Homeविविध विषयअन्यइशरत जहाँ एनकाउंटर: पूर्व पुलिस अधिकारी डीजी वंजारा को अदालत ने किया आरोप मुक्त

इशरत जहाँ एनकाउंटर: पूर्व पुलिस अधिकारी डीजी वंजारा को अदालत ने किया आरोप मुक्त

कई लोगों ने इस एनकाउंटर को फेक बताया था। कॉन्ग्रेस नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कई मौक़ों पर इस एनकाउंटर पर सवाल खड़े किए थे। अदालत के इस निर्णय के बाद...

इशरत जहाँ एनकाउंटर मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने गुजरात के पूर्व पुलिस अधिकारी डीजी वंजारा को आरोप मुक्त कर दिया है। उनके अलावा पूर्व पुलिस अधिकारी एनके अमीन को भी आरोपों से मुक्त कर दिया गया। इससे पहले गुजरात हाई कोर्ट ने दोनों पर मुक़दमा चलाने से इनकार कर दिया था। हाई कोर्ट के इस निर्णय के बाद दोनों पूर्व पुलिस अधिकारियों ने अपने ऊपर लगे चार्जेज को हटाने की माँग की थी।

जस्टिस जेके पांड्या ने दोनों को आरोप मुक्त करते हुए कहा कि चूँकि गुजरात सरकार ने इन पर मुक़दमा चलाने की स्वीकृति नहीं दी, इसीलिए इन्हें आरोप मुक्त किया जाता है। ‘कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर (CRPC)’ के सेक्शन 197 के अनुसार, आधिकारिक ड्यूटी के दौरान किए गए कार्य के लिए किसी सरकारी कर्मचारी के ऊपर मुक़दमा चलाने हेतु सरकार की स्वीकृति चाहिए होती है।

इसके साथ ही इनके ख़िलाफ़ सारे मामले ख़त्म कर दिए जाएँगे। पुलिस बता चुकी है कि इशरत जहाँ एक आतंकी थी, जो गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को मारने की साज़िश रचने में शामिल थी। अहमदाबाद में चली सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने दोनों के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाने की स्वीकृति नहीं दी है। ज्ञात हो कि मुंबई के नजदीक स्थित मुंब्रा की रहने वाली 19 वर्षीय इशरत जहाँ, जावेद शेख उर्फ प्राणेश पिल्लै, अमजद अली अकबर अली राणा और जीशान जौहर की 15 जून, 2004 को अहमदाबाद के बाहर पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में मौत हो गई थी।

बाद में कई लोगों ने इस एनकाउंटर को फेक बताया था। कॉन्ग्रेस नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कई मौक़ों पर इस एनकाउंटर पर सवाल खड़े किए थे। डीजी वंजारा इस मामले में 2007 से लेकर 2015 तक जुडिशल कस्टडी में थे। उन्हें 2015 में ज़मानत मिली थी। उन्हें अगस्त 2017 में सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामले में भी बरी किया जा चुका है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -