Thursday, June 20, 2024
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‘हिंदू कोई धर्म नहीं, सबको सिख हो जाना चाहिए’: किसान आंदोलन की आड़ में कम्युनल कार्ड

73 वर्षीय हवा सिंह सांगवान सीआरपीएफ के पूर्व अधिकारी हैं और जाट आंदोलन के प्रमुख नेता भी।वे लगातार बहादुरगढ़, झज्जर, हरियाणा से जाट समुदाय के लिए आरक्षण माँगते रहे हैं। साल 2011 में ‘रेल रोको’ उपद्रव में उनकी अहम भूमिका थी।

हरियाणा के बहादुरगढ़ के नामी जाट नेता हवा सिंह सांगवान ने पिछले हफ्ते ऐलान किया कि वह 21 अप्रैल को 250-300 लोगों के साथ सिख धर्म अपनाएँगे। उन्होंने कहा कि हिंदू कोई धर्म नहीं है, सबको सिख धर्म स्वीकार लेना चाहिए। ये वही नेता हैं जिन्होंने हरियाणा में जाट आरक्षण की आग को भड़काया था। 

टिकरी बॉर्डर पहुँचे सांगवान ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों की माँग नहीं मान रही है। वह कानून लागू करने की कोशिश कर रही है। लेकिन किसान ऐसा नहीं होने देंगे। सांगवान ने ये भी माँग उठाई कि 26 जनवरी को हुई हिंसा में जितने भी लोगों पर केस हुआ है, सबको वापस लिया जाना चाहिए।

किसानों को भड़काते हुए सांगवान ने कहा कि चूँकि सरकार उनकी माँग नहीं सुन रही है, इसलिए उन्हें नए प्लान की जरूरत है। आगे उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने बातें नहीं मानी तो वह 250-300 लोगों के साथ मिल कर सिख धर्म अपना लेंगे।

कौन हैं हवा सिंह सांगवान?

बता दें कि 73 वर्षीय हवा सिंह सांगवान सीआरपीएफ के पूर्व अधिकारी हैं और जाट आंदोलन के प्रमुख नेता भी।वे लगातार बहादुरगढ़, झज्जर, हरियाणा से जाट समुदाय के लिए आरक्षण माँगते रहे हैं। साल 2011 में ‘रेल रोको’ उपद्रव में उनकी अहम भूमिका थी। इसके अलावा ये भी कहा जाता है कि साल 1990, में सांगवान को अयोध्या में पोस्ट किया गया था। उस समय लाल कृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा जब वहाँ पहुँची तो वह वही साइट पर थे और उन्होंने कई बार विवादित ढाँचे को बचाने की कोशिश की थी।

साल 2020 में अहीर समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँचाने के आरोप में हवा सिंह को गिरफ्तार किया गया था। रिपोर्ट्स बताती हैं कि उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी राव तुला राम और अहीर समुदाय के लिए अपमानजनक टिप्पणी की थी। बाद में विवाद इतना बढ़ा कि उन्हें अपना पोस्ट डिलीट करना पड़ा और उन्होंने माफीनामा भी जारी किया। इस मामले में उनके ऊपर आईपीसी की धारा 153ए, 505 (2) के तहत साइबर पुलिस थाने में केस दर्ज हुआ था और लैपटॉप भी सीज कर लिया गया था।

गौरतलब है कि वर्तमान में जब कथित किसान आंदोलन चुनिंदा नेताओं को छोड़ कर भारी जनसमर्थन नहीं पा रहा है तो इस प्रोटेस्ट को सांप्रदायिक व जातिगत रंग दिया जाने का प्रयास हो रहा है। हाल में हरसिमरत बादल ने लोकसभा में इस पूरे आंदोलन को सिख बनाम हिंदू का मामला बता दिया था। ये भाषा बिलकुल वैसी ही थी जिस तरह से खालिस्तानी बोलते हैं। उससे पहले साल 2020 के दिसंबर माह में बीकेयू प्रवक्ता राकेश टिकैत पर ब्राह्मण विरोधी टिप्पणी करने के मामले में केस दर्ज हुआ था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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