Homeदेश-समाज'हुनर हाट' के माध्यम से बदला है अल्पसंख्यकों का जीवन

‘हुनर हाट’ के माध्यम से बदला है अल्पसंख्यकों का जीवन

पिछले लगभग साढ़े 4 वर्षों में विभिन्न स्कॉलरशिप योजनाओं से अल्पसंख्यक समाज के लगभग 3 करोड 83 लाख ग़रीब विद्यार्थी लाभान्वित हुए हैं, जिनमे लगभग 60% छात्राएँ हैं।

उत्तर प्रदेश के रामपुर में केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने पटवाई स्थित दीक्षित कालेज ऑफ हायर एजुकेशन में केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा चलाई जा रही योजनाओं से स्वीकृत छात्रावास एवं कौशल विकास केंद्र एवं अन्य योजनाओं का उद्घाटन किया।

6 लाख लोगों को मिले हैं रोजगार के अवसर

सरकार द्वारा चलाई जा रही कौशल विकास के अंतर्गत तमाम योजनाओं से लगभग 6 लाख युवाओं को कौशल विकास व रोजगार के अवसर मिले हैं। इनमें से लगभग 50% लड़कियाँ हैं, जिन्हे इसका लाभ प्राप्त हुआ है। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि ‘हुनर हाट’ के माध्यम से पिछले 2 सालों में 2 लाख से ज्यादा अल्पसंख्यक समुदाय के दस्तकारों-शिल्पकारों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के साथ ही राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मार्केट में भी मौक़े दिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि पिछले लगभग साढ़े 4 वर्षों में विभिन्न स्कॉलरशिप योजनाओं से अल्पसंख्यक समाज के लगभग 3 करोड 83 लाख ग़रीब विद्यार्थी लाभान्वित हुए हैं, जिनमे लगभग 60% छात्राएँ हैं।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -