Tuesday, January 18, 2022
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मुद्रा योजना: 33 महीने में 1.12 करोड़ को रोजगार, शिशु लोन से 66% नौकरी पैदा

मुद्रा योजना के तहत कुल 5.71 लाख करोड़ का लोन मुद्रा योजना की शिशु, किशोर और तरुण योजना के तहत बाँटा गया है। इसमें से 12.27 करोड़ के लोन पहले तीन सालों में बाँटे गए। बाँटे गए लोन की औसत रकम 46,536 रुपए रही।

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी मुद्रा योजना से 33 महीने में 1.12 करोड़ अतिरिक्त रोजगार पैदा हुए हैं। इनमें से 66 फीसदी नौकरी अकेले शिशु लोन से पैदा हुई है। इस योजना के तहत 50 हजार रुपए तक का कर्ज शिशु लोन के दायरे में आता है।

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की ओर से कराए गए सर्वे से यह बात सामने आई है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से संबंधित यह सर्वे अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। इंडियन एक्सप्रेस ने मसौदा रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया है कि अप्रैल 2015 से दिसंबर 2017 यानी शुरुआती 33 महीनों में ही इस योजना से 1.12 करोड़ अतिरिक्त नौकरी पैदा हुई।

इसके मुताबिक इस योजना से 51.06 लाख लोग स्वरोजगार कर रहे हैं, जबकि 60.94 लाख लोग वेतन पर काम कर रहे हैं। योजना का लाभ उठाने वाले हरेक पाँच (20.6 प्रतिशत) में से एक ने लोन के पैसे से नया बिज़नेस शुरू किया। वहीं, अन्य कारोबारियों ने लोन के पैसों से पहले से चल रहे अपने बिज़नेस का विस्तार किया। मसौदा रिपोर्ट 27 मार्च, 2019 को तैयार की गई।

सर्वे की मुख्य बातें

  • मुद्रा योजना के तहत कुल 5.71 लाख करोड़ का लोन मुद्रा योजना की शिशु, किशोर और तरुण योजना के तहत बाँटा गया है। इसमें से 12.27 करोड़ के लोन पहले तीन सालों में बाँटे गए। बाँटे गए लोन की औसत रकम 46,536 रुपए रही।
  • योजना के तहत बाँटे गए लोन में से शिशु लोन (50,000 तक का लोन) का हिस्सा 42 प्रतिशत है। किशोर लोन (50,000 से 5 लाख रुपए तक) का हिस्सा 34 प्रतिशत है, जबकि तरुण लोन (पाँच लाख से लेकर 10 लाख तक का लोन) की हिस्सेदारी 24 प्रतिशत है।
  • अतिरिक्त रोजगार का 66 प्रतिशत हिस्सा शिशु लोन से पैदा हुआ। किशोर लोन से 18.85% और तरुण लोन से 15.51% लोगों को रोज़गार मिला।

यह सर्वे, विनिर्माण, सेवाओं, संबद्ध कृषि, व्यापार और अन्य क्षेत्रों सहित विभिन्न क्षेत्रों में रोज़गार सृजन की जानकारी एकत्र करने के लिए किया गया था। सर्वे शुरू होने से पहले लगभग 5 करोड़ व्यक्ति (3.1 करोड़ स्व-नियोजित, 1.95 करोड़ काम पर रखे गए कर्मचारी) ऐसे प्रतिष्ठानों में कार्यरत थे, जिन्हें मुद्रा लोन का लाभ मिला था।

ग़ौरतलब है कि मुद्रा योजना (PMMY) के तहत बिना गारंटी के लोन मिलता है। इसके अलावा लोन के लिए कोई प्रोसेसिंग चार्ज भी नहीं लिया जाता है। मुद्रा योजना (PMMY) में लोन चुकाने की अवधि को 5 साल तक बढ़ाया जा सकता है। लोन लेने वाले को एक मुद्रा कार्ड मिलता है, जिसकी मदद से कारोबारी ज़रूरत पर आने वाला खर्च कर सकता है। कोई भी व्यक्ति जो अपना व्यवसाय शुरू करना चाहता है, वह PMMY के तहत लोन ले सकता है।

 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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