Sunday, May 19, 2024
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30-40 वर्ष के 40 हजार तमिल ब्राह्मणों को यूपी-बिहार में दुल्हन की तलाश, इस कारण से शादी के लिए नहीं मिल रही लड़कियाँ

तमिल पुरुषों के लिए दुल्हन खोजने के लिए देश की राजधानी दिल्ली, लखनऊ और पटना में समन्वयक नियुक्त किए जाएँगे। इनमें वे लोग शामिल होंगे हिंदी जो पढ़, लिख और बोल सकते हैं।

शादी के इंतजार में उम्र के तीसवें दशक में पहुँच चुके तमिलनाडु में 40,000 से अधिक तमिल ब्राह्मणों को दुल्हन का अभी भी इंतजार है। लड़कियों की कमी के कारण उनके लिए राज्य में दुल्हन मिलना मुश्किल हो रहा है, इसलिए शादी के लिए ये लोग उत्तर प्रदेश और बिहार का रूख कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तमिल ब्राह्मण पुरुषों की दुल्हन खोजने लिए तमिलनाडु ब्राह्मण एसोसिएशन (टीबीए) ने इन दो राज्यों में विशेष अभियान शुरू किया है। बता दें कि चेन्नई से लखनऊ की दूरी तकरीबन 2 हजार किलोमीटर है।

टीबीए के अध्यक्ष एन नारायणन ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा, “हमने अपना विशेष अभियान शुरू किया है।” कुछ आँकड़ों का हवाला देते हुए नारायणन ने कहा कि 30-40 साल के 40,000 से ज्यादा तमिल ब्राह्मण पुरुष शादी करने में असमर्थ हैं क्योंकि तमिलनाडु में दुल्हन नहीं मिल पा रही हैं। उन्होंने कहा कि अगर विवाह योग्य 10 ब्राह्मण लड़के हैं तो इसके मुकाबले लड़कियाँ केवल 6 हैं।

उन्होंने बताया कि तमिल ब्राह्मण पुरुषों के लिए दुल्हन खोजने के लिए देश की राजधानी दिल्ली, लखनऊ और पटना में समन्वयक नियुक्त किए जाएँगे। इनमें वे लोग शामिल होंगे हिंदी जो पढ़, लिख और बोल सकते हैं। एसोसिएशन के मुताबिक, वह लखनऊ और पटना के लोगों के संपर्क मे है। नारायणन ने आगे बताया कि कई ब्राह्मणों ने इस मुहिम का स्वागत किया है, लेकिन कई के विचार इससे मेल नहीं खा रहे।

शिक्षाविद्, एम परमेश्वरन ने कहा कि लिंग अनुपात में भारी अंतर के कारण राज्य में विवाह के योग्य तमिल ब्राह्मण लड़कियाँ मिल नहीं रही हैं। उन्होंने बताया कि लड़के के साइड से हमेशा धूमधाम और जोरो-शोरों से शादी की उम्मीद ही क्यों जाती है? लड़कों के माता-पिता क्यों चाहते हैं कि शादियाँ आलीशान मैरिज हॉल में ही हों? साधारण तरीके से भी तो शादी कराई जा सकती है।

परमेश्वरन ने कहा कि लड़की के परिवार को शादी का पूरा खर्च उठाना पड़ता है और यह तमिल ब्राह्मण समुदाय का अभिशाप है। बड़ी शादियाँ एक स्टेटस सिंबल बन गई हैं और यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। समुदाय को प्रगति चुननी चाहिए और दिखावे को अस्वीकार करना चाहिए।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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