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500 साल बाद जन्मभूमि पर राम मंदिर, 500 साल बाद पावागढ़ में फहराई धर्म ध्वजा… काशी से कामाख्या तक PM मोदी ने जगाया ‘गर्व से कहो हम हिंदू है’ का गौरव बोध

पीएम मोदी के उदय से सामूहिक चेतना का उद्भव हुआ है, धर्मस्थल भव्य और दिव्य हुए हैं। मोदी सिर्फ प्रधानमंत्री से अधिक एक ऐसे शख्स के तौर पर सामने आए हैं जिन्होंने 'गर्व से कहो हम हिंदू हैं' की भावना को नया आत्मविश्वास दिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (17 सितंबर 2025) अपना 75वाँ जन्मदिन मना रहे हैं। 2014 में सत्ता सँभालने के बाद उन्होंने जहाँ अर्थव्यवस्था, विदेश नीति और राजनीति के क्षेत्र में कई बड़े फैसले लिए तो दूसरी और उनके कार्यकाल का एक अहम पहलू धार्मिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण भी रहा है।

500 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण हो या फिर पावागढ़ की पहाड़ियों पर 5 शताब्दियों बाद धर्म ध्वजा का फिर से फहराया जाना हो, इन घटनाओं ने खुद को गर्व से हिंदू बताने के गौरव बोध को फिर से जगाया है।

काशी विश्वनाथ धाम का कायाकल्प, उज्जैन में महाकाल लोक का निर्माण और असम की कामाख्या शक्ति पीठ का विकास जैसे कार्यों ने आस्था से जुड़े इन स्थलों को नई पहचान दी है। इन स्थलों पर जाने वाले लोगों की संख्या कई गुना बढ़ गई है।

जब पीएम मोदी ने पावागढ़ में फहराई धर्म ध्वजा

राम मंदिर के संघर्ष की कहानी तो बड़ी संख्या में लोगों तक पहुँच गई है लेकिन पावागढ़ के काली माता मंदिर के लिए भी संघर्ष कम नहीं था। इस मंदिर पर महमूद बेगड़ा नाम के सुल्तान ने 15 वीं सदी में हमला किया था। महमूद गुजरात का छठा सुल्तान था और उसका पूरा नाम अबुल फत-नासिर-उद-दीन महमूद शाह प्रथम था। मात्र 13 साल की उम्र में सुल्तान की गद्दी पर बैठने के बाद उसने गुजरात में 52 साल राज किया।

1459-1511 ई के बीच कई लोगों ने इस सुल्तान का खूँखार रूप कई बार देखा। वह इलाकों को कब्जाने के लिए जंग लड़ता और जब जीत हासिल होती तो वहाँ के राजाओं से इस्लाम कबूल करने को कहता। जैसे ही कोई राजा इस्लाम मानने से मना करता वह उन्हें मौत के घाट उतार देता।

उसने जूनागढ़ और पावागढ़ में भी अपना कब्जा बहुत जल्दी कर लिया था। इसके बाद उसने महाकाली के मंदिर और द्वारका मंदिर को तुड़वाया। हिंदू मंदिरों पर हमले से उसका उद्देश्य साफ था कि हिंदुओं की अपने भगवान के प्रति आस्था कम हो जाए और वह इस्लाम कबूलें।

प्राचीन मंदिर को लेकर मान्यता

बता दें कि 15वीं शताब्दी के खूँखार इस्लामी सुल्तान ने पावागढ़ में जिस महाकाली मंदिर को अपना निशाना बनाया था उसे लेकर मान्यता है कि यहाँ पर ऋषि विश्वामित्र ने माता काली की कठोर तपस्या की थी। इसके अलावा श्रीराम भगवान और माता सीता के पुत्रों ने भी पावागढ़ में ही मोक्ष प्राप्त किया था।

पावागढ़ में इस प्राचीन मंदिर के शिखर को तोड़कर एक सुल्तान ने दरगाह का निर्माण करवाया था अब वहाँ दोबारा काली माता का भव्य मंदिर बनकर गया है। पीएम मोदी ने 18 जून 2022 को 500 साल बाद यहाँ ध्वज फहराया था।

गुजरात से सोमनाथ तक अध्यात्म का उदय

मोदी सरकार में उत्तराखंड के चारधाम महामार्ग प्रोजेक्ट के जरिए चार प्रमुख तीर्थस्थलों- केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री को हर मौसम में सड़क के द्वारा जोड़ने की बड़ी योजना चल रही है। वहीं, 2013 की आपदा के बाद केदारनाथ धाम का पुनर्निर्माण भी पीएम मोदी की प्राथमिकताओं में रहा है। धारा 370 हटने के बाद श्रीनगर के शंकराचार्य मंदिर और घाटी के अन्य प्राचीन मंदिरों, शक्तिपीठों का पुनर्विकास शुरू हुआ है।

मोदी सरकार ने विश्वविद्यालयों और IITs में भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) की शुरुआत की, जिसके तहत वेद, उपनिषद, योग और आयुर्वेद को शिक्षा से जोड़ा गया है। साथ ही, अयोध्या, चित्रकूट, हंपी, कुरुक्षेत्र जैसे ‘रामायण और पीएम मोदी’ केंद्रों पर इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारा गया।

बतौर प्रधानमंत्री अपने एक दशक के कार्यकाल में पीएम मोदी ने भारत की सांस्कृतिक आत्मा को फिर से भारत के केंद्र में ला खड़ा किया है। पीएम मोदी के उदय से सामूहिक चेतना का उद्भव हुआ है, धर्मस्थल भव्य और दिव्य हुए हैं। मोदी सिर्फ प्रधानमंत्री से अधिक एक ऐसे शख्स के तौर पर सामने आए हैं जिन्होंने ‘गर्व से कहो हम हिंदू हैं’ की भावना को नया आत्मविश्वास दिया है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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