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सुब्रत रॉय पर संकट आते ही पत्नी और बेटे ने छोड़ दी भारत की नागरिकता, जानिए क्या सहाराश्री के निधन के बाद डूब जाएगा निवेशकों का पैसा?

सहाराश्री निवेशकों का पैसा न लौटाने की वजह से काफी समय जेल में रहे थे। इस मामले में उन पर संकट आते ही उनके परिवार ने भारत की नागरिकता छोड़ दी थी। उनकी पत्नी स्वप्ना रॉय और बेटे सुशांतो रॉय ने बॉल्कन देश मैसेडोनिया की नागरिकता ले ली थी।

सहारा इंडिया परिवार के मुखिया और सहाराश्री के नाम से लोकप्रिय सुब्रत रॉय का निधन हो गया है। मंगलवार (14 नवंबर 2023) की रात उन्होंने आखिरी साँस ली। गोरखपुर से महज 2000 रुपए में कारोबार शुरू करने वाले रॉय के दुनिया के फलक पर छा जाने के कई किस्से मशहूर है। उनके जाने से सहारा परिवार और कारोबार जगत में भी माहौल गमगीन है।

सहारा समूह के प्रबंध कार्यकर्ता और अध्यक्ष सुब्रत रॉय की मौत रात 10.30 बजे दिल का दौरा पड़ने की वजह से हुई। वे कैंसर से जूझ रहे थे। हाइपरटेंशन, डायबिटीज जैसी बीमारियों से ग्रस्त सुब्रतो रॉय को हालत बिगड़ने की वजह से रविवार (12 नवंबर,2023) को मुंबई के कोकिला बेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल और मेडिकल इंस्टीट्यूट में भर्ती कराया गया था।

सहाराश्री निवेशकों का पैसा न लौटाने की वजह से काफी समय जेल में रहे थे। इस मामले में उन पर संकट आते ही उनके परिवार ने भारत की नागरिकता छोड़ दी थी। उनकी पत्नी स्वप्ना रॉय और बेटे सुशांतो रॉय ने बॉल्कन देश मैसेडोनिया की नागरिकता ले ली थी। ऐसा सहाराश्री के खिलाफ चल रहे मामलों को देखते हुए भारतीय कानून से बचने के लिए किया था।

दक्षिण-पूर्वी यूरोप का देश मैसेडोनिया अपने देश में निवेश और रोजगार देने वाले अन्य देश के लोगों को आसानी से नागरिकता दे देता है। सहाराश्री के इस देश से अच्छे रिश्ते थे।

गोरखपुर से 1978 में अपने दोस्त एसके नाथ के साथ फाइनेंस कंपनी शुरू करने वाले सहाराश्री तक का सफर करने वाले सुब्रतो राय ने कपड़ों और पंखों की छोटी फैक्ट्री खोली। इस दौरान वे दुकानदारों को छोटी बचत के फायदे गिनाते। यहीं वजह रही कि सहारा की ‘गोल्डेन की’ योजना खासी लोकप्रिय रही। इसके बाद उन्होंने लखनऊ में अपनी अलग कंपनी खोली थी, लेकिन गोरखपुर से उनका हमेशा खास लगाव रहा।

क्या सुब्रत रॉय के निधन के बाद मिलेगा सहारा का पैसा

सुब्रत रॉय के निधन बाद सहारा में आपकी गाढ़ी कमाई के निवेश का क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट ने निवेशकों का पैसा ब्याज के साथ लौटाने को कहा था। इसके बाद मोदी सरकार ‘सहारा रिफंड पोर्टल’ लॉन्च किया था। इस पोर्टल पर पैसा वापस पाने के लिए लाखों लोग आवेदन कर चुके हैं। इसी पोर्टल के जरिए निवेशकों का पैसा वापस मिलेगा।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह भी पूर्व में कह चुके हैं कि सहारा निवेशकों का पैसा ब्याज के साथ वापस मिलेगा। बताते चलें कि केंद्र सरकार ने 29 मार्च 2023 को सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि सहारा की 4 समितियों के निवेशकों को 9 माह में पैसे लौटा दिए जाएँगे। सुप्रीम कोर्ट में सहारा समूह के निवेशकों को राहत देने की अर्जी केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय ने लगाई थी। इस अर्जी के बाद उच्चतम न्यायालय ने ‘सहारा-सेबी रिफंड अकाउंट’ से 5000 करोड़ रुपए सेंट्रल रजिस्ट्रार ऑफ कोऑपरेटिव सोसायटीज (CRCS) में ट्रांसफर करने के निर्देश दिए थे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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