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4 आरोपितों को मिली बेल तो HC ने मोहम्मद इकबाल को भी दी जमानत: दिल्ली दंगों में दर्ज हुआ था हत्या का मामला

“इस बात में मतभेद नहीं है कि इस अदालत द्वारा पारित आदेश के बाद 4 आरोपित पहले से ही जमानत पर हैं। हालाँकि ये भी पाया गया कि एएसजी ये बताने में विफल रहे कि वर्तमान याचिकाकर्ता अन्य 4 सह-अभियुक्तों के साथ समान रूप से नहीं जुड़ा है। इसलिए सभी तथ्यों को देखते हुए और समता के दृष्टि से याचिकाकर्ता बेल का अधिकारी है।"

दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों में हत्या व दंगे करने के आरोपित मोहम्मद इकबाल को दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार (दिसंबर 9, 2020) को बेल दे दी। बता दें, इसी साल फरवरी में दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाकों में हिंदू विरोधी दंगे हुए थे। दंगों के दौरान हिंसक भीड़ ने हिंदुओं के घरों और उनके व्यवसायों पर हमला किया था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, न्यायमूर्ति सुरेश कुमार की एकल पीठ ने इकबाल को ₹15,000 के पर्सनल बांड पर जमानत दी। दिल्ली उच्च न्यायालय ने सुनवाई के दौरान पाया कि मामले में शामिल अन्य चार आरोपितों को पहले रिहा कर दिया गया था।

कोर्ट ने फैसला दिया, “इस बात में मतभेद नहीं है कि इस अदालत द्वारा पारित आदेश के बाद 4 आरोपित पहले से ही जमानत पर हैं। हालाँकि ये भी पाया गया कि एएसजी ये बताने में विफल रहे कि वर्तमान याचिकाकर्ता अन्य 4 सह-अभियुक्तों के साथ समान रूप से नहीं जुड़ा है। इसलिए सभी तथ्यों को देखते हुए और समता के दृष्टि से याचिकाकर्ता बेल का अधिकारी है।”

गौरतलब है कि मोहम्मद इकबाल को दिल्ली पुलिस ने हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों के सिलसिले में हिरासत में लिया था। उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 149 , 302 और 395 के तहत मामला दर्ज किया गया था। वहीं मामले को लेकर इकबाल का प्रतिनिधित्व वकील संजय हेगड़े, अनस तन्वी, ईशान पांडे, चंदन गोस्वामी और मुदित माखीजान ने किया था।

जानकारी के लिए बता दें, इकबाल को पहले भी स्थानीय अदालत ने जून में 20,000 रुपए की जमानत बांड पर जमानत दिया था। हालाँकि, एक अन्य हत्या के मामले में शामिल होने के कारण उसे रिहा नहीं किया गया था। उसके परिवार ने आरोप लगाया कि वह निर्दोष था और अपने तीन दोस्तों के साथ मीट खरीदने के लिए बाजार गया था, जब पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया।

साथ ही परिवार वालों ने यह दावा किया कि उन्हें अगले दिन तक उसकी नजरबंदी के बारे में सूचित नहीं किया गया था। मोहम्मद इकबाल के परिवार के सदस्यों ने यह भी आरोप लगाया कि मंडोली जेल अधिकारियों ने स्थानीय दिल्ली की अदालत के जमानत आदेश के बाद भी दूसरे मामले में एफआईआर की एक कॉपी नहीं दी थी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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