Wednesday, May 25, 2022
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कोर्ट ने दिल्ली दंगों में छत पर गुलेल और पेट्रोल बम केस में राजधानी स्कूल के मालिक फैसल फारुख को हिरासत में भेजा

"जिस तरह से 24 फरवरी को दंगे भड़के और खासतौर पर राजधानी स्कूल और उसके आसपास, उससे स्पष्ट है कि स्थानीय स्तर पर कोई साजिश रची गई। स्थानीय व्यक्ति ने स्थानीय प्रदर्शनकारियों को एकत्र किया। हमारे सामने प्रश्न यह है कि कैसे इतनी बड़ी गुलेल इमारत के ऊपर लगाई गई जो फारुख की है।"

उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगा मामले में गिरफ्तार शिव विहार के राजधानी स्कूल के मालिक फैजल फारुख से पूछताछ के लिए कड़कड़डूमा कोर्ट ने पुलिस को एक दिन का रिमांड सोमवार (जुलाई 6, 2020) को दे दिया। हालाँकि, इससे पहले मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने फारुख का पुलिस रिमांड देने से इनकार कर दिया था।

कड़कड़डूमा अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के 24 जून के आदेश को खारिज करते हुए फैजल से पूछताछ के लिए पुलिस को एक दिन का रिमांड दिया। हालाँकि कोर्ट ने निर्देश दिया कि रिमांड के दौरान पुलिस उसे दिल्ली से बाहर नहीं ले जा सकती। 

पुलिस ने रिमांड माँगते हुए कहा था कि आरोपित से यह पूछताछ करनी है कि दंगों में बड़ी गुलेल को राजधानी स्कूल की छत पर कैसे लगाया गया और इस गुलेल का प्रयोग इलाके में आगजनी के लिए कैसे किया गया।

करीब डेढ़ घंटे दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि इस मामले की जाँच जरुरी है और पुलिस के पास जाँच के लिए एक दिन का ही हिरासत लेने का अधिकार बचा है। उसके बाद कोर्ट ने फैसल फारुख को एक दिन की पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया। 

अदालत ने अपने आदेश में कहा, “जिस तरह से 24 फरवरी को दंगे भड़के और खासतौर पर राजधानी स्कूल और उसके आसपास, उससे स्पष्ट है कि स्थानीय स्तर पर कोई साजिश रची गई। स्थानीय व्यक्ति ने स्थानीय प्रदर्शनकारियों को एकत्र किया। हमारे सामने प्रश्न यह है कि कैसे इतनी बड़ी गुलेल इमारत के ऊपर लगाई गई जो फारुख की है।” अदालत ने पूछताछ के दौरान कोरोना वायरस को लेकर जारी गाइडलाइन्स का भी ध्यान रखने को कहा।

इसके साथ ही अदालत ने यह भी कहा, “मैं आरोपित के अधिकारों के प्रति सजग हूँ। इसके साथ ही उतना ही जाँच एजेंसी के हक के प्रति भी सजग हूँ। अब स्थानीय पुलिस के पास प्रतिवाद (फारुख) की हिरासत लेने के लिए एक दिन का समय है, इसलिए मैं पुराने आदेश को निरस्त कर प्रतिवादी की एक दिन की हिरासत जाँच अधिकारी/ थाना प्रभारी दलायलपुर को इस शर्त पर देता हूँ कि वह प्रतिवादी को दिल्ली के बाहर नहीं ले जाएँगे।” 

गौरतलब है कि उत्तर पूर्वी दिल्ली में 25 फरवरी को हुए दंगे के दौरान शिव विहार स्थित राजधानी स्कूल के मालिक फैजल फारुख को दंगा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। हालाँकि फैजल के खिलाफ कोई ठोस सबूत न पेश कर पाने पर निचली अदालत ने उसे जमानत दे दी थी, लेकिन पुलिस ने दंगे से जुड़े दूसरे मामले में उसे गिरफ्तार कर लिया था।

मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ऋचा परिहार ने पिछले 24 जून को फैजल फारुख को पुलिस हिरासत में भेजने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में चार महीने की देरी की गई है जबकि जाँच अधिकारी को घटना के पहले दिन से उसकी जानकारी थी। 

उल्लेखनीय है कि इससे पहले दिल्ली पुलिस ने अदालत में दायर चार्जशीट में फैजल फारुख को एक मुख्य साजिशकर्ता के रूप चिन्हित करते हुए कहा था कि जब पूर्वोत्तर दिल्ली में दंगे हो रहे थे, उस समय वो तबलीगी जमात के प्रमुख मौलाना साद के करीबी अब्दुल अलीम के संपर्क में था।

जाँच के दौरान यह पाया गया था कि हिंसा बड़ी साजिश के तहत हुई और राजधानी स्कूल का मालिक फैजल फारुख हिंसा के ठीक पहले पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के कई नेताओं, पिंजरा तोड़ ग्रुप, निज़ामुद्दीन मरकज़, जामिया कोऑर्डिनेशन कमेटी और देवबंद के कई मौलवियों-आलिमों के संपर्क में था। उसके मोबाइल से इस बात के सबूत मिले हैं।

दंगे के दौरान फैजल फारुख के स्कूल की छत पर एक बड़ा गुलेल लगाया गया था। इसकी मदद से हिंदुओं और उनकी संपत्तियों और पेट्रोल बम से निशाना बनाया गया था। दंगों में इस स्कूल को कोई नुकसान नहीं पहुॅंचा था। लेकिन इसके ठीक बगल में स्थित डीआरपी पब्लिक स्कूल तबाह हो गया था। पुलिस को राजधानी स्कूल की छत की चारदीवारी पर लगाई गई गुलेल और अन्य ज्वलनशील पदार्थ बरामद हुए थे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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