मंदिर वहीं बनेगा: CJI गोगोई पर उमड़ा रामभक्तों का प्यार, बताया ‘आज का हनुमान’

एक यूज़र ने तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की निजी ट्विटर प्रोफाइल पर जाकर वहाँ ही "सीजेआई की जय" के नारे लगाए हैं। इससे पहले 1 फरवरी 1986 को जब फैजाबाद की अदालत ने इमारत का ताला खोलने का आदेश दिया तो उसके पीछे भी किसी काले बंदर की प्रेरणा सामने आई थी।

अयोध्या मामले का ऐतिहासिक पटाक्षेप होने के साथ प्रत्याशित “जय श्री राम” और “जय हनुमान” के साथ एक और जय-जयकार ऐसी होने लगी जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की होगी। यह है भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की जय-जयकार।

सीजेआई गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने ही रामजन्मभूमि के पक्ष में फैसला सुनाया है। फैसले में पीठ ने विवादित स्थल हिन्दुओं को सिपुर्द करते हुए उसे रामजन्मभूमि के रूप में स्वीकार किया है। इस फैसले के बाद से गोगोई रामभक्तों की आँखों के तारे बन गए हैं। कोई उन्हें प्रणाम करने के लिए उनका घर ढूँढ़ रहा है तो कोई उन पर ईश्वर की कृपा बने रहने की कामना कर रहा है।

एक यूज़र ने तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की निजी ट्विटर प्रोफाइल पर जाकर वहाँ ही “सीजेआई की जय” के नारे लगाए हैं।

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ट्विटर पर कुछ लोग सीजेआई गोगोई को ‘आज के समय का हनुमान’ भी बता रहे हैं।

इससे पहले 1 फरवरी 1986 को जब फैजाबाद की अदालत ने इमारत का ताला खोलने का आदेश दिया तो उसके पीछे भी किसी काले बंदर की प्रेरणा सामने आई थी। फैसला देने वाले जज कृष्णमोहन पांडेय ने अपनी आत्मकथा में लिखा है, “जिस रोज मैं ताला खोलने का आदेश लिख रहा था, मेरी अदालत की छत पर एक काला बंदर पूरे दिन फ्लैग पोस्ट को पकड़कर बैठा रहा। जो फैसला सुनने अदालत में आए थे, उस बंदर को फल और मूॅंगफली देते रहे पर बंदर ने कुछ नहीं खाया। चुपचाप बैठा रहा। फैसले के बाद जब मैं घर पहुॅंचा तो उस बंदर को अपने बरामदे में बैठा पाया। मुझे आश्चर्य हुआ। मैंने उसे प्रणाम किया। वह कोई दैवीय ताकत थी।”

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"हिन्दू धर्मशास्त्र कौन पढ़ाएगा? उस धर्म का व्यक्ति जो बुतपरस्ती कहकर मूर्ति और मन्दिर के प्रति उपहासात्मक दृष्टि रखता हो और वो ये सिखाएगा कि पूजन का विधान क्या होगा? क्या जिस धर्म के हर गणना का आधार चन्द्रमा हो वो सूर्य सिद्धान्त पढ़ाएगा?"

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