Sunday, May 19, 2024
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भीड़ को भड़काना, दंगा करना, संपत्तियों को नष्ट करना… मुफ्ती सलमान अजहरी पर दर्ज हैं 11 FIR, गुजरात ही नहीं महाराष्ट्र-कर्नाटक में भी शिकायतें

ये सारे मामले 2015 के बाद के हैं उससे पहले अगर कोई शिकायत दर्ज हुई थी तो उसकी जानकारी अभी प्राप्त नहीं हो पाई है। आगे कोई दर्ज केस का पता चलता है तो संख्या और भी ज्यादा बढ़ सकती हैं।

गुजरात के जूनागढ़ में भड़काऊ भाषण देने वाले सलमान अजहरी पर सिर्फ गुजरात में नहीं बल्कि अन्य राज्यों में भी एफआईआर दर्ज है। ये शिकायतें बताती हैं कि अजहरी का आपराधिक इतिहास रहा है। उस पर कभी भड़काऊ भाषण देने के आरोप लगे हैं तो कभी हिंसक गतिविधियों में शामिल होने के।

इस रिपोर्ट में अजहरी के विरुद्ध दर्ज मामलों की हम आपको जानकारी पेश कर रहे हैं। ये सारे मामले 2015 के बाद के हैं उससे पहले अगर कोई शिकायत दर्ज हुई थी तो उसकी जानकारी अभी प्राप्त नहीं है। अगर मामला 2015 से पूर्व दर्ज हुआ होगा तो ये संख्या और भी बढ़ सकती है।

सलमान अजहरी के खिलाफ दायर 11 FIR का ब्यौरा

  • मुफ्ती सलमान अजहरी के खिलाफ पहली एफआईआर पुराने हुबली पुलिस स्टेशन, धारवाड़ (कर्नाटक) में 14 दिसंबर 2015 को दर्ज की गई थी। केस में आईपीसी की धारा 143, 147, 148, 153, 427 और 149 लगाई गई थी।
  • अजहरी के खिलाफ दूसरी एफआईआर भी ओल्ड हुबली पुलिस स्टेशन (कर्नाटक) में भी दर्ज की गई थी। लेकिन एक दिन बाद यानी 15 दिसंबर 2015 को। हुबली पुलिस स्टेशन (249/2015) में दर्ज इस एफआईआर में आईपीसी की धारा 143, 147, 148, 153, 427, 149 और संपत्ति क्षति से संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया था।
  • अजहरी के खिलाफ तीसरी एफआईआर भी 15 दिसंबर 2015 को दर्ज की गई थी। शिकायत धारवाड़ (कर्नाटक) कस्बापेठ पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी। एफआईआर (1354/2015) आईपीसी की धारा 143, 147, 148, 153, 427 और 149 के तहत दर्ज की गई थी।
  • मौलाना के खिलाफ चौथी एफआईआर भी 15 दिसंबर 2015 को दर्ज की गई थी। यह शिकायत भी कस्बापेठ पुलिस स्टेशन में ही दर्ज की गई थी। इसमें आईपीसी की धारा 143, 147, 148, 153, 427 और 149 के तहत अपराध दर्ज किया गया था।
  • पाँचवीं एफआईआर भी 15 दिसंबर 2015 को कस्बापेठ पुलिस स्टेशन में ही दर्ज की गई थी। आईपीसी की धारा 143, 147, 148, 153, 427 और 149 के तहत अपराध दर्ज किया गया था।
  • इसके बाद 15 दिसंबर 2015 को अजहरी के खिलाफ छठी एफआईआर भी कस्बापेठ पुलिस स्टेशन में ही दर्ज कराई गई थी। केस को आईपीसी की धारा 143, 147, 148, 153, 427, 149 और संपत्ति क्षति से संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया था।
  • 15 दिसंबर 2015 को कसाबापेठ पुलिस स्टेशन में ही अजहरी के खिलाफ सातवीं एफआईआर भी दर्ज की गई थी। एफआईआर आईपीसी की धारा 143, 147, 148, 153, 427 और 149 के तहत दर्ज की गई थी।
  • अजहरी के खिलाफ आठवीं एफआईआर 5 अप्रैल 2017 को दर्ज की गई थी। वह भी कस्बापेठ पुलिस स्टेशन में ही दर्ज की गई थी। केस को आईपीसी की धारा 143, 147, 148, 153, 427 और 149 के तहत दायर किया गया था।
  • नौवीं एफआईआर 26 अप्रैल, 2021 को मुंबई के विक्रोली पार्क साइट पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी। एफआईआर आईपीसी की धारा 195 (ए) के तहत दर्ज की गई थी। इस मामले में पुलिस ने कोर्ट में ‘ए’ समरी दाखिल कर दी है।
  • दसवीं शिकायत गुजरात के जूनागढ़ में दर्ज की गई है। मुफ़्ती सलमान अजहरी ने जूनागढ़ आकर भड़काऊ भाषण दिया। जिसके बाद जूनागढ़ पुलिस ने स्वत: संज्ञान लेते हुए एफआईआर दर्ज की। एफआईआर आईपीसी की धारा 153(बी), 505(2), 188 और 114 के तहत दर्ज की गई है। इस मामले पर कार्रवाई फिलहाल जारी है।
  • 11वीं एफआईआर भी गुजरात में ही दर्ज की गई है। लेकिन ये कच्छ के समखियाली पुलिस स्टेशन में दर्ज है। दरअसल, जूनागढ़ में भड़काऊ भाषण देने से पहले अजहरी ने कच्छ में भी भड़काऊ भाषण दिया था। इस संबंध में कच्छ पुलिस ने मामला भी दर्ज कर लिया है।

उपरोक्त जानकारी से पता चलता है कि 14 और 15 दिसंबर 2015 को अजहरी के खिलाफ 8 एफआईआर दर्ज की गई थी। ये सभी शिकायतें कर्नाटक में दर्ज हुई थीं और इनमें लगाई धाराएँ भी एक जैसी थीं। अब सिर्फ 2 दिन में सामने आए 8 अपराध और सभी अपराध की धाराएँ एक जैसी होने से आपको लग सकता है कि अजहरी ने ऐसा क्या किया। तो आइए धारा आईपीसी की धारा 143, 147, 148, 153, 427 और 149 के तहत दर्ज की गई हैं। यह भी पता चलेगा कि अजहरी का आपराधिक इतिहास रहा है।

अजहरी के खिलाफ लगाई धाराओं से पता चलता है उसकी प्रवृत्ति

धारा 143 तब लागू की जाती है जब कोई व्यक्ति किसी गैरकानूनी सभा में भाग लेता है। धारा 147 तब लागू की जाती है जब कोई व्यक्ति सांप्रदायिक दंगों, हिंसा में भाग लेकर शांति भंग करने की कोशिश करता है। धारा 148 तब लगाई जाती है जब कोई व्यक्ति किसी घातक हथियार के साथ दंगे में भाग लेता है। धारा 153 तब जोड़ी जाती है जब कोई व्यक्ति भड़काऊ भाषण देकर भीड़ को भड़काने की कोशिश करता है और धार्मिक-सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करता है।

धारा 149 भी तभी जोड़ी जाती है जब कोई व्यक्ति किसी निषिद्ध सभा में भाग लेता है और धारा 427 तब लगाई जाती है जब किसी व्यक्ति ने कोई ऐसा कार्य किया हो जिससे दूसरे पक्ष को 50 रुपए या उससे अधिक का नुकसान हुआ हो। संक्षेप में कहें तो इस धारा के तहत किसी की संपत्ति को नष्ट करना या तोड़फोड़ करना अपराध है।

अब अगर इन सभी धाराओं की समीक्षा की जाए तो पता चलता है कि मुफ्ती सलमान अजहरी का आपराधिक इतिहास है और वह ऐसे अपराधों में शामिल है जिनके कारण उसपर उक्त एफआईआर लगाई गई। अब एटीएस उसके खिलाफ गहनता से जाँच कर रही है। उसके तीन ट्रस्ट भी संदेह के घेरे में हैं। साथ ही आतंकी संगठन से कनेक्शन की भी जाँच की जा रही है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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