Thursday, June 13, 2024
Homeदेश-समाजखालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह हो या उसके साथी, असम के डिब्रूगढ़ जेल में ही...

खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह हो या उसके साथी, असम के डिब्रूगढ़ जेल में ही क्यों किए जा रहे कैद: जानें वजह और इतिहास, कई अन्य कुख्यात भी रहे यहाँ

डिब्रूगढ़ जेल अंग्रेजों द्वारा इसे 1859-60 में में बनाया गया था। जेल परिसर 15.54 एकड़ भूमि में फैला हुआ है और असम पुलिस के ब्लैक कैट कमांडो, सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षा कर्मियों से घिरा हुआ है। रिपोर्टों से पता चलता है कि अपने 170 वर्षों के इतिहास में डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल में कभी भी जेल ब्रेक की घटना नहीं हुई है।

भगोड़े खालिस्तानी समर्थक अमृतपाल सिंह (Amritpal Singh) को पंजाब पुलिस ने रविवार (23 अप्रैल 2023) को मोगा जिले के रोडे गाँव से गिरफ्तार किया। पंजाब में कानून-व्यवस्था न बिगड़े इसलिए उसे और उसके सहयोगियों को असम में अंग्रेजों के जमाने की डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल भेज दिया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमृतपाल अपने नौ सहयोगी दलजीत सिंह कलसी, पापलप्रीत सिंह, कुलवंत सिंह धालीवाल, वरिंदर सिंह जोहल, गुरमीत सिंह बुक्कनवाला, हरजीत सिंह, भगवंत सिंह, बसंत सिंह और गुरिंदरपाल सिंह औजला के साथ डिब्रूगढ़ जेल में बंद है।

डिब्रूगढ़ जेल को देश की आजादी के पहले स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने वाले भारतीयों को रखने के लिए बनाया गया है। पूर्वोत्तर में कंक्रीट से बनी ये पहली जेल है। हालाँकि, आजादी के बाद इसमें देश के खिलाफ काम करने वाले कई कुख्यात कैदियों को रखा गया है। इसमें उल्फा के उग्रवादियों से लेकर अब खालिस्तान समर्थकों को रखा जाना शामिल है। यह इस क्षेत्र की सबसे पुरानी और सबसे सुरक्षित जेलों में से एक है।

अंग्रेजों द्वारा इसे 1859-60 में में बनाया गया था। जेल परिसर 15.54 एकड़ भूमि में फैला हुआ है और असम पुलिस के ब्लैक कैट कमांडो, सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षा कर्मियों से घिरा हुआ है। रिपोर्टों से पता चलता है कि अपने 170 वर्षों के इतिहास में डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल में कभी भी जेल ब्रेक की घटना नहीं हुई है।

ऐसा माना जा रहा है कि खालिस्तानी समर्थकों को असम ले जाने का एक कारण उन्हें असमिया भाषा न आना भी हो सकता है, क्योंकि जो कैदी असमिया नहीं जानते हैं, वे विशेष रूप से अन्य कैदियों के साथ कम बातचीत करते हैं। उदाहरण के लिए दिल्ली की तिहाड़ जेल और राजस्थान की जेलों में कई कैदी पंजाबी बोल और समझ सकते थे। इनमें से कुछ जेलों में कई पंजाबी गैंगस्टर और अलगाववादी भी बंद हैं।

इसके अलावा, अगर अमृतपाल और उसके सहयोगियों को पंजाब की जेल में रखा जाता, तो राज्य में कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती थी। उसे असम ले जाकर पंजाब में अमृतपाल के पक्ष में उठने वाली आवाज को दबाया जा सकता है। कुछ लोग यह भी कह सकते हैं कि असम ही क्यों, गुजरात, उत्तर प्रदेश या महाराष्ट्र क्यों नहीं? दरअसल, महाराष्ट्र की जेलों में कई हाईप्रोफाइल अपराधियों को रखा गया है। एक कारण यह भी हो सकता है कि असम इन राज्यों की तुलना में पंजाब से काफी दूर है। इससे असम की तुलना में इन राज्यों में कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के मकसद से भीड़ जुटाना थोड़ा आसान है।

बता दें कि एक राज्य के हाईप्रोफाइल अपराधियों को दूसरे राज्य में शिफ्ट करने का यह कोई पहला मामला नहीं है। 2021 में जम्मू-कश्मीर से 26 बंदियों को उत्तर प्रदेश की आगरा सेंट्रल जेल में ट्रांसफर किया गया था।

Special coverage by OpIndia on Ram Mandir in Ayodhya

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘कश्मीर समस्या का इजरायल जैसा समाधान’ वाले आनंद रंगनाथन का JNU में पुतला दहन प्लान: कश्मीरी हिंदू संगठन ने JNUSU को भेजा कानूनी नोटिस

जेएनयू के प्रोफेसर और राजनीतिक विश्लेषक आनंद रंगनाथन ने कश्मीर समस्या को सुलझाने के लिए 'इजरायल जैसे समाधान' की बात कही थी, जिसके बाद से वो लगातार इस्लामिक कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं।

शादीशुदा महिला ने ‘यादव’ बता गैर-मर्द से 5 साल तक बनाए शारीरिक संबंध, फिर SC/ST एक्ट और रेप का किया केस: हाई कोर्ट ने...

इलाहाबाद हाई कोर्ट में जस्टिस राहुल चतुर्वेदी और जस्टिस नंद प्रभा शुक्ला की बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि सबूत पेश करने की जिम्मेदारी सिर्फ आरोपित का ही नहीं है, बल्कि शिकायतकर्ता का भी है।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -