Homeदेश-समाज'नो वन किल्ड सुनंदा पुष्कर': अदालत ने शशि थरूर को नहीं माना दोषी, कॉन्ग्रेस...

‘नो वन किल्ड सुनंदा पुष्कर’: अदालत ने शशि थरूर को नहीं माना दोषी, कॉन्ग्रेस सांसद ने कहा- आभारी हूँ

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट की विशेष जज गीतांजलि गोयल ने फैसला सुनाते हुए कॉन्ग्रेस नेता को बरी कर दिया। थरूर अभी तक जमानत में चल रहे थे और उनके खिलाफ दिल्ली पुलिस के द्वारा आईपीसी की धारा 306 और 498A के तहत चार्जशीट दायर की गई थी।

सुनंदा पुष्कर की संदिग्ध मौत के मामले में दिल्ली की अदालत ने बुधवार (18 अगस्त 2021) को कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर को दोष मुक्त कर दिया। सुनंदा की मौत के बाद थरूर पर आत्महत्या के लिए उकसाने और वैवाहिक हिंसा से जुड़ी धाराओं में केस दर्ज किया गया था और उन्हें मुख्य आरोपित बनाया गया था।

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट की विशेष जज गीतांजलि गोयल ने फैसला सुनाते हुए कॉन्ग्रेस नेता को बरी कर दिया। थरूर अभी तक जमानत में चल रहे थे और उनके खिलाफ दिल्ली पुलिस के द्वारा आईपीसी की धारा 306 और 498A के तहत चार्जशीट दायर की गई थी। अदालत के फैसले पर खुशी जताते हुए थरूर ने कहा कि पिछले साढ़े सात साल उनके लिए किसी टॉर्चर की तरह रहे।

हालाँकि, कोर्ट का फैसला आने के बाद सोशल मीडिया में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कॉन्ग्रेस के सदस्यों और समर्थकों ने जहाँ इस फैसले के समर्थन में प्रतिक्रिया व्यक्त की वहीं कई यूजर्स ने इस फैसले पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए भारतीय न्यायपालिका पर प्रश्न उठाया।

ज्ञात हो कि जनवरी 2014 में दिल्ली के होटल में शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर संदिग्ध हालत में मृत पाई गई थीं। इस मामले में मई 2018 में दिल्ली पुलिस के द्वारा एफआईआर दर्ज की गई थी और थरूर को मामले का मुख्य आरोपित बनाया गया था।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

विवादों में ‘कॉकरोचों’ का 6 जून का प्रदर्शन, दिपके ने माना- ‘नहीं ली प्रोटेस्ट की परमिशन’: समझें- SC का फैसला, 7 दिन वाला नियम...

CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन के बहाने समझिए जंतर-मंतर पर धरना देने की पूरी प्रक्रिया, दिल्ली पुलिस के नियम और सुप्रीम कोर्ट का रुख।

‘पहले मंदिर में नमाज पढ़ेंगे, फिर कहेंगे मस्जिद थी’: बुलंदशहर से भोजशाला तक, हिंदू पवित्र स्थलों पर दावों का कट्टरपंथियों का पैटर्न और लिबरल...

हिंदुओं के पवित्र स्थानों पर नमाज अदा करना भूल नहीं, सोची-समझी साजिश है। यदि कट्टरपंथियों का मन इतना ही साफ होता तो मंदिरों पर कब्जा नहीं करते।
- विज्ञापन -