप्स और 31 लाख प्रशिक्षण व्यक्तियों द्वारा पूरा किया जाएगा।

जनगणना 2027 देश की 16वीं और स्वतंत्रता के बाद की 8वीं जनगणना है। 1 अप्रैल 2026 से शुरू हुई ये जनगणना पूरी तरह डिजिटल है। पंद्रह वर्षों के अंतराल के बाद जनगणना करवाई जा रही है, जो देश की पहली पूरी तरह से डिजिटल जनगणना है। इतना ही नहीं, ये दुनिया की पहली इतनी बड़ी डिजिटल जनगणना भी है।

भारत में जनगणना सिर्फ सांख्यिकीय डेटा इकट्ठा करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह देश की सामाजिक-आर्थिक योजना का एक मजबूत स्तंभ भी है। भारत में व्यवस्थित जनगणना की शुरुआत 1872 में ब्रिटिश काल के दौरान हुई थी। हर दस साल में जनगणना कराने की परंपरा 1881 से लगातार चली आ रही है। इस क्रम में आखिरी जनगणना 2011 में हुई।

यह देश की 15वीं जनगणना थी, जिसने उस समय के डेटा के अनुसार भारत की जनसंख्या और भौगोलिक स्थिति की एक साफ तस्वीर पेश की।

भारत में जनगणना, जनगणना अधिनियम 1948 और 1990 के प्रावधानों के मुताबिक की जाती है। हालाँकि इसमें समय-समय पर संशोधन किए गए हैं। नियमों के अनुसार, 16वीं जनगणना वर्ष 2021 में होनी चाहिए थी। लेकिन, 2020 में दुनिया भर में फैले कोविड-19 महामारी और इसके कारण लगाए गए देशव्यापी लॉकडाउन की वजह से इस प्रक्रिया को अनिश्चित काल के लिए टालना पड़ा। स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह पहली बार था जब दस साल के अंतराल पर होने वाली जनगणना में देरी हुई।

जनगणना 2027 में पेपर वर्क के बजाय सारी जानकारी मोबाइल ऐप और ‘सेल्फ़ एन्यूमरेशन’ यानी स्वगणना पोर्टल के जरिए इकट्ठा की जाएगी। यह आधुनिक भारत के डिजिटल बदलाव को दर्शाता है। केंद्र सरकार ने हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना (HLO) के लिए 33 सवालों की एक सूची जारी की है और पोर्टल पर 33 FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल) भी उपलब्ध कराए हैं।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 16वीं जनगणना के लिए कुल ₹11,718.24 करोड़ के बजट को मंजूरी दी है। इस राशि का उपयोग मुख्य रूप से जनगणना कार्य से जुड़े कर्मचारियों के मानदेय और उनके गहन प्रशिक्षण के लिए किया जाएगा। इसके अलावा चूँकि इस बार जनगणना पहली बार डिजिटल माध्यम से हो रही है, इसलिए बजट में एक मजबूत IT इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने, डेटा सेंटर बनाने और आवश्यक लॉजिस्टिक्स सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए भी पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं।

जनगणना की तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं

यह सुनिश्चित करने के लिए कि जनगणना 2027 पूरी तरह से त्रुटिरहित हो, नवंबर 2025 में पूरे देश के 5000 ब्लॉकों में एक पूर्ण ‘प्री-टेस्ट’ (रिहर्सल) आयोजित किया गया था, जिसमें नियुक्ति से लेकर डेटा प्रोसेसिंग तक की सभी डिजिटल प्रक्रियाओं का परीक्षण किया गया। इस गणना में सटीकता सुनिश्चित करने के लिए, देश के सभी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों के 7092 जिलों, तालुकों और करीब 6.39 लाख गाँवों की प्रशासनिक सीमाओं को 1 जनवरी 2026 से मार्च 2027 तक के लिए ‘सख्त’ कर दिया गया है, ताकि गणना के दौरान कोई भी भौगोलिक बदलाव बाधा न बने।

इस राष्ट्रीय अभियान के लिए एक सुदृढ़ त्रि-स्तरीय प्रशिक्षण ढाँचा तैयार किया गया है, जिसमें 100 राष्ट्रीय प्रशिक्षक और 2000 मास्टर प्रशिक्षक हैं, जिन्होंने 45000 फील्ड प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित किया। ये फील्ड प्रशिक्षक पूरे देश में लगभग 31 लाख गणना करने वालों और पर्यवेक्षकों को 80 हजार बैच में बाँट कर प्रशिक्षण दिया। इन प्रशिक्षुओं को सभी प्रशिक्षण सामग्री उनकी क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराई गई, ताकि वे बिना किसी परेशानी के समय पर लोगों से सही जानकारी ले सकें। आपको बता दें कि इस बार जनगणना 2 चरणों में आयोजित की जा रही है।

पहला चरण 1 अप्रैल से शुरू

भारत की 16वीं जनगणना का पहला चरण आधिकारिक तौर पर 1 अप्रैल, 2026 से शुरू हो गया है। यह 30 सितंबर 2026 तक जारी रहेगा। भारत के रजिस्ट्रार जनरल (RGI) मृत्युंजय कुमार नारायण के अनुसार, क्षेत्रीय कार्य (फील्ड ऑपरेशन) विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा निर्धारित अलग-अलग कार्यक्रमानुसार संपन्न किया जाएगा। देश के कुछ हिस्सों में यह कार्य अप्रैल में शुरू हो गई है। अन्य हिस्सों में भौगोलिक और प्रशासनिक सुविधा के अनुसार, यह प्रक्रिया जून, जुलाई या अगस्त में पूरी की जाएगी।

जनगणना का पहला चरण यानी ‘हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना’ (HLO) को अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच पूरा किया जाएगा। हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपनी सुविधा के अनुसार, इन छह महीनों में से कोई भी 30 दिन निर्धारित करके पूरा करेगा। इस चरण की खासियत है कि गणना करने वाले व्यक्ति के आपके घर आने से ठीक 15 दिन पहले ‘स्व-गणना’ (self-enumeration) का एक विकल्प दिया जाएगा। इसके जरिए आप ऑनलाइन माध्यम से खुद ही अपनी जानकारी भर सकेंगे।

पहले चरण का मकसद आपके घरों की स्थिति और परिवारों की जीवनशैली के बारे में जानना है। इसमें मुख्य रूप से यह जानकारी इकट्ठा की जाएगी कि घर किस तरह का है, परिवार को पीने का पानी, बिजली और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध हैं या नहीं। घर में टीवी, गाड़ी या इंटरनेट जैसी सुविधा मौजूद है या नहीं। इस प्रक्रिया के लिए पूछे जाने वाले सवालों की एक सूची भी कुछ दिन पहले जारी कर दी गई थी।

जनगणना देश के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग चरणों में शुरू होगा। पहले समूह में अंडमान और निकोबार, दिल्ली (NDMC और छावनी), गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा और सिक्किम शामिल हैं। इन राज्यों के नागरिक 1 अप्रैल से 15 अप्रैल, 2026 तक ऑनलाइन ‘स्व-गणना’ कर सकेंगे, जबकि 16 अप्रैल से 15 मई तक गणना करने वाले घर-घर जाकर घरों की जानकारी दर्ज करेंगे।

दूसरे समूह में मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़ और हरियाणा जैसे राज्य शामिल हैं। इन राज्यों में स्व-गणना के लिए 16 अप्रैल से 30 अप्रैल, 2026 तक का समय तय किया गया है, जिसके बाद 1 मई से 30 मई तक घरों की सूची बनाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। बाकी सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का विस्तृत कार्यक्रम सरकार द्वारा जारी किए गए परिशिष्ट में दिया गया है।

यह प्रक्रिया कैसे पूरी होगी?

जनगणना 2027 भारत की पहली पूरी तरह से डिजिटल जनगणना होगी। इस प्रक्रिया में गणना करने वाले लोग पेन और पेपर के बजाय अपने स्मार्टफोन और एक खास मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करेंगे। वे घर-घर जाकर जो जानकारी इकट्ठा करेंगे, उसे सीधे ऐप के जरिए ऑनलाइन जमा करेंगे। इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए मोबाइल ऐप और ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ पोर्टल कुल 19 भाषाओं में उपलब्ध कराए जाएँगे। इनमें गुजराती, हिंदी और अंग्रेजी भी शामिल हैं, ताकि बिना किसी रुकावट के सटीक जानकारी इकट्ठा की जा सके।

इस बार नागरिकों के लिए ‘स्वयं-गणना’ (self-enumeration) की सुविधा एक महत्वपूर्ण पहलू है। लोग ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर स्वयं ही अपने परिवारों का विवरण भर सकेंगे। इसके अलावा, इस पूरे अभियान के प्रबंधन के लिए एक अत्याधुनिक केंद्रीय पोर्टल भी बनाया गया है।

यह पोर्टल गणना करने वालों की नियुक्ति, उनके ID कार्ड बनाने, उन्हें काम सौंपने और उनके प्रशिक्षण के प्रबंधन का काम संभालेगा। यह डिजिटल सिस्टम इस बात की भी रियल-टाइम निगरानी करने में मदद करेगा कि गणना का काम किस हद तक पूरा हो चुका है।

प्रशासनिक स्तर पर सटीकता लाने के लिए इस बार ‘वेब मैपिंग एप्लिकेशन’ का इस्तेमाल करके ‘हाउस लिस्टिंग ब्लॉक’ (HLBs) तैयार किए जाएँगे, ताकि जनगणना में कोई भी घर या इलाका छूट न जाए। एक डिजिटल माध्यम होने के नाते, लोगों की निजी जानकारी की सुरक्षा को लेकर भी पूरी सावधानी बरती गई है। डेटा सुरक्षा के लिए बेहद मजबूत प्रोटोकॉल लागू किए गए हैं। इसका मकसद नागरिकों का डेटा पूरी तरह से सुरक्षित और गोपनीय रखना है।

सेल्फ-एन्यूमरेशन (स्वयं-गणना) कैसे किया जा सकता है?

जनगणना 2027 में, नागरिकों को एक विशेष सुविधा दी गई है, जिसके ज़रिए वे गणना करने वाले के उनके घर आने से पहले ही अपनी जानकारी ऑनलाइन भर सकेंगे। इसके लिए उन्हें अपने मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करके आधिकारिक SE पोर्टल (se.census.gov.in) पर लॉग इन करना होगा। यह प्रक्रिया अपनी सुविधा के अनुसार, कभी भी और कहीं से भी पूरी की जा सकती है।

पोर्टल पर लॉग इन करने के बाद, व्यक्ति को मैप पर अपने घर की सही जगह बतानी होगी और परिवार की जरूरी जानकारी भरनी होगी। सारी जानकारी भरने के बाद, जब फॉर्म सबमिट किया जाएगा, तो सिस्टम से एक 16-अंकों की ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन ID’ (SE ID) बनेगी। यह ID बहुत जरूरी है, क्योंकि जब जनगणना स्टाफ खुद घर आएगा, तो उन्हें बस यही SE ID देनी होगी।

खास बात यह है कि सेल्फ-एन्यूमरेशन नागरिकों को दी गई एक और वैकल्पिक सुविधा है। अगर कोई व्यक्ति ऑनलाइन जानकारी नहीं भर पाता है, तब भी जनगणना करने वाले खुद घर आकर जानकारी इकट्ठा करेंगे, ठीक वैसे ही जैसे पिछली जनगणना में किया था। स्टाफ उन लोगों के घरों पर भी जाएगा, जिन्होंने ऑनलाइन जानकारी भरी है, ताकि उसकी जाँच हो सके। लेकिन उनसे दोबारा सारी जानकारी माँगने के बजाय, डेटा की पुष्टि सिर्फ SE ID के जरिए की जाएगी और उस व्यक्ति को जनगणना में शामिल कर लिया जाएगा।

दूसरा चरण जनगणना का अहम हिस्सा है। इस चरण को‘जनसंख्या जनगणना’ कहा जाता है। यह फरवरी 2027 में होगा। हालाँकि, लद्दाख, जम्मू और कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे बर्फीले प्रदेशों में यह प्रक्रिया सितंबर 2026 में ही पूरी कर ली जाएगी। इस चरण की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जनसंख्या जनगणना के साथ-साथ जाति-आधारित जनगणना भी की जाएगी। इससे सामाजिक आँकड़े इकट्ठा करने में मदद मिलेगी।

दूसरे चरण में देश के हर नागरिक के बारे में निजी और पूरी जानकारी जमा की जाएगी। इसमें व्यक्ति की शिक्षा, सामाजिक और आर्थिक स्थिति, रहने की जगह में बदलाव जैसे अहम पहलू शामिल हैं। इस चरण के लिए कौन से सवाल पूछे जाएँगे और इसकी सही तारीखें क्या होंगी, इसकी आधिकारिक घोषणा सरकार जल्द ही करेगी।

पहले चरण में कौन से सवाल (FAQs) पूछे जा रहे हैं?

जनगणना के पहले चरण के दौरान नागरिकों से 33 सवाल पूछे जा रहे हैं। इस सवालों की सूची 30 मार्च 2026 को जारी की गई है। इन 33 सवालों का मकसद नागरिकों के रहन-सहन के स्तर, घर की सुविधाओं, परिवार और तकनीकी उपकरणों के इस्तेमाल के बारे में सही जानकारी इकट्ठा करना है। अब, आइए जानते हैं कि वे 33 सवाल कौन से हैं, जिनका जवाब हर घर में देना होगा।

भवन और आवास का विवरण

  1. भवन संख्या: नगरपालिका, स्थानीय निकाय या जनगणना द्वारा दी गई एक संख्या।
  2. गणना गृह संख्या: घर की विशिष्ट पहचान के लिए एक संख्या।
  3. घर का फर्श : घर के फर्श बनाने में इस्तेमाल होने वाली मुख्य सामग्री (टाइलें, सीमेंट, लकड़ी, आदि)।
  4. दीवार की सामग्री: घर की दीवारें बनाने में इस्तेमाल होने वाली मुख्य सामग्री (ईंट, पत्थर, कंक्रीट, आदि)।
  5. छत की सामग्री: घर की छत किस सामग्री से बनी है (फूस, पाइप, शीट, ईंट आदि)?
  6. घर का उपयोग: घर का उपयोग रहने के लिए, दुकान के लिए या किसी अन्य उद्देश्य के लिए किया जाता है, इसका विवरण।
  7. घर की स्थिति: घर की वर्तमान स्थिति (नया, पुराना या जर्जर)।

परिवार और मुखिया का विवरण:

  1. परिवारों की संख्या: एक घर में रहने वाले परिवारों की संख्या।
  2. व्यक्तियों की कुल संख्या: आमतौर पर घर में रहने वाले सदस्यों की कुल संख्या।
  3. घर के मुखिया का नाम: घर के मुखिया का नाम।
  4. मुखिया का लिंग: क्या मुखिया पुरुष, महिला या ट्रांसजेंडर है?
  5. सामाजिक वर्ग: परिवार के सदस्य अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) या अन्य वर्गों से संबंधित हैं?
  6. स्वामित्व की स्थिति: क्या आवास अपना है या किराए का?

आवास सुविधाएं:

  1. कमरों की संख्या: परिवार के पास रहने के लिए कितने कमरे हैं?
  2. विवाहित जोड़े: घर में रहने वाले विवाहित जोड़ों की संख्या।
  3. पीने के पानी का स्रोत: पानी कहाँ से प्राप्त होता है (नल, हैंडपंप, कुआँ, आदि)?
  4. पानी की उपलब्धता: क्या पीने का पानी घर के परिसर के भीतर उपलब्ध है, या इसे बाहर से लाना पड़ता है?
  5. प्रकाश का स्रोत: घर में प्रकाश का मुख्य स्रोत (बिजली, सौर ऊर्जा, मिट्टी का तेल, आदि)।
    स्वच्छता और खाना पकाने की व्यवस्था: कहाँ और कैसी चुल्हे का इस्तेमाल किया जाता है
  6. शौचालय की सुविधा: क्या घर में शौचालय है या नहीं?
  7. शौचालय का प्रकार: यह किस प्रकार का शौचालय है (फ्लश वाला, इंडियन टॉयलेट या गड्ढे वाला, आदि)?
  8. अपशिष्ट जल का निपटान: जल निकासी या सीवेज प्रणाली का विवरण। 22. नहाने की सुविधाएँ: क्या घर में नहाने के लिए कोई अलग जगह या बाथरूम है या नहीं?
  9. रसोई और गैस कनेक्शन: क्या घर में अलग रसोई और LPG/PNG कनेक्शन की सुविधा है या नहीं?
  10. खाना पकाने का ईंधन: खाना पकाने के लिए मुख्य रूप से किस ईंधन का उपयोग किया जाता है (गैस, लकड़ी, बिजली, आदि)?

संपत्ति और संसाधन:

  1. रेडियो/ट्रांजिस्टर: क्या यह उपकरण घर में उपलब्ध है या नहीं?
  2. टेलीविजन (TV): क्या घर में TV की सुविधा है या नहीं?
  3. इंटरनेट सुविधा: क्या घर में इंटरनेट एक्सेस की सुविधा है या नहीं?
  4. लैपटॉप/कंप्यूटर: क्या घर में कंप्यूटर या लैपटॉप है या नहीं?
  5. फोन सुविधा: लैंडलाइन, मोबाइल या स्मार्टफोन की उपलब्धता।
  6. दो-पहिया वाहन: चाहे वह साइकिल हो, स्कूटर हो या मोटरसाइकिल।
  7. चार-पहिया वाहन: कार, जीप या वैन जैसे वाहन की उपलब्धता।

अन्य विवरण:

  1. मुख्य अनाज: परिवार मुख्य रूप से भोजन में किस अनाज (गेहूँ, चावल, बाजरा, आदि) का उपयोग करता है?
  2. मोबाइल नंबर: भविष्य में संपर्क और सत्यापन के लिए परिवार का मोबाइल नंबर।

वर्तमान गणना पद्धति में बदलाव

पिछली जनगणना और जनगणना 2027 के बीच सबसे बड़ा अंतर इसकी कार्यप्रणाली में है। जहाँ ब्रिटिश काल से लेकर 2011 तक पूरी प्रक्रिया पेन और पेपर से होती थी। वहीं 2027 की जनगणना भारत की पहली ‘पूरी तरह से डिजिटल’ जनगणना होगी। इस बार गणना करने वाले कर्मचारी एक मोबाइल ऐप का उपयोग करेंगे, और नागरिकों को 16 भाषाओं में ‘स्वयं-गणना’ (self-enumeration) की एक नई सुविधा मिलेगी। इससे डेटा प्रोसेसिंग का समय वर्षों से घटकर केवल 6-9 महीने रह जाएगा। तकनीकी स्तर पर GPS टैगिंग और जियोफेंसिंग के माध्यम से प्रत्येक घर की सटीक स्थिति निर्धारित करके ‘रियल-टाइम मॉनिटरिंग’ की जाएगी।

समय और चरणों के मामले में, पिछली जनगणना एक साथ की गई थी, जबकि 2027 में दो स्पष्ट चरण तय किए गए हैं। पहला चरण (अप्रैल-सितंबर 2026) घरों और सुविधाओं की सूची बनाने के लिए होगा, और दूसरा चरण (फरवरी-मार्च 2027) व्यक्तिगत विवरणों के लिए होगा। प्रश्नावली में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इसमें बैंकिंग से जुड़े सवालों को हटा दिया गया है और डिजिटल युग के अनुसार इंटरनेट, स्मार्टफोन और मोबाइल नंबर जैसी नई जानकारियों को जोड़ा गया है। इस बार प्रवासन (migration) से जुड़े सवालों को भी अधिक विस्तृत रखा गया है।

सामाजिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण से एक ऐतिहासिक बदलाव ‘जाति जनगणना’ है; 2011 में केवल SC/ST की गिनती की गई थी, लेकिन 2027 में सभी समुदायों के लिए जाति जनगणना की जाएगी। आजादी के बाद पहली बार सबकी जाति की गणना की जाएगी, चाहे वह किसी जाति का हो। केंद्र सरकार ने इस विशाल डिजिटल बुनियादी ढाँचे के लिए ₹11718 करोड़ का बजट आवंटित किया है। इस राशि का एक बड़ा हिस्सा 31 लाख कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने और एक मजबूत IT बुनियादी ढाँचा तैयार करने के लिए किया जाएगा।

पिछली जनगणना पारंपरिक और अपेक्षाकृत धीमी थी, जबकि 2027 की जनगणना अधिक पारदर्शी तेज और समावेशी होगी। डिजिटल माध्यमों से डेटा सुरक्षा और गोपनीयता के लिए नए प्रोटोकॉल के साथ, यह जनगणना देश की बदलती भौगोलिक और सामाजिक स्थिति की एक सही तस्वीर पेश करेगी। इसके आधार पर आने वाले दशक के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास जैसी कल्याणकारी योजनाओं के नीति निर्माण में काफी मदद मिलेगी।

(मूलरूप से यह लेख गुजराती में लिखा गया है। इसे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें)

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