Homeदेश-समाजजिन्हें दी गई ईद पर कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी, वो ही ड्यूटी से रहे...

जिन्हें दी गई ईद पर कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी, वो ही ड्यूटी से रहे नदारद: पुरानी दिल्ली में 60 पुलिस वाले निलंबित, साजिश की मिली थी सूचना

जब निरीक्षण किया गया तो दिल्ली आर्म्ड फोर्सेज की तीसरी बटालियन का एक भी जवान ड्यूटी पर नहीं मिला। इसके बाद उत्तरी दिल्ली के डीसीपी ने 3 मई, 2022 को इन सभी को सस्पेंड कर दिया।

ईद उल फित्र (Eid) के मौके पर दिल्ली में किसी भी अनहोनी से बचने के लिए दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने कई जवानों को तैनात किया था। इसी क्रम में पुरानी दिल्ली में तैनात जवानों को ड्यूटी पर मौजूद नहीं रहने के कारण मंगलवार (3 मई, 2022) को दिल्ली सशस्त्र पुलिस बटालियन (DAP) के 60 कॉन्स्टेबलों की कंपनी को निलंबित कर दिया गया।

दरअसल, ईद से पहले पुलिस को इनपुट्स मिले थे कि कुछ असामाजिक तत्व क्षेत्रों में सक्रिय हैं, जो कि देश की राजधानी में शांति व्यवस्था में खलल डालने की फिराक में हैं। इसी के मद्देनजर किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए DAP (दिल्ली आर्म्ड पुलिस) बटालियन को कई संवेदनशील इलाकों में विभिन्न स्थानों पर तैनात किया गया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब निरीक्षण किया गया तो दिल्ली आर्म्ड फोर्सेज की तीसरी बटालियन का एक भी जवान ड्यूटी पर नहीं मिला। इसके बाद उत्तरी दिल्ली के डीसीपी ने 3 मई, 2022 को इन सभी को सस्पेंड कर दिया। डीसीपी द्वारा जारी आदेश में लिखा था, “रात 9.15 बजे कंपनी बिना किसी सूचना के चली गई। वे ड्यूटी प्वाइंट पर नहीं थे। तीसरी बटालियन से तैनात कर्मचारियों को अनुपस्थित के रूप में चिह्नित किया गया है और उन्हें निलंबित कर दिया गया है।”

इस कंपनी को विकास पुरी इलाके से पुरानी दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में ड्यूटी के लिए डिप्लॉय किया गया था। इन्हें सदर बाजार और लाल किले के आसपास के इलाके में कानून-व्यवस्था की स्थिति की निगरानी करने और ईद-उल-फितर पर किसी भी अप्रिय घटना को रोकने का आदेश दिया गया था।

दिल्ली में मुस्लिमों ने पारंपरिक तरीके से ईद का त्योहार मनाया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने जामा मस्जिद और फतेहपुरी मस्जिद सहित प्रमुख मस्जिदों में आयोजित सामुदायिक प्रार्थनाओं में हिस्सा लिया। ईद की नमाज के बाद दिन भर उत्सव चलते रहे। बड़ी संख्या में लोगों की बाजारों में उमड़ी। लोगों ने इफ्तार पार्टी में भी हिस्सा लिया। वहीं देश के कई हिस्सों में ईद के मौके पर मुस्लिम भीड़ ने जम कर हिंसा की और उत्पात मचाया। राजस्थान के जोधपुर में लगातार दो दिन हिंसा की गई।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘यहाँ मस्जिद थी, है और रहेगी’: संभल दंगे की न्यायिक जाँच आयोग रिपोर्ट में सपा सांसद जिया-उर-रहमान बर्क का जिक्र 100+ बार, 199 साक्षियों...

संभल दंगों की न्यायिक जाँच आयोग की रिपोर्ट में सांसद जिया-उर-रहमान बर्क का 100 बार से भी अधिक बार जिक्र। वो भी सबूतों के साथ।

100 नाराज़ ≠ 100 वोट: भारतीय राजनीति में सिर्फ़ ‘नाराज़गी’ का फ़ैक्टर कभी निर्णायक क्यों नहीं रहा

SC/ST Act, आरक्षण, Caste census, सरकारी नौकरियों में हिस्सेदारी, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय की राजनीति जैसे मुद्दे निश्चित रूप से सवर्णों में असंतोष पैदा कर सकते हैं। इन प्रश्नों को खारिज करना भी राजनीतिक मूर्खता होगी।
- विज्ञापन -