आरफा को भारत के 'हिंदू राष्ट्र' कहलाए जाने से दिक्कत है, क्योंकि आरफा के दिमाग में गलतफहमी है कि भारत में संस्कृति और सभ्यता का विकास मुगलों के आने के बाद हुआ।
वाराणसी में हॉकी खिलाड़ी मोहम्मद शाहिद के मकान पर बुलडोजर चलने पर इसे लिबरल-वामपंथी गैंग ने अधूरी जानकारी के साथ 'मुस्लिम पीड़ित' नैरेटिव से जोड़कर प्रचारित किया।
असल आश्चर्य इस किताब को पढ़ने के बाद हुआ। पूरी किताब में कहीं भी ऐसी बात नजर नहीं आई, जिस पर दंगा हो सके, दर्जनों लोगों की जानें जाएँ और लेखक पर दर्जनों बार जानलेवा हमले हों...।