Homeदेश-समाजअपने 2 बच्चों के लिए दूध लेने निकले थे दलित दिनेश: मुस्लिम दंगाइयों ने...

अपने 2 बच्चों के लिए दूध लेने निकले थे दलित दिनेश: मुस्लिम दंगाइयों ने सिर में मारी गोली, मौत

राजधानी स्कूल का मालिक फैसल फ़ारूक़ है। उसने आरोप लगाया है कि उसके स्कूल पर दंगाइयों ने कब्जा कर लिया था। स्थानीय लोगों के अनुसार वहाँ कई दिनों से पत्थर, बम, गुलेल वगैरह जमा किए जा रहे थे। इस स्कूल की छत 250 दंगाइयों ने आसपास के हिन्दुओं पर तबाही बरपाई थी।

दिल्ली में भड़के हिन्दू-विरोधी दंगे में दंगाई मुस्लिम भीड़ की करतूतें और पीड़ितों की दास्तान जैसे-जैसे सामने आ रही है, वैसे-वैसे इसकी वीभत्सता से पर्दा भी उठता जा रहा है। इन दंगों में जान गँवाने वालों में एक दिनेश कुमार खटिक भी शामिल हैं, जो अपने पीछे पत्नी और छोटे-छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं। दिनेश को दंगाइयों ने मार डाला। वकील मोनिका अरोड़ा ने जानकारी देते हुए बताया कि खटिक दलित हैं।

नीचे संलग्न की गई ट्वीट में आप देख सकते हैं कि किस तरह दिनेश की पत्नी अपने पति की मौत के बाद अपने दोनों बच्चों के साथ बैठी हुई हैं। इनकी चिंता है कि अब बच्चों का पालन-पोषण कैसे होगा। मोनिका अरोड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से पीड़ित परिवार की मदद करने की गुहार लगाई है। देखें ट्वीट:

गोली दिनेश के सीधे सिर में लगी है। मोनिका अरोड़ा ने पूछा है कि अब ‘जय भीम, जय मीम’ का नारा लगाने वाले कहाँ छिपे हैं और दिनेश के हत्यारों को सज़ा दिलाने और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए आवाज़ क्यों नहीं उठा रहे हैं? दिनेश की हत्या तब की गई, जब वो अपने छोटे-छोटे बच्चों के लिए दूध लेने निकले थे। एक बेटा 7 साल का है, वहीं दूसरा मात्र 1.5 साल का है।

बता दें कि दिनेश को गोली राजधानी स्कूल के छत पर जमा दंगाइयों ने मारी। राजधानी स्कूल का मालिक फैसल फ़ारूक़ है। उसने आरोप लगाया है कि उसके स्कूल पर दंगाइयों ने कब्जा कर लिया था। स्थानीय लोगों के अनुसार वहाँ कई दिनों से पत्थर, बम, गुलेल वगैरह जमा किए जा रहे थे। इस स्कूल की छत 250 दंगाइयों ने आसपास के हिन्दुओं पर तबाही बरपाई थी।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

27 साल जेल, टूटा परिवार और अब रिहाई की उम्मीद: दारा सिंह केस के अनसुने पहलू

दारा सिंह, ईसाई मिशनरियों के रैकेट का अंत करने की लड़ाई लड़ रहे थे। वहीं दूसरी तरफ ग्राहम स्टेंस जनजातीयों के ब्रेनवॉश में जुटा था।

सोनम वांगचुक का अनशन हेडलाइन, ग्रामीणों का सत्याग्रह फुटनोट क्यों बन जाता है?

सोनम वांगचुक के भूख हड़ताल पर शोर। लेकिन मध्य प्रदेश के जल सत्याग्रह पर खामोशी। आखिर कौन तय करता है? क्या सरकार हर आमरण अनशन के आगे झुकने को बाध्य है?
- विज्ञापन -