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‘देश में लाखों मस्जिद, 5 बार अरबी में सुनाई जाती है अजान, सब समझे महत्व इसलिए हिंदी में भी बजाई जाए’

“देश की लाखों मस्जिदों से दिन में 5 बार अरबी भाषा में सुनाई जाने वाली अजान इस देश के करोड़ों गैर अरबी लोगों को समझ नहीं आती है। अतएव सरकार एवं मुस्लिम इंतजामिया से निवेदन है कि अजान के महत्व और खासियत से सभी को परिचित करवाने के लिए इसका हिन्दी अनुवाद भी मस्जिदों से बजना चाहिए।”

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रचार साहित्य विभाग के सह प्रभारी विकास प्रीतम सिंह ने बुधवार (जून 30, 2021) को सरकार और मुस्लिम मौलवियों से मस्जिदों में अज़ान पढ़ने के लिए अरबी के साथ-साथ भारतीय भाषाओं के इस्तेमाल का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि देश भर में लाखों मस्जिदों से दिन में पाँच बार अरबी में अज़ान पढ़ी जाती है, जबकि करोड़ों भारतीय अरबी जानते या समझते नहीं हैं।

विकास प्रीतम सिंह ने ट्वीट करते हुए लिखा, “देश की लाखों मस्जिदों से दिन में 5 बार अरबी भाषा में सुनाई जाने वाली अजान इस देश के करोड़ों गैर अरबी लोगों को समझ नहीं आती है। अतएव सरकार एवं मुस्लिम इंतजामिया से निवेदन है कि अजान के महत्व और खासियत से सभी को परिचित करवाने के लिए इसका हिन्दी अनुवाद भी मस्जिदों से बजना चाहिए।”

गौरतलब है कि मस्जिदों से लाउडस्पीकर से अजान पर रोक को लेकर लगातार आवाज उठती रही है। इसी साल मई में इससे जुड़ी याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अदालत के संज्ञान में अफजल अंसारी बनाम यूपी सरकार का केस लाया गया था। इस केस में हाईकोर्ट ने फैसला दिया था कि अजान इस्लाम का आवश्यक एवं अटूट अंग है, लेकिन लाउडस्पीकर से अजान धर्म का आवश्यक हिस्सा नहीं है।

इसी साल मार्च में गोवा में लाउडस्पीकर पर अजान देने पर प्रतिबंध लगाया गया था। वहीं कर्नाटक में राज्य वक्फ बोर्ड ने रात 10 बजे से सुबह 5 बजे के बीच मस्जिदों और दरगाहों पर लाउडस्पीकर के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसी तरह झारखंड हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर सड़क पर नमाज पढ़ने और माइक से अजान देने पर रोक लगाने की माँग भी की गई थी।

भारत में, कानून के अनुसार, लाउडस्पीकर का उपयोग रात में (रात 10:00 बजे से 6:00 पूर्वाह्न के बीच) बंद परिसर को छोड़कर नहीं किया जाना चाहिए। कानून में यह भी कहा गया है कि शोर का स्तर 11dB (A) से अधिक नहीं हो सकता। कई अदालतों के आदेश में कहा गया है कि अधिकारियों को ध्वनि प्रदूषण के कारण धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकरों के उपयोग को प्रतिबंधित करना सुनिश्चित करना चाहिए।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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