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पदोन्नत होकर एडिशनल DCP बने अनुज कुमार, दिल्ली दंगों में जान पर खेल कर बचाई थी पुलिसकर्मियों की जान

एसीपी ने बताया कि गत 24 फरवरी को, शाहदरा डीसीपी अमित शर्मा चाँदबाग में हिंसक भीड़ के बीच वजीराबाद रोड के डिवाइडर के पास घायल होकर बेहोश हो गए थे। स्थिति की गम्भीरता को देखते हुए दो अन्य पुलिसकर्मियों के साथ वे डीसीपी को लेकर यमुना विहार की तरफ भागे।

पुलिस ने शुक्रवार (जून 26, 2020) को इस बात की जानकारी दी कि पूर्वोत्तर दिल्ली के पूर्व एसीपी अनुज कुमार, जो गत फरवरी में राष्ट्रीय राजधानी के पूर्वोत्तर हिस्से में हुई हिंसा के दौरान घायल हुए थे, को पदोन्नत किया गया और उन्हें दक्षिण दिल्ली के अतिरिक्त डीसीपी के रूप में नियुक्त किया गया है। गत 24 फरवरी को उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए हिंसा के में डीसीपी शाहदरा अमित शर्मा और अनुज कुमार सहित कम से कम 11 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।

इस हिंसा में एक पुलिस हेड कॉन्स्टेबल सहित कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई, जबकि लगभग 200 लोग घायल हो गए। अनुज कुमार ने कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव से मुलाकात कर घटना की पूरी जानकारी उनसे साझा की थी।

दिल्ली पुलिस के ट्रांसफर ऑर्डर की प्रति

उन्होंने उस दिन की भयावह स्थिति के बारे में बताया कि, किस तरह हिंसक मुस्लिम भीड़ ने उन पर हमला किया था और किन हालातों में उन्होंने डीसीपी अमित शर्मा सहित अपने सहयोगियों को बचाया था।

समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए, एसीपी ने बताया कि गत 24 फरवरी को, शाहदरा डीसीपी अमित शर्मा चाँदबाग में हिंसक भीड़ के बीच वजीराबाद रोड के डिवाइडर के पास घायल होकर बेहोश हो गए थे। स्थिति की गम्भीरता को देखते हुए दो अन्य पुलिसकर्मियों के साथ वे डीसीपी को लेकर यमुना विहार की तरफ भागे।

उन्होंने आगे बताया कि भीड़ की तरफ से लगातार उन पर पत्थरबाजी हो रही थी। जब उनकी टीम शांति से भीड़ के साथ बातचीत करने की कोशिश कर रही थी और उन्हें मुख्य सड़क के बजाय सर्विस रोड तक सीमित रहने के लिए कहा जा रहा था, उसी दौरान ऐसी अफवाह फैली कि पुलिस की गोलीबारी में कुछ महिलाएँ और बच्चे घायल हो गए। जिस कारण लोग भड़क गए और हिंसक हो गए।

इस वीभत्स घटना को याद करते हुए अनुज शर्मा ने बताया कि वहाँ कुल मिलाकर लगभग 250 की संख्या में पुलिसकर्मी मौजूद थे, जबकि पथराव कर रही हिंसक भीड़ में लगभग 25,000 से 30,000 लोग शामिल थे।

उन्होंने कहा- “हम लगातार वहाँ मौजूद महिलाओं और भीड़ को मनाने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन उसी दौरान प्रदर्शनकारियों ने पत्थर और ईंटें उठाकर अचानक पथराव शुरू कर दिया और स्थिति बेकाबू हो गई।” एसीपी ने बताया कि पुलिस ने भीड़ को अलग करने के लिए आँसू गैस के गोले दागे लेकिन प्रदर्शनकारियों के बीच पर्याप्त दूरी होने के कारण यह कोशिश नाकाम रही।

हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल की हत्या

गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल की इन दंगों के दौरान ही फरवरी 24, 2020 को हत्या हो गई थी। जब वे अपने सीनियर्स के साथ गश्त पर थे तभी उन्हें दंगाइयों ने गोली मार दी थी। वहीं, पुलिस ने अपनी चार्जशीट में यह आरोप लगाया है कि 22 फरवरी को 45 लोगों के एक समूह ने एक घर के बेसमेंट में एक बैठक की थी। उसी जगह दंगों की पूरी साजिश रची गई।

साजिश के तहत 23 फरवरी को दंगाइयों ने वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों को घर के अंदर रहने के लिए कहा था। क्योंकि उन्होंने उस दिन अपनी योजना के अनुसार सड़कों पर दंगा भड़काना था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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