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मुज़फ़्फ़रनगर दंगा: संप्रदाय विशेष के 7 आरोपित दोषी करार; 119 के ख़िलाफ़ केस वापस लेगी सरकार

मुज़फ़्फ़रनगर दंगे के 7 आरोपितों को अतिरिक्त जिला न्यायाधीश कोर्ट में दोषी करार दिया गया है। मुज़फ़्फ़रनगर के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश हिमांशु भटनागर ने इन सभी आरोपितों को दोषी करार देते हुए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। कोर्ट ने इस मामले में दोषियों को सजा सुनाने के लिए 8 फ़रवरी की तारीख तय की है।

मुज़फ़्फ़रनगर दंगे के इसी मामले में राज्य की योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार की तरफ़ से स्पेशल सेक्रेटरी जेपी सिंह और अंडर सेक्रेटरी अरुण कुमार राय ने मुज़फ़्फ़रनगर के जिला मजिस्ट्रेट को पत्र लिखा है।

पत्र में मुजफ़्फरनगर दंगे से जुड़े 38 मामलों को वापस लेने के लिए सिफरिश की गई है। इन सभी 38 मामलों में लगभग 119 लोग अभियुक्त बनाए गए थे। सरकार की तरफ़ से कोर्ट को भेजे गए इस पत्र को राज्यपाल द्वारा मंजूरी दे दी गई है।

जानकारी के लिए आपको बता दें कि अगस्त 2013 में उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर के कवाल गाँव में दो संप्रदाय के बीच दंगा भड़क गया था।

इस दंगे में सचिन व गौरव नाम के दो लोगों की जानें गई थी। इन दोनों ही लोगों की जघन्य हत्या में सभी सात आरोपित शामिल थे। अतिरिक्त जिला न्यायाधिश ने जिन सात लोगों को दंगे के लिए दोषी बताया है वे सभी एक संप्रदाय विशेष से आते हैं।

इन सभी आरोपितों के नाम क्रमश: मुजस्सिम, मुजम्मिल, फ़ुरक़ान, नदीम, जहांगीर, अफ़जाल और इक़बाल हैं। इन सभी को कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।

कवाला गाँव की इस घटना के बाद मुजफ़्फरनगर शहर और शामली में भी दो संप्रदाय के बीच दंगे हुए थे। इस दंगे में लगभग 60 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी, जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए थे।

इस वीभत्स घटना में कुल 8 आरोपित थे, जिनमें एक आरोपित शहनवाज की मौत पहले ही हो चुकी है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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