Monday, June 17, 2024
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लगन हो तो ऐसी… 56 साल की उम्र में सिक्योरिटी गार्ड ने ली MSc गणित की डिग्री, 25 साल में 23 बार एक्जाम में हुए फेल फिर मिली कामयाबी

राजकरन बरौआ के पास घर, परिवार, बचत और स्थायी नौकरी के नाम पर कुछ नहीं था। साथ था केवल MSc गणित की डिग्री हासिल करने का जुनून। बरौआ अब गर्व से कहते हैं, "लेकिन मेरे पास डिग्री है।"

‘गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ्ल क्या गिरे जो घुटनों के बल चले’ की कहावत मध्य प्रदेश जबलपुर के सिक्योरिटी गार्ड राजकरन बरौआ पर सटीक बैठती है। वे गणित से MSc करने को लेकर इतने पक्के थे कि 25 साल तक कोशिश करते रहे। 23 बार फेल हुए। आखिरकार उन्होंने ये परीक्षा पास कर ही दम लिया।

राजकरन बरौआ के पास घर, परिवार, बचत और स्थायी नौकरी के नाम पर कुछ नहीं था। साथ था केवल MSc गणित की डिग्री हासिल करने का जुनून। बरौआ अब गर्व से कहते हैं, “लेकिन मेरे पास डिग्री है।” उन्होंने इसके लिए पहला एग्जाम 1977 में दिया था।

मौजूदा समय में राजकरन 56 साल के हैं। उन्होंने लगभग अपनी उम्र के आधे साल गणित में मास्टर डिग्री हासिल करने के अपने सपने को पूरा करने में लगा दिए। एक सुरक्षा गार्ड के तौर पर डबल शिफ्ट और कई तरह की मुश्किलों भरी नौकरियाँ करने के बाद भी उन्होंने पढ़ाई का जुनून नहीं छोड़ा।

आखिरकार साल 2021 में वो MSc गणित की परीक्षा पास करने में कामयाब हो गए। अपने एम्प्लायर को शर्मिंदा होने से बचाने के लिए उन्होंने चुपचाप कामयाबी का जश्न मनाया। राजकरन कहते हैं कि वे केवल बंद दरवाजों के पीछे ही जश्न मना सकते थे, क्योंकि उनके मालिक उनका उदाहरण देकर अपने बच्चों को ताना मारा करते थे।

वे कहते हैं कि उनके मालिक अपने बच्चों से कहते थे कि उनके दृढ़ संकल्प को देखें कि कैसे वो इस उम्र में भी मेहनत से पढ़ाई कर रहे हैं। राजकरण कहते हैं, ”मैं उन्हें शर्मिंदा नहीं करना चाहता था इसलिए मैंने चुपचाप जश्न मनाया और इसे अपने तक ही सीमित रखा। अब मैंने वह नौकरी छोड़ दी है, इसलिए मैं लोगों को बता सकता हूँ।”

राजकरन कहते हैं है कि 2015 में टीओआई की रिपोर्ट से उन्हें बहुत हौसला मिला। उन्होंने कहा, “मैं अपने 18वीं कोशिश में भी फेल हो गया था। बेहद उदास महसूस कर रहा था, लेकिन एक बार मेरे बारे में खबर छपने से लोगों ने मुझे अलग तरह से देखना शुरू कर दिया। टीवी चैनल मेरी तलाश में आए। यह प्रेरणा की एक बड़ी खुराक थी।”

राजकरन रात में सुरक्षा गार्ड का काम करते हैं। इसके लिए उन्हें हर महीने 5,000 रुपए मिलते हैं। वहीं बंगले में काम करने के बदले उन्हें रहना, खाना और 1,500 रुपये अलग से मिलते थे। उनका कहना है, “मैं मुश्किल से अपनी जीवन चला पाता हूँ, लेकिन पिछले 25 साल में मैंने परीक्षा पास करने के लिए किताबों, परीक्षा शुल्क और संबंधित चीजों पर 2 लाख रुपए खर्च किए हैं।”

शादी की बात पर राजकरन कहते है, “मुझसे शादी कौन करेगा जब मैंने अपनी शादी अपने सपने से कर ली थी।” गणित में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री को लेकर जुनूनी होने की वजह बताते हुए कहते है, “1996 में एमए करने के बाद, मैं एक स्कूल गया और वहाँ छात्रों से बातचीत की। मैंने जिस तरह से बच्चों को गणित पढ़ाया, शिक्षकों ने उसकी सराहना की। इससे गणित में पीजी करने का विचार आया।”

वो आगे बताते हैं, “उन दिनों, आपके पास एक वैकल्पिक विषय के साथ एमएससी करने का विकल्प था। मैंने 1996 में जबलपुर के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में गणित में एमएससी के लिए आवेदन किया और उसे स्वीकार कर लिया गया।”

हालाँकि वो कहते हैं कि उन्होंने कभी ये अनुमान नहीं लगाया था कि ये इतना मुश्किल होगा। वो ये भी कहते हैं कि उन्हें पक्के तौर पर ये भी नहीं पता था कि उनके पास इसे करने के लिए इतना दृढ़ संकल्प होगा।

वे बताते है, “मैं 1997 में पहली बार एमएससी की परीक्षा में बैठा और असफल हो गया। अगले 10 साल तक मैं पाँच विषयों में से केवल एक में ही पास हो सका, लेकिन कभी हार नहीं मानी। मैंने इस बात की परवाह नहीं की कि लोग क्या कहते हैं और मैंने अपने सपने पर ध्यान केंद्रित किया।

उन्होंने आगे कहा, “इसके बाद फिर, मैंने दो विषयों में पास होना शुरू हुआ। आखिरकार, 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान, मैंने अपनी पहले साल की परीक्षा पास कर ली और 2021 में मैंने दूसरे साल की परीक्षा भी पास कर ली। मैं बहुत खुश था।” उन्होंने कहा, “इस सबसे मैंने सीखा कि कोशिश की जाए और धैर्य रखा जाए तो वो हमें सब कुछ हासिल करा देंगे।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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