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झूठ बोल रहा है इमरान, ‘जय श्री राम’ बोलने के लिए नहीं किया था मजबूर: चश्मदीद

पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जाँच में पता चला है कि घटना को अनावश्यक रूप से सांप्रदायिक रंग दिया जा रहा है। सबूत बताते हैं कि इस्माइल के साथ हाथापाई निजी दुश्मनी की वजह से हुई थी।

महाराष्ट्र के औरंगाबाद के मदीना होटल में काम करने वाले इमरान इस्माइल ने शुक्रवार को 10 लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें उसने कहा था कि गुरुवार की देर रात जब वो घर जा रहा था तो रास्ते में कुछ लोगों ने उसे रोका और जय श्री राम बोलने के लिए मजबूर किया। विरोध करने पर उन लोगों ने इमरान की पिटाई की और जबरदस्ती तीन बार जय श्री राम बुलवाया।

पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जाँच में पता चला है कि घटना को अनावश्यक रूप से सांप्रदायिक रंग दिया जा रहा है। सबूत बताते हैं कि इस्माइल के साथ हाथापाई निजी दुश्मनी की वजह से हुई थी। इमरान को बचाने वाले चश्मदीद (गणेश) ने भी यही बात कही है। गणेश ने कहा है कि इमरान झूठ बोल रहा है कि जय श्री राम नहीं बोलने पर उसके साथ मारपीट की गई।

जानकारी के मुताबिक, इमरान को होटल से घर जाने के दौरान आठ से दस लोगों ने हुडको कॉर्नर इलाके में रोका था। उनमें से एक ने इमरान की मोटरसाइकिल की चाबी ली और पूछा कि वह कहाँ रहता है। इमरान का कहना है कि उन लोगों ने उसे जय श्री राम बोलने के लिए मजबूर किया। जब इमरान ने जय श्री राम बोलने से मना किया तो कथित रूप से उसे डराया और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। इमरान का कहना है कि परेशान होकर उसने उनके सामने 3 बार जय श्री राम के नारे लगाए।

इमरान ने दावा किया है कि इसके बावजूद उनलोगों ने उसे पीटा। इस बीच, शोर-गुल सुनकर पास में रहने वाले गणेश और उनकी पत्नी बाहर आए और इमरान को बचाया। इसके बाद, इमरान बेगमपुरा पुलिस स्टेशन गया और शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस आयुक्त चिरंजीव प्रसाद ने बताया कि कुछ लोग इस घटना को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि जो सबूत सामने आए हैं, वो इस तरफ इशारा नहीं कर रहे। गणेश ने बताया कि मारपीट आपसी दुश्मनी की वजह से हुई थी।  

वहीं, जब ऑपइंडिया ने औरंगाबाद पुलिस से इस मामले पर संपर्क किया, तो उन्होंने कहा कि जाँच जारी है और चश्मदीदों द्वारा किए गए दावों के मद्देनजर, स्पष्ट तौर पर इस बात का दावा नहीं किया जा सकता है कि इमरान को आरोपितों ने जय श्री राम न बोलने के लिए मजबूर किया गया था।

गौरतलब है कि इससे पहले भी उन्नाव में ऐसा ही मामला सामने आया था। यहाँ मुस्लिम छात्रों के बीच क्रिकेट को लेकर मारपीट हुई थी, लेकिन शहर के काजी निसार अहमद मिस्बाही ने आरोप लगाते हुए कहा था कि मदरसे के बच्चों से जबरदस्ती जय श्री राम के नारे लगवाए जा रहे थे और इसका विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की गई है। निसार अहमद ने इस मारपीट को मॉब लिंचिंग से जोड़ने की भी कोशिश की थी।

हालाँकि, ADG (कानून-व्यस्था) ने इस घटना को लेकर बताया था कि जाँच में पता चला है कि मदरसे के बच्चों से धार्मिक नारे नहीं लगवाए गए थे। ऐसे झूठे आरोप लगाकर मेरठ और आगरा में भी शांति भंग करने का प्रयास किया गया, लेकिन जिला और पुलिस प्रशासन के चलते यह नाकाम हो गया। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि उन्नाव में क्रिकेट खेलने के चलते विवाद हुआ था। और क्रिकेट की वजह से ही छात्रों के बीच झगड़ा हुआ।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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