छत्तीसगढ़ में बलात्कार पीड़िता को ही सुना डाली सजा, कहा- इससे गाँव की बदनामी हुई

इस विषय पर पीड़िता की माँ ने बताया कि "कुकर्म करने वाले तो जुर्माने की कीमत देकर छूट गए मगर हम तो बहुत गरीब परिवार से हैं, इतने पैसे कहाँ से लाकर दें।"

छत्तीसगढ़ के जाशपुर जिले से एक चौंका देने वाली खबर सामने आई है। इस जिले में एक गाँव के लोगों ने रेप विक्टिम को ही सजा सुना दी। 23 वर्षीय रेप पीड़िता का दोष था उसने पुलिस से अपने साथ हुए दुष्कर्म की शिकायत करने की हिम्मत जुटाई थी। घटना उस वक़्त की है जब पीड़िता अपने यहाँ से पड़ोसी गाँव में अपने रिश्तेदारों के घर जा रही थी। इसी दौरान आरोपी संदीप और किशोर ने उसके साथ दुष्कर्म किया और उसे इस बारे में किसी से न कहने की धमकी भी दी।

इसके बावजूद पीड़िता ने अगले दिन पुलिस के पास अपने साथ हुई इस घटना पर कार्रवाई की माँग की। छत्तीसगढ़ की पुलिस ने लड़की की मदद करने की बजाय उसकी रिपोर्ट दर्ज तक नहीं की। इसके बाद गाँव में इस मुद्दे पर बैठक हुई, पीड़िता ने न्याय की गुहार लगाते हुए अपनी आपबीती सुनाई, कुकरम करने वालों पर 5000 का जुर्माना लगा दिया गया लेकिन बैठक में मौजूद लोगों ने जो फैसला किया उसे सुनकर पीड़िता भी दंग रह गई।

दरअसल उन्होंने मामले को पुलिस तक ले जाने के लिए पीड़िता को दोषी माना। उनका कहना था कि पीड़िता के इस कदम से गाँव की काफी बदनामी हुई है। इस दोष को पीड़िता के सर मढ़ने के साथ ही उसपर भी 5000 रूपए का जुर्माना भी लगा दिया गया।

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एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार रेप विक्टिम ने बताया, “गाँव के लोगों ने बैठक में मुझपर व मेरे परिवार के लोगों पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया, हमारे पास और कोई विकल्प भी नहीं था।”

इस विषय पर पीड़िता की माँ ने बताया कि “कुकर्म करने वाले तो जुर्माने की कीमत देकर छूट गए मगर हम तो बहुत गरीब परिवार से हैं, इतने पैसे कहाँ से लाकर दें।”

पीड़िता का कहना है कि पुलिस ने दूसरी बार शिकायत करने पर मामला दर्ज किया। अगर यह मामला पहली बार में दर्ज कर लिया जाता तो ऐसी नौबत नहीं आती। बता दें कि बलात्कार की घटना के अगले ही दिन पीड़िता अपनी शिकायत लेकर पुलिस के पास पहुँची थी मगर पुलिस ने इस सम्बन्ध में कोई मामला दर्ज नहीं किया। इसके बाद 12 दिन बीत जाने पर पीड़िता ने एक बार फिर से पुलिस से गुहार लगाई तब जाकर कहीं पुलिस ने उसकी शिकायत दर्ज की।

हालाँकि, पुलिस विभाग ने लड़की की ओर से लगाए गए इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया है। स्थानीय कोतवाली के प्रमुख लक्ष्मण प्रसाद ध्रुवे ने इस मामले पर बोलते हुए कहा कि ‘उसने (पीड़िता) घटना के दस दिन बाद महिला सेल से संपर्क किया। इसके बाद भी उसने मामले की रिपोर्ट नहीं लिखवाई। इसके बाद हमने दोनों आरोपितों के खिलाफ उसका बयान दर्ज किया, और इस मामले में अभी जाँच जारी है।’ वहीं इस मुद्दे पर गाँव में बैठक लगाने वालों में से कोई भी व्यक्ति इस मुद्दे कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।

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