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सोनभद्र नरसंहार पर सख्त हुए CM योगी: हटाए गए DM और SP, कुल 15 लोगों पर कार्रवाई

सोनभद्र के ज़िलाधिकारी अंकित अग्रवाल को हटा दिया गया है। ज़िलाधिकारी के अलावा सोनभद्र के पुलिस अधीक्षक (एसपी) सलमान ताज पाटिल को भी हटा दिया गया है।

सोनभद्र नरसंहार मामले में सीएम योगी आदित्यनाथ ने बड़ा ऐक्शन लिया है। सोनभद्र के ज़िलाधिकारी अंकित अग्रवाल को हटा दिया गया है। उनकी जगह एस रामलिंगम को नया जिलाधिकारी बनाया गया है। ज़िलाधिकारी के अलावा सोनभद्र के पुलिस अधीक्षक (एसपी) सलमान ताज पाटिल को भी हटा दिया गया है। उनकी जगह प्रभाकर चौधरी को नया एसपी नियुक्त किया गया। यह कार्रवाई तीन सदस्यीय जाँच कमिटी की रिपोर्ट के आधार पर की गई है। अपर मुख्य सचिव राजस्व रेणुका कुमार ने सोनभद्र नरसंहार मामले की एक हज़ार पेज की जाँच रिपोर्ट सौंपी है। इसमें तीन सदस्यीय जाँच कमिटी प्रमुख सचिव श्रम सुरेश चंद्रा और कमिश्नर मिर्ज़ापुर एके सिंह भी शामिल थे।

मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने यह जानकारी रविवार (4 अगस्त) को सोनभद्र नरसंहार मामले पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी। सीएम योगी ने कहा, “17 जुलाई 2019 को जनपद सोनभद्र के घोरावल थाना व तहसील के ग्राम उम्‍भा में एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटित हुई थी। इसके उपरान्त मैंने 21 जुलाई को उस गाँव का दौरा किया था। मेरे साथ प्रदेश के मुख्य सचिव व प्रदेश के पुलिस महानिदेशक भी साथ में थे।”

इस दौरान उन्होंने बताया कि स्थिति का अवलोकन करने के बाद हमने दो प्रकार की कमिटियाँ गठित की थीं। एक कमिटी अपर मुख्य सचिव राजस्व श्रीमती रेणुका कुमार की अध्यक्षता में गठित हुई, दूसरी कमिटी पुलिस से सम्बंधित मामलों की जाँच के लिए एडीजी ज़ोन वाराणसी के नेतृत्व में गठित थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें ये दोनों रिपोर्ट 3 अगस्त को प्राप्त हुईं और उसी क्रम में व्यापक परीक्षण करने के बाद ही यह कार्रवाई की गई है। ग़ौरतलब है कि पूर्वी यूपी के सोनभद्र ज़िले के गाँव उम्‍भा में हुए हत्‍याकांड में 10 आदिवासी किसानों की मौत हुई थी। मुख्य आरोपी ग्राम प्रधान के अलावा कुल 24 लोगों को इस मामले में गिरफ़्तार किया गया था।

इसके अलावा उन्होंने इस बात का ज़िक्र किया कि मिर्ज़ापुर और सोनभद्र में सरकारी ज़मीनों के दुरुपयोग की अगले तीन महीनों में जाँच की जाएगी। उन्होंने बताया कि 8 राजपत्रित और 7 गैर-राजपत्रित अधिकारियों के ऊपर कार्रवाई की गई है। साज़िश करने वालों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बताया कि 10 अक्टूबर 1952 को आदर्श कृषि सहकारिता समिति कॉन्ग्रेस के पूर्व एमएलसी महेश्वर प्रसाद नारायण सिंह और दुर्गा प्रसाद राय ने गठित की थी। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इसके बाद साल 1989 में ज़मीन को ग़लत तरीके से बेचने का काम शुरू हुआ।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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