Homeदेश-समाजसरकारी योजनाओं में दलाली के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाले BJP नेता के घर फेंका...

सरकारी योजनाओं में दलाली के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाले BJP नेता के घर फेंका बम: बदहाल बंगाल

इलाके में लगी 144 धारा के बाद भी माहौल में तनाव बना हुआ है। माहौल को देखते हुए रविवार को दुकान-बाजार भी बंद रखे गए और छुट्टी के दिन लोगों ने...

पश्चिम बंगाल के वीरभूम में एक बार फिर से तनाव का माहौल है। यहाँ सरकारी योजनाओं में दलाली के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाले भाजपा नेता के घर में बमबारी और फायरिंग की गई है। हालाँकि इस घटना में किसी को कोई नुकसान नहीं पहुँचा है, लेकिन भाजपा का आरोप है कि यह हमला टीएमसी द्वारा करवाया गया है।

दैनिक जागरण की खबर के अनुसार दलाली की रकम को वापस किए जाने की माँग को लेकर नानूर के पांचसोया ग्राम पंचायत में रविवार (23 जून) को भाजपा ने प्रदर्शन करने की योजना बनाई थी, लेकिन प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही भाजपा नेता के घर को निशाना बना दिया गया। तृणमूल के गुंडों को इसका जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।

बंगाल में इस घटना के अलावा नॉर्थ 24 परगना जिले के नरेंद्रपुर थाना क्षेत्र में ‘जय श्रीराम’ बोलने पर टीएमसी द्वारा बीजेपी कार्यकर्ताओं की पिटाई का मामला भी सामने आया, जिसके कारण रविवार (जून 23, 2019) को बड़ी तादाद में भाजपा समर्थकों ने नरेंद्रपुर थाने का घेराव कर आरोपितों की गिरफ्तारी की माँग के लिए प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं का आरोप था कि इलाके में रहने वाले भाजपा समर्थकों को तृणमूल गुंडों द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है और ये सब बेवजह हो रहा है।

खबर के मुताबिक, नॉर्थ 24 परगना जिले के भाटपाड़ा में 20 जून को हुई घटना के कारण इलाके में लगी 144 धारा के बाद भी माहौल में तनाव बना हुआ है। माहौल को देखते हुए रविवार को दुकान-बाजार भी बंद रखे गए और छुट्टी के दिन लोगों ने घर में रहना ही उचित समझा। हालाँकि, पुलिस की ओर से इलाके में हालात सामान्य करने की पूरी कोशिश की जा रही है, लेकिन हालात अभी भी बेकाबू हैं। बिगड़ते माहौल के मद्देनजर ही शनिवार (22 जून) को भाजपा का 3 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल पश्चिम बंगाल के भाटपारा का दौरा करने पहुँचा था। जिसका नेतृत्व भाजपा सांसद एसएस अहलूवालिया ने किया था।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

100 नाराज़ ≠ 100 वोट: भारतीय राजनीति में सिर्फ़ ‘नाराज़गी’ का फ़ैक्टर कभी निर्णायक क्यों नहीं रहा

SC/ST Act, आरक्षण, Caste census, सरकारी नौकरियों में हिस्सेदारी, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय की राजनीति जैसे मुद्दे निश्चित रूप से सवर्णों में असंतोष पैदा कर सकते हैं। इन प्रश्नों को खारिज करना भी राजनीतिक मूर्खता होगी।

12 वर्ष पहले गोरखनाथ पीठ के पीठाधीश्वर, फिर देश के सबसे बड़े सूबे के CM: जनता तक पहुँच और समस्याओं पर तत्काल प्रतिक्रिया –...

योगी आदित्यनाथ की गोरखनाथ पीठाधीश्वर से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तक की यात्रा, विरासत को आगे बढ़ाने से लेकर विकसित होते UP की पूरी कहानी।
- विज्ञापन -