Thursday, June 13, 2024
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‘बाहर निकल गवाहों को धमका सकता है शरजील इमाम, फिर कर सकता है अपराध’: दिल्ली HC में दी है जमानत याचिका, पुलिस ने किया विरोध

पुलिस ने अपनी चार्जशीट में कहा है कि शरजील ने अपने भाषणों के जरिए इन दोनों कानूनों को लेकर एक खास धार्मिक समुदाय के लोगों में भय पैदा कर सरकार के खिलाफ उकसाने का काम किया है।

दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों के आरोपित शरजील इमाम (Sharjeel Imam) की जमानत याचिका का विरोध करते हुए दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) में अपना जवाब दाखिल किया है। अदालत में पुलिस ने कहा कि जमानत मिलने पर आरोपित को जमानत देने पर गवाहों को धमकी देकर उन्हें प्रभावित कर सकता है और दंगे जैसी गतिविधियों में दोबारा संलिप्त हो सकता है।

इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) के विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़काऊ भाषण देने और लोगों को उकसाने के मामले में दिल्ली पुलिस से उसका जवाब माँगा था।

पुलिस ने यह भी कहा कि उसने अपने भाषणों के जरिए असम में नरसंहार का झूठा अफवाह फैलाने की भी कोशिश की। उसने अपने भाषणों के जरिए असम के एक विशेष धार्मिक समुदाय को मध्य भारत से काटने के लिए उकसाया था। भाषण में कही गई बातें भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 124ए/153ए के तहत आती हैं। पुलिस ने यह भी बताया कि शरजील इमाम की फोन की लोकेशन (CDR) 13 दिसंबर 2019 को जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI) और 15 दिसंबर को शाहीन बाग में थी।

पुलिस ने अपनी चार्जशीट में कहा है कि शरजील ने अपने भाषणों के जरिए इन दोनों कानूनों को लेकर एक खास धार्मिक समुदाय के लोगों में भय पैदा कर सरकार के खिलाफ उकसाने का काम किया है। जबकि यह कानून असम छोड़कर देश के बाकी हिस्सों में यह कानून लागू होना अभी बाकी है।

गौरतलब है कि दिल्ली की एक अदालत (Delhi Court) ने हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों से जुड़े मुख्य आरोपित शरजील इमाम (Sharjeel Imam) के खिलाफ 24 जनवरी 2022 को देशद्रोह, गैरकानूनी गतिविधियों के लिए सजा (UAPA) समेत कई अन्य धाराएँ लगाने का आदेश दिया था। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (यूपी) और जामिया इलाके (दिल्ली) में एंटी-सीएए (Citizenship Amendment Act) प्रदर्शन के दौरान शरजील द्वारा दिए गए भड़काऊ भाषणों को लेकर ये धाराएँ लगाई जाएँगी।

इससे नवंबर 2021 में देशद्रोह के आरोप में जेल में बंद शरजील इमाम को इलाहबाद हाईकोर्ट ने एक मामले में (27 नवम्बर 2021) को जमानत दी थी। यह जमानत अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में CAA कानून के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने के मामले में मिली है। शरजील इमाम ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में यह भाषण 16 दिसंबर 2019 को दिया था। तब अलीगढ़ पुलिस ने उसके खिलाफ देशद्रोह के तहत केस दर्ज किया था। शरजील इमाम फ़िलहाल तिहाड़ जेल में बंद है। इससे पहले दिल्ली की साकेत कोर्ट ने सीएए-एनआरसी के विरोध में शरजील इमाम द्वारा दिए गए भड़काऊ भाषण मामले में उसकी जमानत याचिका ख़ारिज कर दी थी।

शरजील इमाम का नाम शाहीन बाग़ प्रदर्शन के मुख्य आयोजकों में भी लिया जाता है। वह JNU का पूर्व छात्र है। 2013 में उसने जेएनयू में आधुनिक इतिहास से पोस्ट ग्रेजुएशन किया था। इसी के साथ उसने एमटेक की पढ़ाई आईआईटी बॉम्बे से पूरी की। वह मूल रूप से वह बिहार के जहानाबाद स्थित गाँव काको का निवासी है। शरजील इमाम पर मणिपुर, असम और अरुणाचल प्रदेश में भी केस दर्ज हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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